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	<title>हेल्थ &#8211; Bhaskar Times</title>
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	<title>हेल्थ &#8211; Bhaskar Times</title>
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		<title>कहीं आपके ‘अनकहे जज्बातों’ का नतीजा तो नहीं शरीर में बढ़ता दर्द? </title>
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		<pubDate>Fri, 01 May 2026 06:31:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="517" height="326" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/21.jpg 517w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/21-300x189.jpg 300w" sizes="(max-width: 517px) 100vw, 517px" />क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप अपने अंदर चल रही भावनाओं को न तो ठीक से समझ पा रहे हैं और न ही किसी को बता पा रहे हैं? अगर हां, तो यह सिर्फ मन की उलझन नहीं है, बल्कि यह आपके रोजमर्रा के शारीरिक दर्द को और भी बदतर बना सकता है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="517" height="326" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/21.jpg 517w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/21-300x189.jpg 300w" sizes="(max-width: 517px) 100vw, 517px" /><div><img width="517" height="326" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप अपने अंदर चल रही भावनाओं को न तो ठीक से समझ पा रहे हैं और न ही किसी को बता पा रहे हैं? अगर हां, तो यह सिर्फ मन की उलझन नहीं है, बल्कि यह आपके रोजमर्रा के शारीरिक दर्द को और भी बदतर बना सकता है।</p>
<p>बता दें, भावनाओं को पहचानने और उन्हें व्यक्त करने में होने वाली इसी कठिनाई को ‘एलेक्सिथिमिया’ कहा जाता है, जिसका सीधा असर हमारी शारीरिक तकलीफों पर पड़ता है।</p>
<p><strong>अमेरिका का एक बड़ा अध्ययन<br /></strong>इस विषय पर अमेरिका के प्रतिष्ठित ‘जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन’ के शोधकर्ताओं ने एक अहम अध्ययन किया है। यह शोध ‘हेल्थ साइकोलॉजी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अपने निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने लंबे समय से दर्द से जूझ रहे 1,450 से अधिक मरीजों का गहराई से सर्वे किया और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी। यह अपनी तरह के उन शुरुआती शोधों में से एक है जो यह बताता है कि समय के साथ दर्द और भावनाओं का यह रिश्ता कैसे काम करता है।</p>
<p><strong>मानसिक तनाव और दर्द का गहरा कनेक्शन<br /></strong>अध्ययन में एक बहुत ही चौंकाने वाली बात सामने आई है। जो लोग अपनी भावनाओं को समझने और उनका वर्णन करने में संघर्ष करते हैं, वे समय के साथ बढ़ते मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। इस तनाव के कारण दर्द उनके दैनिक जीवन के कामों में बहुत ज्यादा रुकावट डालने लगता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति का पुराना दर्द अक्सर उसके सोचने के तरीके, दर्द के प्रति उसकी भावनात्मक प्रतिक्रिया और परिस्थितियों का सामना करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करता है। ‘एलेक्सिथिमिया’ इंसान के मानसिक तनाव को बढ़ाकर उसके दर्द को और ज्यादा हावी कर देता है।</p>
<p><strong>चिंता, अवसाद और दर्द की अधिक तीव्रता<br /></strong>शोध के आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि पुराने दर्द से पीड़ित जिन मरीजों में ‘एलेक्सिथिमिया’ का स्तर अधिक था, उनकी परेशानियां भी सामान्य से ज्यादा थीं। ऐसे मरीजों ने न सिर्फ दर्द की बहुत अधिक चुभन और शारीरिक रुकावटों का सामना किया, बल्कि उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण भी काफी ज्यादा पाए गए।</p>
<p><strong>इलाज के लिए एक नई उम्मीद<br /></strong>इस अध्ययन ने पुराने दर्द के इलाज का एक नया और कारगर नजरिया पेश किया है। साक्ष्यों से यह साबित होता है कि अगर पुराने दर्द से परेशान मरीजों का इलाज करते समय ‘एलेक्सिथिमिया’ (यानी भावनाओं को व्यक्त न कर पाने की समस्या) को भी सुधारने पर ध्यान दिया जाए, तो उन्हें दर्द से काफी हद तक राहत दिलाई जा सकती है। आसान शब्दों में कहें तो, अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें खुलकर व्यक्त करना आपके दर्द को कम करने की सबसे अच्छी दवा बन सकता है।</p>
</div>
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		<title>रात में खाया भारी खाना शरीर में बन रहा है जहर? </title>
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		<pubDate>Fri, 01 May 2026 06:31:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="709" height="400" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1.jpg 709w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1-300x169.jpg 300w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 709px) 100vw, 709px" />आपको भी यह सुनकर हैरानी होती होगी कि एक ही तरह की कैलोरी लेने का असर सुबह और शाम अलग कैसे हो सकता है‌? सुबह जहां हैवी नाश्ता खाने की सलाह दी जाती है, वहीं रात को दलिया या खिचड़ी जैसा लाइट भोजन करने की। आखिर ऐसा क्यों है कि कैलोरी में एक समान होने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="709" height="400" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1.jpg 709w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1-300x169.jpg 300w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 709px) 100vw, 709px" /><div><img loading="lazy" width="709" height="400" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1.jpg 709w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/05/2-1-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 709px) 100vw, 709px"></p>
<p>आपको भी यह सुनकर हैरानी होती होगी कि एक ही तरह की कैलोरी लेने का असर सुबह और शाम अलग कैसे हो सकता है‌? सुबह जहां हैवी नाश्ता खाने की सलाह दी जाती है, वहीं रात को दलिया या खिचड़ी जैसा लाइट भोजन करने की। आखिर ऐसा क्यों है कि कैलोरी में एक समान होने के बावजूद खाने का समय उसे पचना आसान या कठिन बना देता है।</p>
<p><strong>आपका शरीर भी चलता है घड़ी की टिक-टिक पर<br /></strong>सुबह के समय आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और दिन ढलते ही इसकी स्पीड कम होने लगती है। इसलिए सुबह कुछ भी हैवी खा लेने के बावजूद वह आसानी से पच जाता है और हॉर्मोन्स बैलेंस रहते हैं। रात में ऐसा करने पर स्लो मेटाबॉलिज्म की वजह से कैलोरी भी धीरे-धीरे बर्न होती है।</p>
<p><strong>इंसुलिन सेंसिटिविटी भी सुबह होती है ज्यादा<br /></strong>यह एक हॉर्मोन है, जोकि शरीर में कार्बोहाइड्रेट से ग्लूकोज को एनर्जी में तब्दील कर देता है या स्टोर कर देता है। सुबह के समय आपके सेल्स भी इंसुलिन को लेकर ज्यादा सक्रिय तरीके से रिस्पॉन्स करते हैं, जिसकी वजह से ग्लूकोज ज्यादा अच्छी तरह अब्जॉर्ब और यूज होता है। वहीं शाम को यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है और यह ग्लूकोज फैट के रूप में स्टोर होने लगता है। ऐसा होने से डायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>ओवरईटिंग करते हैं<br /></strong>घ्रेलिन और लेप्टिन दो ऐसे हॉर्मोन हैं जो आपके ब्रेन को भूख लगने का संकेत देते हैं। अगर सुबह आपने नाश्ता नहीं किया तो इसका बैलेंस बिगड़ सकता है। इस वजह से लेट नाइट ओवरईटिंग का भी खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, सुबह के समय हैवी नाश्ता करने वालों को दिनभर भूख का एहसास कम होता है।</p>
<p><strong>रात में चुनते हैं गलत ऑप्शन<br /></strong>अगर सुबह के समय पेटभर नाश्ता ना किया हो तो रात के वक्त चिप्स, आइसक्रीम, फास्ट फूड या हाई फैट वाली चीजें ही खाने की इच्छा होती है। रात के समय पचने की प्रक्रिया स्लो होने की वजह से ये चीजें फैट के रूप में स्टोर होती जाती हैं।</p>
<p><strong>नींद नहीं आती<br /></strong>रात के समय हैवी खाने से नींद भी गड़बड़ हो जाती है, खासकर अगर आपने हाई फैट या शुगर वाली चीजें खाई हों। नींद के साथ-साथ इस तरह की परेशानी भी होती है:-</p>
<p>सीने में जलन या एसिड रिफ्लक्स<br />ब्लड शुगर का बढ़ना<br />बेचैनी</p>
<p><strong>ब्रेकफास्ट में ये चीजें लेने से मिलेगा फायदा<br /></strong>ओट्स और नट्स<br />साबुत अनाज से बनी चीजें, अंडे<br />वेजिटेबल पोहा, उपमा</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लंच या डिनर के तुरंत बाद तरबूज खाने की न करें गलती!</title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 06:32:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="770" height="501" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8.jpg 770w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8-300x195.jpg 300w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8-768x500.jpg 768w" sizes="(max-width: 770px) 100vw, 770px" />चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए लोग अक्सर ऐसे फूड्स का सहारा लेते हैं, जो शरीर में ठंडक बनाए रखे। तरबूज इन्हीं फूड्स में से एक है, पानी का बेहतरीन सोर्स होने के साथ-साथ सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है। हाल ही में मुंबई में डिनर में बिरयानी खाने के बाद तरबूज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="770" height="501" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8.jpg 770w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8-300x195.jpg 300w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8-768x500.jpg 768w" sizes="(max-width: 770px) 100vw, 770px" /><div><img loading="lazy" width="770" height="501" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8.jpg 770w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/04/1-8-768x500.jpg 768w" sizes="(max-width: 770px) 100vw, 770px"></p>
<p>चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए लोग अक्सर ऐसे फूड्स का सहारा लेते हैं, जो शरीर में ठंडक बनाए रखे। तरबूज इन्हीं फूड्स में से एक है, पानी का बेहतरीन सोर्स होने के साथ-साथ सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी होता है।</p>
<p>हाल ही में मुंबई में डिनर में बिरयानी खाने के बाद तरबूज खाने से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत की खबर ने सभी को डरा दिया है। अब लोगों के मन में इसे लेकर तरह-तरह के सवाल आ रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें, तो तरबूज हमेशा से ही एक हेल्दी फ्रूट रहा है और मुंबई के मामले में मौत की वजह तरबूज ही है, यह फिलहाल साफ नहीं हुआ है। ऐसे में इसे लेकर मन में कोई भी डर रखना बेकार ही है।</p>
<h3 class="wp-block-heading">तरबूज से ब्लोटिंग!</h3>
<p>हालांकि, कुछ लोगों का पेट लंच या डिनर के तुरंत बाद तरबूज खाने से किसी गुब्बारे की तरह भारी होकर फूलने लगता है, लेकिन यह घबराने वाली बात नहीं है। आइए मेदांता अस्पताल, नोएडा में डायटेटिक्स डिपार्टमेंट की हेड डायटीशियन <em><strong>डॉ. निधि सहाय</strong></em> से जानते हैं क्यों खाने के बाद तरबूज खाने से ब्लोटिंग होती है और इसे खाने का सही नियम क्या है।</p>
<p><strong>ब्लोटिंग और तरबूज का कनेक्शन<br /></strong>गर्मियों में हमारा पाचन (Digestion) नेचुरली थोड़ा सुस्त हो जाता है। शरीर अपना ज्यादातर फोकस हमारे बॉडी टेम्परेचर को कंट्रोल करने में लगा देता है। अब ऐसे में जब हम कोई भारी खाना (प्रोटीन या फैट से भरपूर) खाते हैं, तो पेट उसे धीरे-धीरे पचाता है। वहीं, तरबूज में 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी होता है, इसलिए यह पेट में जाते ही बहुत तेजी से पचता है।</p>
<p>ऐसे में जब आप कुछ भारी खाते हैं और उसके ऊपर से तरबूज खा लेते हैं, तो तरबूत पेट में जाकर बाकी खाने के पचने का इंतजार करने लगता है। इसी इंतजार की वजह से वह आंतों में फर्मेंट होने लगता है, जिससे गैस और ब्लोटिंग की समस्या होने लगती है।</p>
<p><strong>इन लोगों को रहना चाहिए सावधान<br /></strong>तरबूज में फ्रक्टोज, जो एक तरह का नेचुरल शुगर, की मात्रा काफी ज्यादा होती है। ऐसे में इसे खाने समय कुछ लोगों को अपना खास ध्यान रखना चाहिए, जो निम्न हैं-</p>
<p>इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) वाले लोगों को इसे संभलकर खाना चाहिए।<br />अगर आपका पाचन कमजोर है या आपको जल्दी एसिडिटी हो जाती है, खाने के तुरंत बाद तरबूज खाने से बचें।<br />सेंसिटिव गट वाले लोगों को फ्रक्टोज पचाने में परेशानी होती है, जिससे भयंकर गैस बन सकती है।</p>
<p><strong>तरबूज खाने का सही तरीका<br /></strong>तरबूज कोई हानिकारक फल नहीं है, बल्कि यह गर्मियों का सुपरफूड है। बस इसे खाते समय की गई कुछ गलतियां इसे नुकसानदेह बना देती है। आइए जानते हैं तरबूज खाने का सही तरीका-</p>
<p>इसे हमेशा दो मील के बीच के समय जैसे मिड-मॉर्निंग या शाम को खाएं। लंच या डिनर के ठीक बाद इसे खाने से बचें।<br />तरबूज को दूध, दही या किसी तली-भुनी चीज के साथ बिल्कुल मिक्स न करें। इसे हमेशा अकेला ही खाएं।<br />एक बार में बहुत सारा तरबूज खाने से बचें। ज्यादा मात्रा पेट के एसिडिक बैलेंस को बिगाड़ सकती है।<br />फ्रिज से तुरंत निकाल कर बर्फ जैसा तरबूज खाने से बचें। पेट के तापमान और ठंडे फल के कारण हुए मिस्मैच से भी पाचन बिगड़ सकता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मामूली लगने वाली 3 आदतें चुपके-चुपके करती हैं किडनी डैमेज</title>
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		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:31:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="702" height="359" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/54-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/54-4.jpg 702w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/54-4-300x153.jpg 300w" sizes="(max-width: 702px) 100vw, 702px" />क्या आप जानते हैं कि आपकी रोजमर्रा की कुछ आम आदतें जाने-अनजाने में आपकी किडनी को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं? इन गलतियों की वजह से किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती और शरीर में हानिकारक टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं।  किडनी की बीमारियों का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि ये &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="702" height="359" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/54-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/54-4.jpg 702w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/54-4-300x153.jpg 300w" sizes="(max-width: 702px) 100vw, 702px" /><div><img loading="lazy" width="702" height="359" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/54-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>क्या आप जानते हैं कि आपकी रोजमर्रा की कुछ आम आदतें जाने-अनजाने में आपकी किडनी को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं? इन गलतियों की वजह से किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती और शरीर में हानिकारक टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। </p>
<p>किडनी की बीमारियों का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि ये एक साइलेंट किलर की तरह होती हैं; शुरुआत में इसके लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, आइए जानते हैं उन आदतों के बारे में जो चुपके-चुपके आपकी किडनी डैमेज कर रही हैं।</p>
<h3 class="wp-block-heading">सही मात्रा में पानी न पीना</h3>
<p>किडनी का सबसे अहम फंक्शन शरीर से यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे वेस्ट प्रोडक्ट्स को छानकर यूरिन के जरिए बाहर निकालना है। इसके लिए उसे भरपूर मात्रा में फ्लूएड की जरूरत होती है। जब आप कम पानी पीते हैं, तो किडनी को इन टॉक्सिन्स को छानने के लिए बहुत ज्यादा दबाव झेलना पड़ता है। इससे पथरी होने और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p>कई लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, किडनी उतनी साफ होगी। यह भी गलत है। ज्यादा पानी पीने से भी किडनी पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है और खून में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो सकता है।</p>
<p>इसलिए दिन भर में 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं और अपने पेशाब के रंग पर ध्यान दें; अगर यह हल्का पीला या पारदर्शी है, तो समझिए आप सही मात्रा में पानी पी रहे हैं।</p>
<p><strong>पेनकिलर्स का अंधाधुंध इस्तेमाल<br /></strong>सिरदर्द हो या बदन दर्द, हम में से ज्यादातर लोग तुरंत मेडिकल स्टोर से पेनकिलर्स खरीद कर खा लेते हैं। यह आदत किडनी के लिए जहर के समान है। नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स किडनी की ओर जाने वाले ब्लड फ्लो को अचानक कम कर देती हैं। जो लोग लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उनमें किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा डॉक्टर से पूछकर ही पेनकिलर दवाएं लें।</p>
<p><strong>खाने में ज्यादा नमक<br /></strong>हमारा आधुनिक खान-पान, जिसमें प्रोसेस्ड फूड, चिप्स, और अचार शामिल हैं, सोडियम से भरा होता है। ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण किडनी के नर्व्स डैमेज होने लगते हैं। साथ ही, ज्यादा नमक खाने से पेशाब के जरिए प्रोटीन बाहर निकलने लगती है, जो किडनी फेलियर का शुरुआती लक्षण है।</p>
</div>
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		<title>यूरिन में भी नजर आते हैं प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण</title>
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		<dc:creator><![CDATA["Web_Wing"]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 06:31:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="387" height="370" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/4-10.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/4-10.jpg 387w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/4-10-300x287.jpg 300w" sizes="(max-width: 387px) 100vw, 387px" />पुरुषों में होने वाले सबसे कॉमन कैंसर में प्रोस्टेट कैंसर भी शामिल है, लेकिन फिर भी ज्यादातर मामलों में इसका पता काफी देर से चलता है। बीमारी का देर से पता चलने की वजह से इलाज मुश्किल हो जाता है। हालांकि, प्रोस्टेट कैंसर का इलाज मुमकिन है और इसके सफल होने की संभावना भी काफी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="387" height="370" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/4-10.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/4-10.jpg 387w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/4-10-300x287.jpg 300w" sizes="(max-width: 387px) 100vw, 387px" /><div><img width="387" height="370" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/4-10.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>पुरुषों में होने वाले सबसे कॉमन कैंसर में प्रोस्टेट कैंसर भी शामिल है, लेकिन फिर भी ज्यादातर मामलों में इसका पता काफी देर से चलता है। बीमारी का देर से पता चलने की वजह से इलाज मुश्किल हो जाता है।</p>
<p>हालांकि, प्रोस्टेट कैंसर का इलाज मुमकिन है और इसके सफल होने की संभावना भी काफी ज्यादा है, लेकिन शुरुआती दौर में इसका पता मुश्किल से लगता है। साथ ही, इसके कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन्हें पुरुष अक्सर बढ़ती उम्र की समस्या समझकर इग्नोर कर देते हैं। आइए इस बारे में डॉ. पर्ल आनंद (कंसल्टेंट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल, सोनीपत) से जानें।</p>
<p><strong>शुरुआती स्टेज में पहचान मुश्किल क्यों है?<br /></strong>प्रोस्टेट कैंसर का जल्दी पता न चल पाने के पीछे कई कारण हैं-</p>
<p>धीमी गति से विकास- प्रोस्टेट कैंसर के सेल्स आमतौर पर बहुत धीमी गति से बढ़ती हैं। शुरुआती ट्यूमर प्रोस्टेट ग्लैंड के अंदर ही सीमित रहते हैं और आस-पास के अंगों पर दबाव नहीं डालते। क्योंकि प्रोस्टेट पेल्विस के काफी अंदर स्थित होता है, इसलिए छोटे ट्यूमर न तो दर्द पैदा करते हैं और न ही बाहर से महसूस किए जा सकते हैं।<br />सामान्य बीमारियों से समानता- प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेत अक्सर बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया जैसे सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्लैंड का बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है। पुरुष अक्सर पेशाब संबंधी समस्याओं को बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह कैंसर का संकेत भी हो सकता है।<br />स्क्रीनिंग की सीमाएं- प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन इसके डायग्नोसिस के लिए जरूरी तो हैं, लेकिन ये हमेशा सटीक नहीं होते। कई बार PSA का स्तर किसी इन्फेक्शन या दूसरी वजहों से भी बढ़ सकता है, जिसे फॉल्स पॉजिटिव कहा जाता है।</p>
<p><strong>किन लक्षणों के नजर आने पर सावधान हो जाना चाहिए?<br /></strong>हालांकि, शुरुआती स्टेज में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है शरीर कुछ संकेत देने लगता है।</p>
<p>पेशाब शुरू करने में परेशानी होना या बहुत जोर लगाना पड़ना।<br />पेशाब की धार का कमजोर या रुक-रुक कर होना।<br />बार-बार यूरिन आने की इच्छा, खासकर रात के समय।<br />पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ है।<br />पेशाब में खून आना।<br />सीमन में खून दिखना।<br />अचानक इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या शुरू होना।<br />पेशाब या इजेक्यूलेशन के दौरान दर्द या जलन महसूस होना।</p>
<p>अगर कैंसर प्रोस्टेट के बाहर हड्डियों या अन्य अंगों में फैलने लगता है, तो समस्या बढ़ सकती है-</p>
<p>कूल्हों, पीठ या छाती में लगातार दर्द रहना।<br />पैरों में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।<br />बिना किसी कारण के बहुत थकान या वजन कम होना।</p>
<p><strong>बचाव के लिए क्या करें?<br /></strong>प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने के लिए 50 वर्ष की उम्र के बाद या अगर पारिवारिक इतिहास है तो 45 वर्ष के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह पर PSA टेस्ट करवाना जरूरी है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>त्वचा ही नहीं, अब दिमाग को भी झुलसा रही है ‘हीटवेव’</title>
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		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 06:31:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="726" height="355" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-24.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-24.jpg 726w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-24-300x147.jpg 300w" sizes="(max-width: 726px) 100vw, 726px" />आजकल की चिलचिलाती धूप और लू का असर सिर्फ हमारी त्वचा या शरीर की बाहरी सतह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे हमारे दिमाग पर भी असर डाल रही है। नई दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉक्टर भास्कर शुक्ला के मुताबिक, लोग अक्सर सिरदर्द को थकान, कम नींद या ज्यादा स्क्रीन टाइम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="726" height="355" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-24.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-24.jpg 726w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-24-300x147.jpg 300w" sizes="(max-width: 726px) 100vw, 726px" /><div><img loading="lazy" width="726" height="355" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-24.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>आजकल की चिलचिलाती धूप और लू का असर सिर्फ हमारी त्वचा या शरीर की बाहरी सतह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे हमारे दिमाग पर भी असर डाल रही है।</p>
<p>नई दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉक्टर भास्कर शुक्ला के मुताबिक, लोग अक्सर सिरदर्द को थकान, कम नींद या ज्यादा स्क्रीन टाइम का नतीजा मानकर हल्के में ले लेते हैं, लेकिन असल में, यह लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का एक गंभीर संकेत हो सकता है।</p>
<p>आइए, इस आर्टिकल में जान लीजिए कि कैसे बढ़ती गर्मी आपके दिमाग पर हावी हो रही है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।</p>
<p><strong>शरीर के साथ-साथ दिमाग में भी होती है पानी की कमी<br /></strong>जब बाहर भयंकर गर्मी होती है, तो हमारे शरीर को अपने सामान्य तापमान को बनाए रखने और खुद को ठंडा रखने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान शरीर में तेजी से डिहाइड्रेशन होने लगता है। इसका सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है, क्योंकि पानी की कमी के कारण दिमाग तक खून का बहाव और पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। यही मुख्य कारण है कि लोगों को सिर भारी लगना, चक्कर आना और लगातार सिरदर्द जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।</p>
<p><strong>माइग्रेन के लिए ‘ट्रिगर’ बन रही है गर्मी<br /></strong>गर्मी का प्रभाव केवल शारीरिक नहीं होता, बल्कि यह हमारी मानसिक स्थिति को भी बिगाड़ता है। उमस और तेज धूप की वजह से लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, जल्दी थकान होती है और किसी भी काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। दिमाग पर पड़ने वाला यह मानसिक दबाव सिरदर्द को और ज्यादा भड़का देता है। डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादा तापमान एक ‘ट्रिगर’ की तरह काम करता है, जिसके कारण हीटवेव के दौरान माइग्रेन के अटैक काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं।</p>
<p><strong>इलेक्ट्रोलाइट्स का बिगड़ता संतुलन है खतरनाक<br /></strong>तेज धूप में ज्यादा देर तक रहने और पर्याप्त पानी न पीने से पसीने के जरिए शरीर से जरूरी तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है। यह असंतुलन सिरदर्द को जन्म देता है। खासतौर पर वे लोग जो बाहर धूप में काम करते हैं या जिन्हें लंबे समय तक सफर करना पड़ता है, वे इस खतरे की जद में सबसे ज्यादा होते हैं।</p>
<p><strong>गर्मी और सिरदर्द से बचने के लिए क्या करें?<br /></strong>इस भीषण गर्मी और माइग्रेन से खुद को सुरक्षित रखने के लिए शरीर की जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप इन बातों का पालन कर सकते हैं:</p>
<p>खूब पानी पिएं: दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन न हो।<br />सिर को ढकें: धूप में बाहर निकलते समय हमेशा अपने सिर को किसी कपड़े, टोपी या छाते से ढक कर रखें।<br />हल्का भोजन लें: गरिष्ठ या भारी खाने के बजाय हल्का और शरीर को ठंडा रखने वाला भोजन करें।<br />धूप से बचें: ज्यादा लंबे समय तक सीधे तेज गर्मी और धूप के संपर्क में रहने से बचें।</p>
<p><strong>लापरवाही न करें<br /></strong>आज के समय में सिरदर्द को एक आम-सी बात समझकर टाल देना बिल्कुल भी सही नहीं है। यह हमारे शरीर का एक इशारा है कि अंदर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। खासकर इस चिलचिलाती गर्मी में, अगर आपको बार-बार सिरदर्द हो रहा है और उसके साथ कमजोरी, चक्कर या उल्टी महसूस हो रही है, तो यह खतरे की घंटी है। हमारा शरीर हमें यह चेतावनी देता है कि हीटवेव अब हमारे दिमाग तक पहुंच चुकी है, इसलिए समय रहते अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शरीर का ‘सिस्टम फेल’ कर सकती है लिवर की ये बीमारी</title>
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		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 06:31:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="525" height="329" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/5-26.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/5-26.jpg 525w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/5-26-300x188.jpg 300w" sizes="(max-width: 525px) 100vw, 525px" />हमारे शरीर में लिवर एक ऐसा अंग है जो बिना थके और बिना कोई शिकायत किए लगातार काम करता रहता है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने के अलावा, इसका एक और बेहद खास काम है- खून का थक्का बनाने वाले जरूरी प्रोटीन का निर्माण करना। जी हां, अगर किसी कारण से लिवर कमजोर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="525" height="329" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/5-26.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/5-26.jpg 525w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/5-26-300x188.jpg 300w" sizes="(max-width: 525px) 100vw, 525px" /><div><img loading="lazy" width="525" height="329" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/5-26.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>हमारे शरीर में लिवर एक ऐसा अंग है जो बिना थके और बिना कोई शिकायत किए लगातार काम करता रहता है। शरीर से जहरीले तत्वों को बाहर निकालने के अलावा, इसका एक और बेहद खास काम है- खून का थक्का बनाने वाले जरूरी प्रोटीन का निर्माण करना।</p>
<p>जी हां, अगर किसी कारण से लिवर कमजोर पड़ जाए और ये प्रोटीन न बना पाए, तो छोटी-सी चोट लगने पर भी खून का बहना रुकता नहीं है। विज्ञान की भाषा में इस जटिल समस्या को ‘लिवर कोएगुलोपैथी’ कहा जाता है। आइए, <em><strong>डॉ. अमर दीप यादव</strong></em> (निदेशक एवं विभागाध्यक्ष, लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सर्जरी, शल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल, दिल्ली) से इस बारे में डिटेल में समझते हैं।</p>
<h3 class="wp-block-heading">जब लिवर काम करना बंद कर दे, तो शरीर में मचती है ये तबाही</h3>
<p>सुनने में शायद ऐसा लगे कि लिवर खराब होने पर सिर्फ खून बहने का खतरा रहता है, लेकिन असलियत इससे भी ज्यादा खतरनाक है। हमारा लिवर सिर्फ खून का थक्का जमाने वाले तत्व ही नहीं बनाता, बल्कि नसों में खून को बेवजह जमने से रोकने वाले प्राकृतिक तत्व भी तैयार करता है।</p>
<p>इसलिए, जब लिवर काम करना बंद कर देता है, तो मरीज को एक साथ दो बड़े खतरे घेर लेते हैं:<br />पहला, चोट लगने पर भयंकर खून बहना<br />दूसरा, नसों के अंदर जानलेवा थक्के जम जाना</p>
<p><strong>क्यों और कैसे पनपती है यह समस्या?<br /></strong>आजकल की खराब लाइफस्टाइल, वायरल बीमारियां और शरीर की अंदरूनी गड़बड़ियां लिवर को नुकसान पहुंचाने के मुख्य कारण हैं। जब लिवर बीमार होता है, तो खून के पूरे सिस्टम पर इसका गहरा असर पड़ता है:</p>
<p>जरूरी प्रोटीन की कमी: लिवर ‘फाइब्रिनोजेन’ और ‘प्रोथ्रोम्बिन’ जैसे खास प्रोटीन नहीं बना पाता, जो खून का थक्का जमाने के लिए पहली जरूरत हैं।<br />विटामिन K को न सोख पाना: खून को सही समय पर जमने के लिए ‘विटामिन K’ की दरकार होती है, लेकिन बीमार लिवर इसे शरीर में घुलने नहीं देता।<br />प्लेटलेट्स का गिरना: लिवर की बीमारी से शरीर की तिल्ली का आकार बढ़ जाता है। यह बढ़ी हुई तिल्ली खून में मौजूद प्लेटलेट्स को फंसाकर नष्ट करने लगती है, जिससे उनकी संख्या तेजी से गिर जाती है।<br />नसों में रुकावट का डर: शरीर में प्राकृतिक रूप से खून को पतला रखने वाले ‘प्रोटीन C’ और ‘प्रोटीन S’ की कमी हो जाती है, जिससे नसों में अवांछित थक्के बनने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>जानकारी की कमी और बढ़ता जोखिम<br /></strong>दुर्भाग्य से, बहुत कम लोग लिवर के इस जरूरी काम के बारे में जानते हैं। ज्यादातर लोग लिवर की खराबी को केवल शराब के सेवन या कमजोर हाजमे से जोड़कर देखते हैं। आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि लिवर इतना सहनशील होता है कि यह अपनी बीमारी के शुरुआती संकेत नहीं देता। जब तक बीमारी पकड़ में आती है, तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है।</p>
<p><strong>बचाव के आसान और असरदार तरीके<br /></strong>इस छिपी हुई बीमारी को मात देने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आम लोगों के बीच रूटीन चेकअप और स्क्रीनिंग को बढ़ावा दिया जाए। अपने लिवर को तंदुरुस्त रखने के लिए आप कुछ बुनियादी कदम उठा सकते हैं:</p>
<p>बैलेंस डाइट लें: पोषण से भरपूर खाना खाएं जो लिवर पर दबाव न डाले।<br />शराब से पूरी तरह दूरी: लिवर को सुरक्षित रखने के लिए शराब का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।<br />टीकाकरण करवाएं: हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से बचने के लिए समय पर वैक्सीन लें।<br />नियमित चेकअप: डॉक्टर से मिलते रहें और अपने शरीर की रूटीन जांच कराते रहें।</p>
<p>लिवर कोएगुलोपैथी सिर्फ एक बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का सुबूत है कि हमारे शरीर का हर हिस्सा एक-दूसरे पर कितना निर्भर है। लिवर की सेहत को नजरअंदाज करने से पूरे शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके प्रति जागरूक रहना ही एक स्वस्थ और लंबी उम्र की असली चाबी है।</p>
</div>
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		<title>रोज नाश्ते में ब्रेड खाने की आदत शरीर के साथ करती है 5 खिलवाड़</title>
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		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 06:33:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="698" height="386" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-21.jpg 698w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/56-21-300x166.jpg 300w" sizes="(max-width: 698px) 100vw, 698px" />आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह-सुबह नाश्ता बनाने का समय बहुत कम लोगों के पास होता है। ऐसे में, बटर टोस्ट, जैम-ब्रेड या सैंडविच हमारी पहली पसंद बन जाते हैं। बेशक ब्रेड एक आसान और जल्दी तैयार होने वाला ऑप्शन है, जिसे बच्चे हो या बड़े, सभी चाव से खाते हैं, लेकिन एक बड़ा &#8230;]]></description>
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<p>आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह-सुबह नाश्ता बनाने का समय बहुत कम लोगों के पास होता है। ऐसे में, बटर टोस्ट, जैम-ब्रेड या सैंडविच हमारी पहली पसंद बन जाते हैं।</p>
<p>बेशक ब्रेड एक आसान और जल्दी तैयार होने वाला ऑप्शन है, जिसे बच्चे हो या बड़े, सभी चाव से खाते हैं, लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि क्या रोजाना नाश्ते में ब्रेड खाना आपके शरीर के लिए फायदेमंद है? आइए, दिल्ली के मैकक्योर और आस्था अस्पताल के जनरल फिजिशियन, <strong><em>डॉ. प्रतीक कुमार</em></strong> से समझते हैं कि रोजाना ब्रेड खाने से शरीर के अंदर क्या बदलाव आते हैं।</p>
<p><strong>इंस्टेंट एनर्जी, लेकिन जल्दी लगने वाली भूख<br /></strong>ज्यादातर घरों में व्हाइट ब्रेड का इस्तेमाल होता है, जो मैदा यानी रिफाइंड आटे से बनी होती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा और फाइबर काफी कम होता है। जब आप इसे खाते हैं, तो शरीर को फौरन एनर्जी मिल जाती है, लेकिन यह एनर्जी ज्यादा देर तक नहीं टिकती। नतीजा यह होता है कि आपको बहुत जल्दी दोबारा भूख लग जाती है और बार-बार कुछ खाने की क्रेविंग होने लगती है।</p>
<p><strong>डायबिटीज का खतरा<br /></strong>व्हाइट ब्रेड का एक बड़ा नुकसान यह है कि यह पेट में बहुत तेजी से पच जाती है, जिससे खून में शुगर का स्तर अचानक से बढ़ जाता है। अगर आप एक सुस्त लाइफस्टाइल जीते हैं और रोजाना ब्रेड खाते हैं, तो समय के साथ आपको ‘टाइप 2 डायबिटीज’ होने का खतरा काफी बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>शरीर में पोषण की कमी<br /></strong>सिर्फ ब्रेड से पेट भरने का मतलब है कि आपके शरीर को जरूरी डाइट नहीं मिल रही है। ब्रेड में विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन की भारी कमी होती है। अगर आप नियमित रूप से सिर्फ ब्रेड पर निर्भर रहते हैं, तो शरीर में इन जरूरी तत्वों की कमी हो जाती है। इसके कारण आपको:</p>
<p>थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।<br />आपकी बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर पड़ सकती है।</p>
<p><strong>पेट की समस्याएं और ‘ग्लूटेन’<br /></strong>कई लोगों को ब्रेड खाने के बाद पेट फूलने या गैस की शिकायत होती है। इसका मुख्य कारण गेहूं में पाया जाने वाला ‘ग्लूटेन’ नामक तत्व होता है। जिन लोगों का शरीर ग्लूटेन को नहीं पचा पाता (ग्लूटेन इनटॉलरेंस या सेंसिटिविटी), उनके लिए रोजाना ब्रेड खाना पेट की परेशानियों को और ज्यादा बढ़ा सकता है।</p>
<p><strong>तेजी से बढ़ता हुआ वजन<br /></strong>ब्रेड के साथ हम अक्सर बटर, जैम या अन्य प्रोसेस्ड स्प्रेड्स लगाकर खाते हैं। इससे आपके शरीर में जाने वाली कैलोरी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है। अगर इसे रोजाना इसी तरह खाया जाए, तो धीरे-धीरे आपका वजन बढ़ने की पूरी संभावना रहती है।</p>
<p><strong>क्या ब्रेड खाना पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?<br /></strong>इसका जवाब है- नहीं! अगर आप सही टाइप की ब्रेड चुनें और उसे संतुलित मात्रा में खाएं, तो यह एक बेहतरीन और सुविधाजनक नाश्ता बन सकता है। इसके लिए आप ये आसान बदलाव कर सकते हैं:</p>
<p>सही ब्रेड चुनें: व्हाइट ब्रेड की जगह ‘ब्राउन ब्रेड’ या ‘होल ग्रेन ब्रेड’ को अपनी डाइट में शामिल करें। इनमें फाइबर और पोषक तत्व ज्यादा होते हैं, जो पाचन को बेहतर रखने में मदद करते हैं।<br />न्यूट्रिशन बढ़ाएं: अपने ब्रेड नाश्ते को हेल्दी बनाने के लिए इसमें प्रोटीन और फाइबर जरूर शामिल करें।</p>
</div>
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		<item>
		<title>सावधान! प्रेग्नेंसी में मलेरिया बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह</title>
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		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 06:32:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="656" height="355" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/u.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/u.jpg 656w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/u-300x162.jpg 300w" sizes="(max-width: 656px) 100vw, 656px" />गर्भ में एक नए जीवन को संजोना एक बेहद खास और संवेदनशील अनुभव होता है। इस दौरान एक मां अपने होने वाले बच्चे को हर बाहरी खतरे से सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार हमारी नजरों से बच निकलने वाला एक छोटा-सा मच्छर इस सुरक्षा चक्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="656" height="355" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/u.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/u.jpg 656w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/u-300x162.jpg 300w" sizes="(max-width: 656px) 100vw, 656px" /><div><img loading="lazy" width="656" height="355" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/u.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>गर्भ में एक नए जीवन को संजोना एक बेहद खास और संवेदनशील अनुभव होता है। इस दौरान एक मां अपने होने वाले बच्चे को हर बाहरी खतरे से सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार हमारी नजरों से बच निकलने वाला एक छोटा-सा मच्छर इस सुरक्षा चक्र के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकता है?</p>
<p>आकाश हेल्थकेयर की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (डायरेक्टर और हेड), <em><strong>डॉ. मधुलिका सिन्हा</strong></em> बताती हैं कि प्रेग्नेंसी में मलेरिया को कभी भी एक सामान्य बुखार समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। आखिर इस नाजुक समय में मलेरिया इतना घातक क्यों हो जाता है? आइए इसे आसानी से समझते हैं।</p>
<h3 class="wp-block-heading">शरीर की घटती ताकत और मलेरिया का बढ़ता खतरा</h3>
<p>प्रेग्नेंसी के दौरान एक महिला के शरीर में प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने की क्षमता थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। यही कारण है कि आम दिनों के मुकाबले गर्भावस्था में मलेरिया का संक्रमण शरीर पर ज्यादा तेजी से हावी हो सकता है और उनके लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।</p>
<p><strong>गर्भ में पल रहे बच्चे पर क्या होता है असर?<br /></strong>यह बीमारी केवल होने वाली मां के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि इसका सीधा और बुरा असर अजन्मे बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। डॉ. सिन्हा के मुताबिक, मलेरिया के कारण गर्भावस्था में कई तरह की गंभीर परेशानियां खड़ी हो सकती हैं:</p>
<p>समय पूरा होने से पहले ही बच्चे का जन्म हो जाना (प्रीमैच्योर डिलीवरी)।<br />पैदा होने वाले शिशु का वजन सामान्य से बहुत कम होना।<br />कुछ गंभीर मामलों में मिसकैरेज हो जाने का खतरा।</p>
<p><strong>इन संकेतों को पहचानें और तुरंत लें एक्शन<br /></strong>गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर में नजर आने वाले लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर शरीर में ये परेशानियां महसूस हों, तो तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं:</p>
<p>अचानक तेज बुखार आना।<br />ठंड लगना या कंपकंपी महसूस होना।<br />पूरे शरीर में दर्द रहना।</p>
<p><strong>मच्छरों को दूर रखने के जरूरी उपाय<br /></strong>इस खतरनाक बीमारी से बचने का सबसे कारगर तरीका मच्छरों को खुद से दूर रखना है। इसके लिए अपनी दिनचर्या में कुछ आसान कदम शामिल किए जा सकते हैं:</p>
<p>सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।<br />घर के अंदर और बाहर के हिस्सों में पूरी साफ-सफाई रखें।<br />अपने घर के आस-पास गमलों, कूलरों या गड्डों में पानी इकट्ठा न होने दें, क्योंकि रुके हुए पानी में ही मच्छर पनपते हैं।</p>
<p><strong>सही समय पर इलाज है सबसे जरूरी<br /></strong>डॉक्टर का मानना है कि इस बीमारी से डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। अगर सही समय पर इन लक्षणों की पहचान करके तुरंत डॉक्टरी जांच और इलाज शुरू करवा लिया जाए, तो मां और उनके गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।</p>
</div>
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		<item>
		<title>कहीं आपका दिल समय से पहले तो नहीं थक रहा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA["Web_Wing"]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 06:32:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="634" height="330" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/43-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/43-1.jpg 634w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/43-1-300x156.jpg 300w" sizes="(max-width: 634px) 100vw, 634px" />हम अक्सर अपने दिल की तुलना एक घड़ी से करते हैं, जो बिना रुके धड़कती रहती है, लेकिन क्या आपने कभी अपनी इस अंदरूनी घड़ी की रफ्तार पर गौर किया है? मेडिकल भाषा में, आराम की स्थिति में (Resting Heart Rate या RHR) दिल का एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कना पूरी तरह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="634" height="330" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/43-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/43-1.jpg 634w, https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/43-1-300x156.jpg 300w" sizes="(max-width: 634px) 100vw, 634px" /><div><img loading="lazy" width="634" height="330" src="https://bhaskartimes.com/wp-content/uploads/2026/04/43-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>हम अक्सर अपने दिल की तुलना एक घड़ी से करते हैं, जो बिना रुके धड़कती रहती है, लेकिन क्या आपने कभी अपनी इस अंदरूनी घड़ी की रफ्तार पर गौर किया है?</p>
<p>मेडिकल भाषा में, आराम की स्थिति में (Resting Heart Rate या RHR) दिल का एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कना पूरी तरह से “नॉर्मल” माना जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि हर ‘सामान्य’ आंकड़ा आपकी अच्छी सेहत की गारंटी नहीं होता। एक मिनट में 60 बार और 90 बार धड़कने वाले दिल की सेहत के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है।</p>
<p>आइए, हैदराबाद के अपोलो अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट <strong><em>डॉ. सुधीर कुमार</em> </strong>से आसान भाषा में समझते हैं कि आपकी धड़कन की रफ्तार कैसे आपके लंबे जीवन का राज खोलती है।</p>
<p><strong>‘नॉर्मल’ दिखने वाले आंकड़े का धोखा<br /></strong>कई बड़े शोध इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भले ही आपकी धड़कन 60-100 के ‘नॉर्मल’ दायरे में हो, लेकिन जैसे-जैसे यह आंकड़ा ऊपर की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे इंसान की उम्र कम होने का जोखिम भी बढ़ने लगता है।</p>
<p>इसे ऐसे समझें- अगर आपके दिल की धड़कन में केवल 10 बीट्स प्रति मिनट का इजाफा होता है, तो दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। जिस इंसान का दिल आराम करते समय 90 बार धड़क रहा है, वह 60 बार धड़कने वाले दिल की तुलना में बहुत ज्यादा तनाव झेल रहा है। एक दशक के समय में यह करोड़ों अतिरिक्त धड़कनों में बदल जाता है, जो आपकी नसों और धमनियों को बेवजह घिसाता और कमजोर करता है।</p>
</div>
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