चीनी के बाद अब प्याज महंगा हो गया है। 30 दिनों में कीमत 19% बढ़ी, कई शहरों में कांदा 60 रुपये किलो तक बिक रहा है???
चीनी ही नहीं प्याज भी हुआ महंगा, 30 दिन में 19% बढ़े दाम, जानें कहां-कितने रुपये में मिल रहा है कांदा?...
Onion Price Hike: चीनी के बाद अब प्याज ने भी बढ़ाई रसोई की चिंता, 45 रुपये किलो के करीब पहुंचा औसत भाव
देश में महंगाई की मार अब रसोई तक और गहरी होती दिखाई दे रही है। चीनी की बढ़ती कीमतों के बाद अब प्याज ने भी आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 30 दिनों में प्याज की खुदरा कीमतों में करीब 19 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है, जबकि सालाना आधार पर इसकी कीमतों में लगभग 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई जा रही है। कई बाजारों में प्याज 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 42 से 45 रुपये प्रति किलो के दायरे में पहुंच गई है। कुछ राज्यों और शहरों में स्थानीय आपूर्ति, परिवहन लागत और बाजार की मांग के आधार पर कीमतें इससे भी अधिक हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी तंत्र के अनुसार, देशभर के सैकड़ों बाजार केंद्रों से आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियमित नजर रखी जाती है।
महज एक महीने में 19% तक महंगा हुआ प्याज
प्याज की कीमतों में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते एक महीने में खुदरा भाव में करीब 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कीमत लगभग 45 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर घरों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
प्याज भारतीय रसोई की सबसे जरूरी सब्जियों में शामिल है। दाल, सब्जी, सलाद, पराठे और कई अन्य व्यंजनों में इसका नियमित इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी घरेलू खर्च को प्रभावित करती है, लेकिन जब दाम लगातार बढ़ते हैं तो इसका असर सीधे आम परिवार की जेब पर पड़ता है।
कुछ बाजारों में 60 रुपये किलो तक पहुंचा कांदा
देश के अलग-अलग हिस्सों में प्याज की कीमतों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। कुछ जगहों पर प्याज औसत दर के आसपास बिक रहा है, जबकि आपूर्ति की कमी वाले बाजारों में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
आंध्र प्रदेश के कुछ बाजारों में प्याज के भाव जून में करीब 25 रुपये प्रति किलो से बढ़कर अगस्त में 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबर है। वहीं असम के बराक घाटी क्षेत्र के कुछ बाजारों में भी प्याज करीब 60 रुपये किलो बिकने की रिपोर्ट सामने आई है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे मुख्य कारण आपूर्ति में कमी और बाजार तक पहुंचने में आ रही चुनौतियों को माना जा रहा है। प्याज उत्पादन और आवक में कमी आने पर थोक बाजारों में कीमतें बढ़ती हैं, जिसका असर कुछ ही समय में खुदरा बाजार तक पहुंच जाता है।
रिपोर्टों के अनुसार, नासिक क्षेत्र में थोक कीमतों में एक महीने के भीतर तेज उछाल देखा गया है। प्याज उत्पादन में कमी और आपूर्ति संबंधी दबाव के कारण बाजार में तेजी बनी हुई है।
सरकार का एक्शन, ‘कांदा एक्सप्रेस’ से बढ़ेगी सप्लाई
प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बाजार में बफर स्टॉक जारी करने और प्रमुख शहरों तक प्याज की आपूर्ति तेज करने की तैयारी की है। इसके लिए विशेष रेल सेवा ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलाने की पहल की गई है, जिसका उद्देश्य नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे प्रमुख बाजारों तक प्याज की तेज आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
सरकार को उम्मीद है कि जिन क्षेत्रों में प्याज की कीमतें राष्ट्रीय औसत से ऊपर पहुंच गई हैं, वहां अतिरिक्त आपूर्ति से बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ा
प्याज की महंगाई ऐसे समय में बढ़ी है जब चीनी सहित कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम भी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। त्योहारों के मौसम से पहले आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी से परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।
सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो सकती है जिनकी आय सीमित है और जिनके घरेलू खर्च का बड़ा हिस्सा खाद्य सामग्री पर जाता है। होटल, ढाबा और छोटे भोजन कारोबार भी प्याज की बढ़ती कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं।
क्या जल्द सस्ता होगा प्याज?
सरकार द्वारा बफर स्टॉक जारी करने और विशेष आपूर्ति व्यवस्था शुरू करने से कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि आने वाले दिनों में प्याज के भाव किस दिशा में जाएंगे, यह उत्पादन, नई फसल की आवक, मौसम और विभिन्न बाजारों में आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने बढ़ती कीमतों को देखते हुए बाजार में हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। अगर प्रमुख शहरों में प्याज की आवक तेजी से बढ़ती है तो आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में कुछ स्थिरता देखने को मिल सकती है।





