बांग्लादेश में खसरे का कहर, साधारण दिखने वाले रैशेज बन सकते हैं जानलेवा
बांग्लादेश में खसरे के कारण अभी तक 118 जानें जा चुकी हैं और संभावना जताई जा रही है कि देश भर में लगभग 2006 मरीज हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की है। मरीजों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन ऐसी गंभीर स्थिति में बचाव बेहद जरूरी है।
खसरा, जिसे अंग्रेजी में मीजस्ल कहा जाता है, वायरस से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है, जिसमें रैश और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। आइए जानते हैं कि यह बीमारी कैसे शरीर को प्रभावित करती है, इसके लक्षण कैसे होते हैं और बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
क्या होता है खसरा?
खसरा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए फैलती है। इसमें दिखने वाला सबसे कॉमन लक्षण है शरीर पर लाल चक्कते होना, जिन्हें लोग शुरुआत में साधारण रैश समझ लेते हैं, लेकिन असल में यह इससे कहीं ज्यादा गंभीर है।
अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह निमोनिया और दिमाग में सूजन जैसी जानलेवा स्थितियों का कारण बन सकता है।
मीजल्स के लक्षण कैसे होते हैं?
खसरे के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के लगभग 10 से 14 दिनों के बाद दिखाई देते हैं।
तेज बुखार- इन्फेक्शन की शुरुआत अक्सर बहुत तेज बुखार से होती है।
खांसी और जुकाम- सूखी खांसी और नाक बहना इसके शुरुआती संकेत हैं।
आंखों का लाल होना- आंखों में जलन, रेडनेस या पानी आना।
कोप्लिक स्पॉट्स- मुंह के अंदर गालों के भीतरी हिस्से पर सफेद केंद्र वाले छोटे लाल धब्बे दिखाई देना खसरे की पहचान है।
शरीर पर चकत्ते- बुखार शुरू होने के कुछ दिनों बाद चेहरे से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल चपटे चकत्ते फैल जाते हैं।
अन्य लक्षण- थकान, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, दस्त और उल्टी जैसी पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
यह कैसे फैलता है?
मीजल्स एक हवा से फैलने वाली बीमारी है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो वायरस के कण हवा में फैल जाते हैं। यह वायरस हवा में या संक्रमित सतहों पर 2 घंटे तक जीवित रह सकता है। अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति उस हवा में सांस लेता है या संक्रमित सतह को छूने के बाद अपनी नाक या मुंह को छूता है, तो वह भी संक्रमित हो सकता है।
बचाव के लिए क्या करें?
मीजल्स से बचने का सबसे प्रभावी और सुरक्षित तरीका वैक्सीनेशन है। इसके अलावा कुछ अन्य सावधानियां बरतकर भी सुरक्षित रहा जा सकता है-
टीकाकरण सबसे जरूरी- MMR वैक्सीन-खसरा, मम्प्स और रूबेला के लिए MMR वैक्सीन की दो खुराकें दी जाती हैं। पहली खुराक 12-15 महीने की उम्र में और दूसरी 4-6 साल की उम्र में। वयस्कों को भी अगर बचपन में टीका नहीं लगा है, तो डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लेनी चाहिए।
स्वच्छता का ध्यान रखें- हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं। अगर साबुन न हो, तो 70-80% अल्कोहल वाले सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। खांसते या छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत कूड़ेदान में फेंक दें।
संक्रमित व्यक्ति से दूरी- अगर आपके आसपास किसी को खसरा है, तो उससे दूरी बनाए रखें। भीड़भाड़ वाले और कम हवादार स्थानों पर जाने से बचें। संक्रमित व्यक्ति को रैशेज दिखने के 4 दिन बाद तक खुद को आइसोलेट रखना चाहिए।
डॉक्टरी सलाह- अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं, तो 72 घंटों के भीतर डॉक्टर से मिलें। समय पर ली गई वैक्सीन गंभीर बीमारी को रोक सकते हैं।





