Home / खेल / कभी जो भारत की ताकत थी, वही कमजोर कड़ी बनी; सर्दी के मौसम में फायदा उठाने तैयार न्यूजीलैंड

कभी जो भारत की ताकत थी, वही कमजोर कड़ी बनी; सर्दी के मौसम में फायदा उठाने तैयार न्यूजीलैंड

भारत मौसम और स्पिन गेंदबाजी भ्रमणकारी टीमों के लिए हमेशा से चिंता का कारण रही हैं। मगर न्यूजीलैंड के खिलाफ हालिया सीरीज में यही दोनों भारत की कमजोरी बन गए हैं। ठंड के मौसम से कीवी टीम सहज है और भारतीय स्पिन गेंदबाजों के लय में न होने से उनके बल्ले जमकर गरज रहे हैं।

अब सीरीज निर्णायक मोड़ पर है और न्यूजीलैंड टीम का पूरा जोर स्पिनर गेंदबाजों पर ही है। इंदौर में शुक्रवार को भारतीय टीम ने आराम किया, लेकिन न्यूजीलैंड की टीम ने तीन घंटे अभ्यास में पसीना बहाया। इस दौरान अधिकांश समय स्पिन गेंदबाजी का ही सामना किया।

तोड़ना होगा स्पिन का तिलिस्म
इंदौर के होलकर स्टेडियम में 18 जनवरी को तीसरा और अंतिम वनडे मैच खेला जाएगा। मैदान की बाउंड्री तुलनात्मक रूप से छोटी है और विकेट भी पारंपरिक रूप से बल्लेबाजों को सहयोग करता है। कीवी टीम को पता है कि जीत का रास्ता स्पिन का तिलिस्म तोड़कर ही निकलेगा। दूसरे वनडे में भारतीय गेंदबाज 284 रनों का सशक्त स्कोर का बचाव नहीं कर सके थे। कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा की गेंदों में उनकी ख्याति के अनुसार चमक नहीं दिखी है।

कुलदीप ने 10 ओवर में 82 रन खर्च कर सिर्फ एक विकेट लिया वहीं जडेजा आठ ओवर में 44 रन देकर खाली हाथ रहे। मगर कुछ मैचों से इतने बड़े खिलाड़ियों को खारिज नहीं किया जा सकता। कुलदीप की फ्लाइट लेती गेंदों ने विपक्षी बल्लेबाजों को खास परेशान नहीं किया। स्पिनरों को ललचाने के बजाए बल्लेबाजों को क्रीज में बांधने पर जोर देना होगा क्योंकि छोटे मैदान में मिस-हिट भी बाउंड्री बन जाती है।

बडोनी को मिल सकता है मौका
नितिश कुमार रेड्डी की जगह ऑफ स्पिन करने वाले आयुष बडोनी को अवसर दिया जा सकता है। नितिश रेड्डी ने सिर्फ दो ओवर गेंदबाजी की और रन भी ज्यादा नहीं बनाए। फिलहाल बल्लेबाजी में बहुत ज्यादा चिंता नहीं है, लेकिन निचलाक्रम परेशानी का सबब बना है। तमाम संभावनाओं के बीच न्यूजीलैंड टीम ने शुक्रवार को करीब तीन घंटा स्पिन गेंदों का ही अभ्यास किया।

न्यूजीलैंड टीम में भारतीय मूल के दाएं हाथ के लेग ब्रेक गेंदबाज आदित्य अशोक ने काफी देर तक गेंदबाजी की। उनके अलावा जेडन लेनाक्स, माइकल ब्रेसवेल और ग्लेन फिलिप्स ने भी बल्लेबाजों को विभिन्न परिस्थितियों में शॉट खेलने का अभ्यास कराया। स्पिन के प्रति गंभीरता ऐसी रही कि नेट गेंदबाज के रूप में सिर्फ स्पिनर ही बुलाए गए थे। ओपनर डेवोन कोन्वे भी शुरुआत से लेकर अंत तक क्रीज पर डटे रहे। इस दौरान किसी ने भी फील्डिंग का अभ्यास नहीं किया।

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