योगी सरकार को बदनाम करा रही बिजनौर पुलिस, खबर से बौखलाकर पत्रकारों पर किया फर्जी मुकदमा

बिजनौर। अपराध और अपराधों पर लगाम लगाने में नाकाम बिजनौर पुलिस अब अपनी नाकामियां और कारगुजारियां छुपाने के लिये लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर अपनी हिटलरशाही चलाने में लगी है। बाल्मीकि समाज के परिवार का दबंगों द्वारा पानी रोक देने और पंचायत करने के बाद परिवार द्वारा पलायन की घटना को उजागर करने पर पीडि़तों की मदद कर दबंगो पर कार्यवाही करना तो दूर उल्टा पीडितो की आवाज उठाने वाले पत्रकारों को ही फर्जी मुकदमे में फंसाने में लगीं है। पत्रकारों पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने पर  बिजनौर पुलिस की पूरे प्रदेश में छवि तो धूमिल हो रही है वही जनपद में पुलिस की इस हरकत से अपनी ही किरकिरी हुई है।

बेहद शांत माना जाने वाला जनपद अब अपराधियों की शरणस्थली बन चुका है। जनपद में अपराधों को बढ़ाने में पुलिस की बहुत बड़ी भूमिका हो चली है रंगदारों भूमाफियाओं से हमसाज पुलिस नित नए कारनामों से चर्चा में है और प्रदेश की योगी सरकार की अपराधमुक्त प्रदेश की मंशा पर पलीता लगाने में लगी है। पुलिस ने दमन की नीति अपनाते हुए लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। घटनाक्रम के अनुसार मण्डावर थाना क्षेत्र के ग्राम बसी में रहने वाली बाल्मीकि समाज की एक विधवा महिला लोकेश द्वारा गांव के दबंगों पर आरोप लगाया गया था कि गांव के सरकारी नल पर पानी भरने से छुआछूत के चलते उसे पानी भरने से रोका गया और विरोध करने पर मारपीट की मण्डावर पुलिस की हीला हवाली और दबंगों पर कोई कार्रवाई न करने पर मजबूर हुई महिला ने गांव से पलायन को मजबूर होकर अपने मकान पर मकान बिकाऊ है लिखवा दिया।

मांमला समाचारों की सुर्खियों में आने से मण्डावर पुलिस के साथ साथ आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया और अपनी नाकारापन और नाकामी छुपाते हुए आनन फानन में एक चैनल के पत्रकार शकील अहमद और मेरठ से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र के रिपोर्टर आशीष तोमर पर पुलिस की छवि खराब करने का हवाला देते हुए संगीन धाराओं में मण्डावर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। पत्रकारों पर की गई पुलिसिया कार्रवाई से जहां जनपद के समस्त पत्रकारों में आक्रोश है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही पत्रकारो पर दर्ज फर्जी मुकदमा जल्द खत्म नहीं किया गया तो बडे स्तर पर पुलिस के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

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