अमेरिका में कैसे होता है चुनाव, भारत के इलेक्टोरल सिस्टम से कितना अलग, क्या ट्रंप भी शुरू करेंगे SIR????

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भारत से अलग है। जानिए Electoral College, वोटर आईडी, मतदान प्रक्रिया और ट्रंप के SIR कनेक्शन की पूरी कहानी....

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अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने वोटर आईडी को लेकर भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण देकर अमेरिका में चुनावी नियमों को सख्त करने की बहस को नई दिशा दे दी है। ट्रंप ने भारत में मतदाताओं की पहचान के लिए फोटो आईडी व्यवस्था का उल्लेख करते हुए अमेरिका में भी कड़े voter identification और नागरिकता सत्यापन नियमों की वकालत की है।

इसके बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव कैसे होता है? भारत और अमेरिका की चुनाव प्रणाली में क्या अंतर है? और क्या ट्रंप भारत की तरह SIR यानी Special Intensive Revision जैसी प्रक्रिया अमेरिका में शुरू कर सकते हैं?

अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?

भारत की तरह अमेरिका में भी जनता मतदान करती है, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया अलग है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल में होता है। उम्मीदवारों की दौड़ पहले पार्टी स्तर पर शुरू होती है, जहां अलग-अलग राज्यों में Primaries और Caucuses के जरिए पार्टियां अपने पसंदीदा उम्मीदवारों का चयन करती हैं। इसके बाद राष्ट्रीय पार्टी सम्मेलन में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नामित किया जाता है।

आम चुनाव में अमेरिकी मतदाता राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के पक्ष में वोट देते हैं, लेकिन राष्ट्रपति का अंतिम चुनाव सीधे केवल nationwide popular vote से तय नहीं होता।

Electoral College क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की सबसे खास व्यवस्था Electoral College है। यह 538 electors की एक संवैधानिक प्रक्रिया है और राष्ट्रपति बनने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 270 electoral votes हासिल करना जरूरी होता है।

हर राज्य को उसके कांग्रेस प्रतिनिधित्व के आधार पर electoral votes मिलते हैं। अधिकांश राज्यों में जिस उम्मीदवार को राज्य में सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, उसे उस राज्य के सभी electoral votes मिल जाते हैं। हालांकि Maine और Nebraska अलग प्रणाली के तहत अपने electoral votes बांट सकते हैं।

यही कारण है कि अमेरिका में कोई उम्मीदवार पूरे देश में कुल लोकप्रिय वोट ज्यादा पाने के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव हार सकता है। ऐसा इतिहास में कई बार हो चुका है।

भारत में चुनाव प्रणाली कैसी है?

भारत में संसदीय लोकतंत्र है। यहां जनता सीधे प्रधानमंत्री को वोट नहीं देती। मतदाता अपने लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं। जिस राजनीतिक दल या गठबंधन को लोकसभा में बहुमत मिलता है, वह सरकार बनाता है और उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है।

भारत में आमतौर पर First-Past-The-Post प्रणाली लागू होती है। यानी किसी निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत जाता है, भले ही उसे कुल मतों का 50 प्रतिशत न मिला हो।

चुनावों का संचालन Election Commission of India करता है, जो मतदाता सूची, मतदान, मतगणना और चुनाव प्रक्रिया का प्रबंधन करता है।

भारत और अमेरिका के चुनाव में सबसे बड़ा अंतर

भारत और अमेरिका के चुनावी मॉडल में सबसे बड़ा अंतर देश की राजनीतिक व्यवस्था का है।

भारत में मतदाता सांसद चुनते हैं और सांसदों के बहुमत से सरकार बनती है। अमेरिका में राष्ट्रपति सीधे सरकार का प्रमुख होता है और उसका चुनाव Electoral College प्रणाली के माध्यम से होता है।

अमेरिका में राष्ट्रपति और कांग्रेस के चुनाव अलग-अलग होते हैं, जबकि भारत में लोकसभा चुनाव का नतीजा सीधे केंद्र सरकार के गठन का आधार बनता है।

भारत अमेरिका
संसदीय लोकतंत्र राष्ट्रपति प्रणाली
जनता सांसद चुनती है जनता राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार के लिए वोट देती है
बहुमत वाला दल/गठबंधन सरकार बनाता है Electoral College राष्ट्रपति तय करता है
प्रधानमंत्री संसद के बहुमत से बनता है राष्ट्रपति को 270 electoral votes चाहिए
ECI केंद्रीय चुनाव प्रबंधन करता है राज्यों की भूमिका चुनाव संचालन में महत्वपूर्ण

वोटर आईडी पर ट्रंप ने भारत का उदाहरण क्यों दिया?

ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव कानूनों में बदलाव की बहस के दौरान भारत की voter identification व्यवस्था का उल्लेख किया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने भारत के चुनावी मॉडल को अमेरिका में कड़े वोटर पहचान नियमों के समर्थन में उदाहरण के रूप में पेश किया। यह बहस अमेरिका में SAVE America Act और चुनावी पात्रता से जुड़े सख्त प्रावधानों के संदर्भ में तेज हुई है।

भारत में मतदाता पंजीकरण और चुनावी पहचान की व्यवस्था ECI के तहत संचालित होती है। आयोग की voter services व्यवस्था में मतदाता पंजीकरण, electoral roll और SIR से संबंधित सेवाएं उपलब्ध हैं।

क्या अमेरिका में ट्रंप SIR शुरू करेंगे?

यहीं सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट आधिकारिक संकेत नहीं है कि अमेरिका में भारत की तरह SIR लागू किया जाएगा।

भारत में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा करना है। इसमें पात्र मतदाताओं की पहचान, electoral roll की जांच और आवश्यक संशोधन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।

ट्रंप की मौजूदा राजनीतिक मांग मुख्य रूप से वोटर आईडी और मतदान के लिए नागरिकता सत्यापन को सख्त करने से जुड़ी है। इसलिए इसे सीधे भारत के SIR मॉडल के बराबर नहीं माना जा सकता।

अमेरिका की चुनाव व्यवस्था में राज्यों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में पूरे देश में भारत जैसी एक समान intensive voter-roll revision प्रक्रिया लागू करना कानूनी, राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से जटिल हो सकता है।

भारत का चुनाव मॉडल अमेरिकी बहस में क्यों अहम हो गया?

ट्रंप के बयान ने भारत की चुनावी व्यवस्था को अमेरिकी घरेलू राजनीति की बहस में ला दिया है। एक तरफ समर्थक इसे चुनावी सुरक्षा और मतदाता पहचान मजबूत करने के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचक सख्त पहचान नियमों और voter suppression की आशंकाओं पर सवाल उठा रहे हैं।

निष्कर्ष

अमेरिका और भारत दोनों दुनिया के बड़े लोकतंत्र हैं, लेकिन उनकी चुनावी संरचना बिल्कुल अलग है। भारत में संसदीय प्रणाली के तहत जनता सांसद चुनती है, जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव Electoral College के जरिए तय होता है।

ट्रंप ने भारत की voter-ID व्यवस्था की सराहना जरूर की है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका में भारत की तरह SIR शुरू होने जा रहा है। फिलहाल बहस का केंद्र सख्त वोटर पहचान और नागरिकता सत्यापन है। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में और बड़ा चुनावी विषय बन सकता है।

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