भारत की रक्षा ताकत को मिला ‘शेर’ का दम, अमेठी में पहली 100% स्वदेशी AK-203 राइफल का सफल परीक्षण ???

अमेठी के कोरवा प्लांट में हुआ टेस्ट फायरिंग, सितंबर में भारतीय सेना के ट्रायल की तैयारी...

भारत ने रक्षा क्षेत्र में रचा इतिहास! अमेठी की कोरवा ऑर्डनेंस फैक्ट्री में बनी देश की पहली 100% स्वदेशी AK-203 'Sher' असॉल्ट राइफल का सफल टेस्ट-फायर पूरा हो गया है। Indo-Russian Rifles Private Limited ...भारत ने रक्षा क्षेत्र में रचा इतिहास! अमेठी की कोरवा ऑर्डनेंस फैक्ट्री में बनी देश की पहली 100% स्वदेशी AK-203 'Sher' असॉल्ट राइफल का सफल टेस्ट-फायर पूरा हो गया है। Indo-Russian Rifles Private Limited ...

AK-203 Sher Rifle Test: भारत ने रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा आयुध निर्माण सुविधा में देश की पहली 100 प्रतिशत स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफल ‘शेर’ का सफल परीक्षण किया गया है। इस राइफल के सभी प्रमुख पुर्जे और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री भारतीय उद्योगों से तैयार की गई है।

इस सफलता को भारत के छोटे हथियार निर्माण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देने वाली इस परियोजना को इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) ने विकसित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, सफल प्रारंभिक परीक्षण के बाद सितंबर 2026 में भारतीय सेना के ट्रायल की तैयारी की जा रही है।

अमेठी में बना पूरी तरह स्वदेशी ‘शेर’

AK-203 राइफल का निर्माण पहले भारत-रूस सहयोग के तहत किया जा रहा था, लेकिन अब इसका एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार किया गया है जिसमें 100 प्रतिशत भारतीय घटकों और इनपुट सामग्री का उपयोग किया गया है। इस स्वदेशी संस्करण को ‘शेर’ नाम दिया गया है।

अमेठी के कोरवा स्थित उत्पादन केंद्र में तैयार इस राइफल की सफल टेस्ट-फायरिंग ने भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को नई मजबूती दी है। इससे भविष्य में विदेशी कलपुर्जों और आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

सेना के लिए बड़ी उपलब्धि

AK-203 को भारतीय सेना की आधुनिक जरूरतों के अनुरूप महत्वपूर्ण हथियार प्रणाली माना जा रहा है। यह राइफल पुराने INSAS राइफलों को चरणबद्ध तरीके से बदलने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय सेना के ट्रायल सितंबर 2026 में शुरू हो सकते हैं। इन परीक्षणों के बाद राइफल के बड़े पैमाने पर उत्पादन और आपूर्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

हर 100 सेकंड में एक राइफल बनाने का लक्ष्य

IRRPL ने उत्पादन क्षमता को तेज करने की दिशा में भी बड़ी तैयारी की है। कंपनी का लक्ष्य उत्पादन व्यवस्था को इस स्तर तक पहुंचाना है, जहां लगभग हर 100 सेकंड में एक AK-203 राइफल तैयार की जा सके।

तेज उत्पादन क्षमता का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को समय पर पूरा करना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत बनाना है। रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना के तहत बड़ी संख्या में AK-203 राइफलों की आपूर्ति की योजना है।

भारत-रूस रक्षा सहयोग का अहम उदाहरण

AK-203 परियोजना भारत और रूस के रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसके निर्माण के लिए इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड का गठन किया गया था। अब 100 प्रतिशत भारतीय घटकों के साथ ‘शेर’ संस्करण का सफल परीक्षण इस परियोजना में स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस उपलब्धि से भारतीय रक्षा उद्योग को न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता मिलेगी, बल्कि देश में रक्षा उपकरणों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

आत्मनिर्भर भारत को नई ताकत

अमेठी में बनी स्वदेशी AK-203 ‘शेर’ केवल एक नई राइफल का परीक्षण भर नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता में बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत भी है। देश अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि आधुनिक हथियार प्रणालियों के घरेलू निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सफल परीक्षण के बाद अब भारतीय सेना के आगामी ट्रायल पर नजर रहेगी। यदि आगे की परीक्षण प्रक्रिया भी सफल रहती है, तो अमेठी में निर्मित ‘शेर’ भारतीय सैनिकों के हाथों में एक नई स्वदेशी ताकत के रूप में दिखाई दे सकती है।


 

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