विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने जयशंकर का जताया आभार

जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को इस पद पर उनकी दोबारा नियुक्ति पर बधाई संदेश के लिए धन्यवाद दिया। मोटेगी ने कहा कि वह भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने और फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (एफओआईपी) को साकार करने की उम्मीद कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर साझा किया संदेश
जापान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मोटेगी का बयान साझा किया। इसमें उन्होंने लिखा, ‘मैं अपनी दोबारा नियुक्ति पर आपके बधाई संदेश की सराहना करता हूं। मैं द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और एक फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक को साकार करने के लिए आपके साथ लगातार काम करने की उम्मीद करता हूं।’

यह बयान विदेश मंत्री जयशंकर के उस संदेश के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने मोटेगी को बधाई दी थी। जयशंकर ने लिखा था कि ‘जापान के विदेश मंत्री के तौर पर तोशिमित्सु मोटेगी को दोबारा नियुक्त होने पर बधाई। हमारी स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करने का इंतजार रहेगा।’

पीएम मोदी ने सनाए ताकाइची को दी थी बधाई
इससे पहले आठ फरवरी को जापान में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनाव हुए थे। इसमें जीत हासिल करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनाए ताकाइची को बधाई दी थी। पीएम मोदी ने भरोसा जताया कि ताकाइची के नेतृत्व में भारत और जापान की दोस्ती नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा कि दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए अहम है।

इसके जवाब में सनाए ताकाइची ने पीएम मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना जारी रखना चाहती हैं ताकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो सके।

जापान में एलडीपी की ऐतिहासिक जीत
जापान की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने इन चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है। जापान की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी ने 465 सदस्यों वाले निचले सदन में 310 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी पार्टी ने यह आंकड़ा पार किया है।

रणनीतिक वार्ता में हुई थी अहम चर्चा
दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। इससे पहले 16 जनवरी को नई दिल्ली में 18वीं भारत-जापान रणनीतिक वार्ता हुई थी। इसकी अध्यक्षता एस. जयशंकर और तोशिमित्सु मोटेगी ने मिलकर की थी। इस बैठक में अर्थव्यवस्था, समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन, जरूरी मिनरल, तकनीक और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

जयशंकर ने उस समय कहा था कि यह साझेदारी विश्व व्यवस्था को आकार देने और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिम से बचाने की क्षमता रखती है। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के विकास पर भी अपने विचार साझा किए थे।

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