India Mauritius Oil Gas Deal: ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम, इंडियन ऑयल करेगा पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति ???

भारत और मॉरीशस ने तेल और गैस सहयोग पर किया G2G समझौता, 5 साल तक ईंधन आपूर्ति का भी करार...

भारत और मॉरीशस ने G2G ऊर्जा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए; इंडियन ऑयल ने 5 साल के लिए पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए।

भारत और मॉरीशस ने ऊर्जा क्षेत्र में अपने सहयोग को नई मजबूती देते हुए तेल और गैस क्षेत्र में Government-to-Government (G2G) समझौता किया है। दोनों देशों के बीच हुआ यह समझौता पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, जैव ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र के उभरते क्षेत्रों में सहयोग का व्यापक ढांचा तैयार करेगा।

इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के बीच पांच साल का पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्ति समझौता भी हुआ है। इस व्यवस्था के तहत मॉरीशस को लंबे समय तक पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

20 अगस्त को हुआ G2G समझौता

भारत और मॉरीशस के बीच तेल एवं गैस सहयोग पर यह G2G समझौता 20 अगस्त 2026 को हुआ। समझौते के दौरान भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मॉरीशस सरकार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।

इस समझौते को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा संबंधों को संस्थागत रूप देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे पारंपरिक तेल एवं गैस सहयोग के साथ-साथ भविष्य के ऊर्जा क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ने की उम्मीद है।

5 साल तक पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की आपूर्ति

G2G समझौते के साथ इंडियन ऑयल और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के बीच पांच वर्षीय Sales and Purchase Agreement भी किया गया है। इसके तहत मॉरीशस को पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन की दीर्घकालिक आपूर्ति की जाएगी।

समझौते में समुद्री परिवहन के लिए उपयोग होने वाले ईंधन की आपूर्ति भी शामिल है। इससे आयात पर निर्भर मॉरीशस को ईंधन आपूर्ति में अधिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत

मॉरीशस एक द्वीपीय देश है और अपनी ईंधन जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का असर ऐसे देशों पर अधिक पड़ सकता है।

भारत के साथ हुए इस दीर्घकालिक समझौते से मॉरीशस को ईंधन की आपूर्ति में अधिक निश्चितता मिल सकती है। इससे वैश्विक कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलने की संभावना है।

जैव ईंधन और नए ऊर्जा क्षेत्रों में भी सहयोग

भारत और मॉरीशस का G2G समझौता केवल पारंपरिक पेट्रोलियम उत्पादों तक सीमित नहीं है। इसके तहत बायोफ्यूल, सस्टेनेबिलिटी, प्रशिक्षण और उभरते ऊर्जा क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का प्रावधान है।

दोनों देशों के बीच ज्ञान साझा करने, अनुसंधान और प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जाएगा। यह पहल मॉरीशस के ऊर्जा परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

भारत तेजी से हिंद महासागर क्षेत्र में अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। मॉरीशस भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार देश है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध काफी मजबूत हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में यह नया सहयोग भारत को एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है। वहीं, इंडियन ऑयल के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

रिपोर्टों के अनुसार, यह हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया के बाहर किसी भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी द्वारा किया गया महत्वपूर्ण दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता है।

दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

भारत और मॉरीशस के बीच हुआ यह समझौता केवल ऊर्जा आपूर्ति का करार नहीं, बल्कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम भी माना जा रहा है। तेल और गैस के साथ-साथ जैव ईंधन और भविष्य की ऊर्जा तकनीकों में सहयोग से द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।

आने वाले वर्षों में इस समझौते के जरिए दोनों देश ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में मिलकर काम कर सकते हैं। भारत के लिए यह हिंद महासागर क्षेत्र में अपने भरोसेमंद साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


 

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