शांतनु नारायण के इस्तीफे से मची खलबली! औंधे मुंह गिरे एडोब शेयर
क्रिएटिव सॉफ्टवेयर की दिग्गज कंपनी एडोब (Adobe) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शांतनु नारायण ने अपने पद से इस्तीफा (Adobe CEO Shantanu Narayen Resign) देने की घोषणा की है। उनका यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एआई (AI) के इस तेजी से बदलते युग में कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों के बीच गहरा संदेह पनप रहा है। 18 साल तक सीईओ की जिम्मेदारी संभालने वाले 62 उम्र के नारायण तब तक अपने पद पर बने रहेंगे, जब तक किसी नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती। इसके बाद वह एडोब के बोर्ड अध्यक्ष (चेयरमैन) के रूप में कंपनी के साथ जुड़े रहेंगे।
AI से मिल रही कड़ी टक्कर और शेयरों में भारी गिरावट
इस खबर के आने के बाद आफ्टर-मार्केट ट्रेडिंग में एडोब के शेयरों में लगभग 7% की गिरावट दर्ज की गई। साल 2026 में अब तक कंपनी का स्टॉक लगभग 23% टूट चुका है, जिससे यह अपने पिछले तीन साल के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है।
फोटोशॉप (Photoshop) जैसी सॉफ्टवेयर बनाने वाली यह कंपनी उन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक है, जिन्हें नए एआई स्टार्टअप्स और प्रतिद्वंद्वियों के सामने ग्राहकों को जोड़े रखने में संघर्ष करना पड़ रहा है। जेनरेटिव एआई और गूगल के Veo 3 जैसे नए एआई मॉडल्स ने एडोब के महंगे सॉफ्टवेयर के बिना भी विज़ुअल कंटेंट बनाना आसान कर दिया है।
हालांकि, अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाने के लिए एडोब ने अपने उत्पादों में ‘फायरफ्लाई’ (Firefly) जैसे एआई टूल्स को जोड़ा है (जो कॉपीराइट मुक्त इमेजरी बनाते हैं), लेकिन निवेशकों की चिंताएं अभी भी खत्म नहीं हुई हैं। ई-मार्केटर (Emarketer) की विश्लेषक ग्रेस हार्मन का कहना है कि, “यह बदलाव रणनीतिक निरंतरता और नवाचार की गति पर सवाल खड़े करता है। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि नया नेतृत्व एआई में आक्रामक निवेश और अनुशासित रणनीति के बीच कैसे संतुलन बनाता है।”
शांतनु नारायण का भारत के हैदराबाद से कनेक्शन और एजुकेशन
नारायण का जन्म और पालन-पोषण हैदराबाद में हुआ। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। उन्होंने ओहियो के बॉलिंग ग्रीन स्टेट यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री और यूसी बर्कले के हास स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया। अपने शुरुआती करियर में उन्होंने IT जगत की कुछ सबसे प्रसिद्ध कंपनियों में काम किया, जिनमें एप्पल और सिलिकॉन ग्राफिक्स में उत्पाद विकास संबंधी भूमिकाएं और फोटो-शेयरिंग स्टार्टअप पिकट्रा के को-फाउंडर के रूप में काम करना शामिल है। वे 1998 में एडोब में वाइस-चेयरमैन और इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकी समूह के महाप्रबंधक के रूप में शामिल हुए, 2005 में अध्यक्ष और सीओओ बने और दिसंबर 2007 में सीईओ बन गए। वे 2017 से बोर्ड के अध्यक्ष का अतिरिक्त पद भी संभाल रहे हैं। एडोब ने उन्हें पांच पेटेंट प्रदान किए हैं।
शांतनु नारायण का 18 साल का शानदार और ऐतिहासिक सफर
2007 के अंत में जब उन्होंने कमान संभाली थी, तब से एडोब का सालाना रेवेन्यू लगभग छह गुना बढ़कर 24 बिलियन डॉलर हो गया। वहीं कर्मचारियों की संख्या इस दौरान 7,000 से बढ़कर 30,000 से अधिक हो गई। नारायण को सॉफ्टवेयर उद्योग में वन-टाइम परचेज (एकमुश्त खरीद) वाले मॉडल को ‘सब्सक्रिप्शन बेस मॉडल’ (SaaS) में सफलतापूर्वक बदलने का श्रेय दिया जाता है।
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि नारायण का एडोब में सफर “ऐतिहासिक” रहा। वहीं, फिग्मा (Figma) के सीईओ डायलन फील्ड ने उन्हें “विचारशील और एडोब के विजन के प्रति दृढ़” बताया।
मजबूत वित्तीय नतीजों के बावजूद इस्तीफा
दिलचस्प बात यह है कि नारायण के इस्तीफे की खबर एडोब के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के दिन ही आई। कंपनी की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है। वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में बिक्री 12% बढ़कर 6.4 बिलियन डॉलर रही, जो विश्लेषकों के 6.28 बिलियन डॉलर के अनुमान से अधिक है। समायोजित आय $6.06 प्रति शेयर रही, जिसने $5.88 के अनुमान को पछाड़ दिया। नारायण ने बताया कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में ‘फायरफ्लाई’ जैसे एआई-फर्स्ट उत्पादों का वार्षिक आवर्ती राजस्व (ARR) तीन गुना से अधिक हो गया है।





