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उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल का किया जायेगा विकास-जयवीर सिंह

लखनऊ: 16 मई, 2023
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थल का चयन तथा पर्यटन संभावनाओं से युक्त कम चर्चित पर्यटक स्थल को चिन्हित कर उसे उच्च स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में 50-50 प्रतिशत सहभागिता के आधार पर मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के अंतर्गत विकसित किया जायेगा। इस योजना के तहत एक से अधिक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रस्ताव भेजा जा सकता है। इससे स्थानीय एवं घरेलू पर्यटकों के आवागमन में लगातार वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

पर्यटन मंत्री आज अपने आवास पर पिछली कैबिनेट बैठक में मंजूर की गई मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के मुख्य बिन्दुओं के बारे में जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के लगभग हर जनपद में महत्वपूर्ण धार्मिक, अध्यात्मिक, पौराणिक, प्राचीन सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। इन विविध आकर्षणों को विश्व के नक्शे पर स्थापित करने एवं अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यह नई योजना लाई गई है। चयनित पर्यटक स्थलों पर सैलानियों एवं श्राद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं सृजित की जायेंगी। इसके माध्यम से पर्यटक स्थलों तक पर्यटकों को लुभाने का हर संभव प्रयास किया जायेगा।

श्री जयवीर सिंह ने मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के क्रियान्वयन के लिए तैयार की गई नीति के बारे में बताया कि इस योजना के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में माननीय सांसद (लोकसभा एवं राज्यसभा) मा0 सदस्य विधानसभा/विधानपरिषद, नगर निकायों के अध्यक्ष तथा निजी क्षेत्र के सीएसआर, निजी व्यक्ति/प्रवासी भारतीय, एनजीओ एवं ट्रस्ट द्वारा पर्यटन विकास एवं निर्माण की जो परियोजनाएं राज्य सरकार/पर्यटन विभाग के समक्ष प्रस्तुत की जायेंगी उन परियोजनाओं के डीपीआर में उल्लिखित लागत न्यूनतम 25 लाख तथा अधिकतम 5 करोड़ रुपये होगी, में से 50 प्रतिशत धनराशि की व्यवस्था पर्यटन विभाग द्वारा की जायेगी।

उन्होंने बताया कि शेष 50 प्रतिशत धनराशि मा0 सांसद (लोकसभा एवं राज्यसभा) द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, मा0 विधायक (विधान सभा/विधान परिषद) द्वारा अपने विधायक निधि, नगर निकायों, ग्राम पंचायतों द्वारा अपनी निधियों के अंतर्गत तथा पौराणिक व धार्मिक स्थलों की प्रबंध समिति/ट्रस्ट, ख्याति प्राप्त एनजीओ, कारपोरेट फर्म, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अथवा निजी क्षेत्र के सीएसआर के अंतर्गत कन्वर्जेन्स प्रस्ताव दिया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेेत्र में एक पर्यटन स्थल के विकास से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीया लोगों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार के साधन सुलभ होंगे। साथ-साथ पर्यटन के विविध आयामों का विस्तार होगा। हसके साथ ही प्रदेश के स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय महत्व के स्थलों को चयनित पर्यटन स्थल के साथ परस्पर कनेक्टिविटी प्रदान की जायेगी।

श्री जयवीर सिंह ने बताया कि चयनित पर्यटन स्थल का कार्य पूरा होने के बाद पर्यटन स्थल का रखरखाव एवं संचालन तथा अनुरक्षण का जिम्मा संबंधित जनपद के जिलाधिकारी एवं अधिकृत संस्थाओं को सौंपा जायेगा। इन परिसम्पतियों के लिए चिन्हित संस्थाओं में से कोई उत्तरदायी न होने की दशा में जिला पर्यटन व संस्कृति परिषद द्वारा जिम्मेदारी संभाली जायेगी।

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