Kal Ka Panchang: 14 जून 2026 को अधिक दर्श अमावस्या, पितृ तर्पण और विष्णु पूजा का विशेष संयोग
14 जून 2026 के पंचांग में जानें अधिक दर्श अमावस्या, तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और पूजा का धार्मिक महत्व।
रविवार, 14 जून 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिक मास में पड़ने वाली अधिक दर्श अमावस्या के अवसर पर पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए धार्मिक कार्यों से पितृ दोष की शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
14 जून 2026 का पंचांग
दिन: रविवार
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: अधिक ज्येष्ठ मास
तिथि: कृष्ण चतुर्दशी दोपहर लगभग 12:20 बजे तक, इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ।
नक्षत्र: रोहिणी।
योग: धृति योग।
करण: शकुनि करण के बाद अगले करण का आरंभ।
सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: प्रातः लगभग 5:22 बजे
- सूर्यास्त: सायं लगभग 7:19 बजे
स्थान के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
राहुकाल
रविवार के दिन राहुकाल का समय लगभग:
सायं 5:35 बजे से 7:19 बजे तक
इस अवधि में नए और शुभ कार्य शुरू करने से बचने की परंपरा है।
अभिजीत मुहूर्त
महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त लगभग:
11:53 बजे से 12:48 बजे तक
अधिक दर्श अमावस्या का महत्व
अधिक मास की अमावस्या को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन:
- पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है।
- भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
- पवित्र नदी में स्नान और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
इस दिन क्या करें?
1. पितृ तर्पण करें
पूर्वजों की शांति के लिए तिल और जल अर्पित करें।
2. भगवान विष्णु की पूजा
तुलसी पत्र, पीले पुष्प और भोग अर्पित करें।
3. दान-पुण्य
अन्न, वस्त्र, तिल, फल और जरूरतमंदों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
4. मंत्र जाप
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप लाभकारी माना जाता है।
किन कार्यों से बचें?
- राहुकाल में नए कार्य शुरू करने से बचें।
- अनावश्यक विवाद और क्रोध से दूरी रखें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर तामसिक भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
निष्कर्ष

14 जून 2026 का दिन अधिक ज्येष्ठ मास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन चतुर्दशी से अमावस्या तिथि का संयोग रहेगा और पितृ तर्पण, भगवान विष्णु की पूजा तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों में पंचांग के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।





