भवन निर्माण नियम में होगा संशोधन, राज्य के भूकंप जोन छह में आने के बाद उठाया गया अहम कदम
उत्तराखंड में भवन निर्माण नियम में संशोधन होगा। इसके लिए 14 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। सीबीआरआई के निदेशक प्रो. प्रदीप करेंगे को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
पूरे राज्य को भूकंप जोन छह में शामिल होने के बाद अब भवन निर्माण नियम (वर्तमान में राज्य में बिल्डिंग बायलाॅज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण आईएसओ 1893-2000 पर आधारित है) में व्यापक संशोधन करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वर्तमान बिल्डिंग बायलाॅज की समीक्षा व संशोधन के लिए सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार की अध्यक्षता में 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।
समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों तथा भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति वास्तुविदों के साथ ही विभिन्न अभियंताओं से भी विचार-विमर्श करेगी। समिति राज्य के मौजूदा बायलाॅज का अध्ययन करते हुए उन्हें वर्तमान भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप तैयार करने का काम करेगी।
मुख्य सचिव बर्द्धन ने कहा कि भवन निर्माण नियमों को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और आपदा-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा रहा है। इसी क्रम में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि संशोधित नियमों से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा जोखिम में कमी आएगी।
सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना : सुमन
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है। उन्होंने बताया कि संशोधित बिल्डिंग बायलाॅज में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड और स्ट्रक्चरल सेफ्टी से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय पारंपरिक निर्माण तकनीकों और जलवायु अनुकूल विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सतत एवं आपदा-सक्षम विकास सुनिश्चित हो सके।





