AISHE Report 2023-24: भारत में उच्च शिक्षा ने रचा नया इतिहास, रिकॉर्ड 4.5 करोड़ छात्रों का नामांकन
AISHE Report 2023-24: भारत में उच्च शिक्षा में रिकॉर्ड 4.5 करोड़ छात्रों का नामांकन, महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
शिक्षा मंत्रालय की AISHE Report 2023-24 के अनुसार भारत में उच्च शिक्षा में रिकॉर्ड 4.5 करोड़ छात्रों का नामांकन हुआ है। महिलाओं की भागीदारी, STEM शिक्षा और GER में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
नई दिल्ली।
भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार देश में उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों का कुल नामांकन बढ़कर 4,50,01,123 (लगभग 4.5 करोड़) हो गया है, जो अब तक का सबसे अधिक है। यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 के 3.42 करोड़ नामांकन की तुलना में 31.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, संस्थानों के विस्तार और डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन देने के प्रयासों का महत्वपूर्ण परिणाम मानी जा रही है।
महिलाओं ने बढ़ाई उच्च शिक्षा की रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। पिछले दस वर्षों में महिला नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला सकल नामांकन अनुपात (GER) 31.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पुरुषों के 28.9 प्रतिशत GER से अधिक है। यह भारत में महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी और सामाजिक बदलाव का संकेत है।
STEM शिक्षा में भी नया रिकॉर्ड
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में भी छात्रों की रुचि तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार इन विषयों में अध्ययन करने वाले छात्रों की संख्या 1 करोड़ से अधिक हो गई है, जो भारत की तकनीकी और नवाचार क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
स्नातक पाठ्यक्रम सबसे अधिक लोकप्रिय
AISHE रिपोर्ट बताती है कि कुल नामांकन का लगभग 76.8 प्रतिशत (करीब 3.5 करोड़ छात्र) स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों में है। स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर लगभग 57.9 लाख छात्र अध्ययन कर रहे हैं।
स्नातक स्तर पर सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रम बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) है, जबकि स्नातकोत्तर स्तर पर मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) में सबसे अधिक नामांकन दर्ज किया गया है।
छह राज्यों में आधे से अधिक नामांकन
रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल उच्च शिक्षा नामांकन का लगभग 52.9 प्रतिशत केवल छह राज्यों में केंद्रित है—
- उत्तर प्रदेश
- महाराष्ट्र
- तमिलनाडु
- मध्य प्रदेश
- कर्नाटक
- बिहार
इन राज्यों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का व्यापक नेटवर्क तथा बढ़ती शैक्षणिक पहुंच इसका प्रमुख कारण माना गया है।
निजी कॉलेजों की बड़ी भूमिका
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कॉलेज स्तर पर पढ़ने वाले 70 प्रतिशत से अधिक छात्र निजी संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालयों में सरकारी संस्थानों की हिस्सेदारी अभी भी अधिक बनी हुई है। इससे स्पष्ट होता है कि उच्च शिक्षा के विस्तार में निजी क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
AISHE क्यों है महत्वपूर्ण?
AISHE भारत में उच्च शिक्षा से जुड़े आंकड़ों का सबसे बड़ा आधिकारिक सर्वेक्षण है। इसमें विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों से छात्रों, शिक्षकों, बुनियादी ढांचे, परीक्षाओं और वित्तीय संसाधनों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती है। यही रिपोर्ट सरकार को शिक्षा नीति बनाने और योजनाओं की निगरानी में आधार प्रदान करती है।
NEP 2020 के क्रियान्वयन की भी झलक
AISHE 2023-24 पहली ऐसी रिपोर्टों में शामिल है, जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन की स्थिति का भी आकलन किया गया है। कई विश्वविद्यालयों ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम और अन्य सुधार लागू किए हैं, हालांकि राज्यों और संस्थानों के बीच प्रगति असमान बनी हुई है।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड नामांकन भारत के जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Dividend) का सकारात्मक संकेत है। हालांकि अब सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगारपरक कौशल, शोध, नवाचार और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने की होगी, ताकि बढ़ते नामांकन का लाभ देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को मिल सके।
निष्कर्ष
AISHE Report 2023-24 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। रिकॉर्ड 4.5 करोड़ छात्रों का नामांकन, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, STEM शिक्षा में वृद्धि और नई शिक्षा नीति के प्रभाव से भारत वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में यदि गुणवत्ता, कौशल विकास और शोध पर समान रूप से ध्यान दिया गया तो भारत विश्व के अग्रणी शिक्षा केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।





