आज भगवान जगन्नाथ की देव स्नान यात्रा, 108 कलशों के पवित्र जल से होगा महाभिषेक, हाथी वेश में देंगे दर्शन
पुरी में आज भगवान जगन्नाथ की देव स्नान यात्रा मनाई जा रही है। 108 कलशों के पवित्र जल से महाभिषेक के बाद भगवान हाथी वेश में भक्तों को दर्शन देंगे।
आज भगवान जगन्नाथ की देव स्नान यात्रा, 108 कलशों के पवित्र जल से होगा महाभिषेक, हाथी वेश में देंगे दर्शन
पुरी। भगवान श्रीजगन्नाथ की प्रसिद्ध देव स्नान यात्रा आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। इस विशेष अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन का 108 कलशों के पवित्र जल से महाभिषेक किया जाएगा। स्नान के बाद भगवान भक्तों को अपने विशेष हाथी वेश (गज वेश) में दर्शन देंगे।
Snana Yatra को भगवान जगन्नाथ की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है। इस दिन हजारों श्रद्धालु Jagannath Temple में पहुंचकर भगवान के दर्शन करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
108 कलशों से होगा महाभिषेक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष भी भगवानों का अभिषेक 108 पवित्र कलशों के जल से किया जाएगा। इसमें—
- भगवान जगन्नाथ को – 35 कलश
- भगवान बलभद्र को – 33 कलश
- देवी सुभद्रा को – 22 कलश
- भगवान सुदर्शन को – 18 कलश
इन सभी कलशों का जल मंदिर के पवित्र कुओं और विशेष धार्मिक विधियों से तैयार किया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच भगवान का महाभिषेक संपन्न होता है।
हाथी वेश में देंगे दर्शन
महाभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को विशेष रूप से हाथी वेश (हाती बेशा) में सजाया जाता है। यह स्वरूप भक्तों के लिए बेहद आकर्षण का केंद्र होता है। मान्यता है कि इस रूप में भगवान अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और मंगल का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
स्नान के बाद क्यों होते हैं ‘अनसर’?
धार्मिक परंपरा के अनुसार, देव स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को अनसर काल कहा जाता है। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में भगवान के दर्शन नहीं होते और उनकी विशेष सेवा-पूजा की जाती है।
इसके बाद भगवान नए स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर विश्व प्रसिद्ध Ratha Yatra की शुरुआत होती है।
धार्मिक महत्व
देव स्नान यात्रा को भगवान जगन्नाथ के प्रकट होने के उत्सव के रूप में भी देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान के दर्शन करने और स्नान यात्रा में शामिल होने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।





