भारत, मलेशिया और सिंगापुर के बीच शुरू होगी I-2SEA सबमरीन केबल परियोजना, डिजिटल कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आयाम

भारत, मलेशिया और सिंगापुर के बीच I-2SEA सबमरीन केबल परियोजना का शुभारंभ

भारत, मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ने वाली I-2SEA सबमरीन केबल परियोजना शुरू हो गई है। 3,600 किमी लंबी यह केबल AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट कनेक्टिविटी को नई गति देगी।

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भारत, मलेशिया और सिंगापुर के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए I-2SEA (India-Southeast Asia) सबमरीन केबल परियोजना की शुरुआत कर दी गई है। यह अत्याधुनिक अंडरसी फाइबर ऑप्टिक केबल नेटवर्क तीनों देशों के बीच डेटा ट्रांसफर, क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी बढ़ती जरूरतों को पूरा करेगा।

यह परियोजना भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े डिजिटल और डेटा सेंटर हब से सीधे जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

3,600 किलोमीटर लंबा होगा नेटवर्क

I-2SEA सबमरीन केबल नेटवर्क लगभग 3,600 किलोमीटर लंबा होगा। इसके जरिए भारत के पूर्वी तट को सीधे सिंगापुर और मलेशिया से जोड़ा जाएगा। परियोजना के तहत भारत में दो लैंडिंग स्टेशन बनाए जाएंगे—

  • मछलीपट्टनम, आंध्र प्रदेश
  • दक्षिण चेन्नई, तमिलनाडु

जबकि अन्य लैंडिंग पॉइंट सिंगापुर और मलेशिया के कुआलालंपुर क्षेत्र में स्थापित किए जाएंगे।

किन कंपनियों की है भागीदारी?

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में कई बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं, जिनमें:

  • Microsoft
  • Tata Communications
  • Singtel
  • Lightstorm

शामिल हैं। वहीं जापान की कंपनी NEC Corporation को सिस्टम सप्लायर और ASEAN Cableship को समुद्री इंस्टॉलेशन पार्टनर बनाया गया है।

AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को मिलेगा बड़ा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि I-2SEA परियोजना का सबसे बड़ा लाभ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं को मिलेगा।

भारत तेजी से AI और डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहा है। नई सबमरीन केबल के जरिए डेटा ट्रांसमिशन की क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक को अधिक तेज और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

2029 तक चालू होने की उम्मीद

कंसोर्टियम के अनुसार I-2SEA सबमरीन केबल सिस्टम को 2029 की चौथी तिमाही (Q4 2029) तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच डिजिटल कारोबार और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

  • भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच इंटरनेट स्पीड बढ़ेगी।
  • AI और क्लाउड सेवाओं को मजबूत आधार मिलेगा।
  • डेटा सेंटर निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम को फायदा होगा।
  • भारत को एशिया के प्रमुख डिजिटल हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

दुनिया का 95% इंटरनेट ट्रैफिक चलता है सबमरीन केबल से

विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के लगभग 95 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का संचालन समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों के माध्यम से होता है। ऐसे में I-2SEA परियोजना भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाएगी।

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