जून में महंगी हुई थाली: प्याज-टमाटर की बढ़ी कीमतों से वेज और नॉनवेज भोजन पर बढ़ा खर्च, 5% तक आया उछाल
Veg and Non-Veg Thali Price Hike June 2026: प्याज-टमाटर महंगे, थाली 5% तक हुई महंगी
जून 2026 में प्याज, टमाटर और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम लोगों की थाली पर पड़ा। CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार वेज और नॉनवेज थाली की लागत में 5% तक की वृद्धि दर्ज की गई।
महंगाई की मार: आम आदमी की थाली हुई और महंगी
देश में खाद्य महंगाई का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई और खाने की थाली पर दिखाई देने लगा है। जून 2026 में प्याज, टमाटर और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते वेज और नॉनवेज दोनों तरह की थालियों की लागत में लगभग 5 प्रतिशत तक का इजाफा दर्ज किया गया है। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए। रिपोर्ट के अनुसार, सब्जियों की बढ़ती कीमतें इस वृद्धि का प्रमुख कारण रही हैं।
CRISIL की रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर
रेटिंग एजेंसी CRISIL की मासिक ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के मुताबिक जून महीने में थाली तैयार करने की लागत मई की तुलना में बढ़ी है। वेज थाली में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों—विशेष रूप से प्याज और टमाटर—की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि नॉनवेज थाली में मसालों और अन्य सामग्री की महंगाई का भी असर पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, मौसम संबंधी चुनौतियों, आपूर्ति में कमी और परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य वस्तुओं के दाम ऊपर गए, जिसका सीधा असर थाली की कुल लागत पर पड़ा।
प्याज और टमाटर बने सबसे बड़े कारण
जून के दौरान कई राज्यों में बारिश और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण मंडियों में प्याज और टमाटर की आवक प्रभावित रही। इसके चलते दोनों सब्जियों के खुदरा दाम तेजी से बढ़े। चूंकि ये लगभग हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा हैं, इसलिए इनके महंगे होने का असर अधिकांश व्यंजनों की लागत पर पड़ा।
विशेषज्ञों का कहना है कि सब्जियों के साथ-साथ खाद्य तेल, मसाले और रसोई गैस जैसी अन्य लागतें भी कुल खर्च बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
वेज और नॉनवेज दोनों थालियां हुईं महंगी
रिपोर्ट के अनुसार—
- वेज थाली की लागत में लगभग 5% तक की वृद्धि दर्ज की गई।
- नॉनवेज थाली भी महंगी हुई, क्योंकि चिकन, मसाले और सब्जियों की लागत बढ़ी।
- घरों के साथ-साथ होटल, ढाबों और रेस्तरां में भोजन की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
आम परिवारों के बजट पर बढ़ा दबाव
खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण परिवारों का मासिक रसोई बजट प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में सब्जियों और किराना सामान की बढ़ती कीमतें घरेलू खर्च बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के दौरान फसलों की स्थिति बेहतर रहती है और आपूर्ति सामान्य होती है, तो आने वाले महीनों में कुछ राहत मिल सकती है।
सरकार और बाजार की नजर
सरकार खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए है। आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी रोकने और आपूर्ति बढ़ाने के लिए संबंधित विभाग राज्यों के साथ समन्वय कर रहे हैं। यदि उत्पादन और सप्लाई में सुधार होता है, तो खाद्य महंगाई में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना जताई जा रही है।





