दक्षिण भारत से मिस्र गिद्ध (Egyptian Vulture) हुए विलुप्त, वैज्ञानिकों ने जताई गंभीर चिंता
दक्षिण भारत से Egyptian Vulture हुए विलुप्त, वैज्ञानिकों ने जताई गंभीर चिंता
दक्षिण भारत से Egyptian Vulture के स्थानीय विलुप्त होने पर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई। आवास विनाश और जहरीली दवाएं प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।
नई दिल्ली।
दक्षिण भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। नवीनतम वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार मिस्र गिद्ध (Egyptian Vulture) अब दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों से स्थानीय रूप से विलुप्त (Locally Extinct) हो चुके हैं। कभी प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों में आसानी से दिखाई देने वाला यह दुर्लभ गिद्ध अब यहां लगभग पूरी तरह गायब हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी संरक्षण उपाय नहीं किए गए तो देश के अन्य हिस्सों में भी इस प्रजाति का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
क्या है Egyptian Vulture?
Egyptian Vulture (Neophron percnopterus) दुनिया की सबसे छोटी गिद्ध प्रजातियों में से एक है। इसका शरीर सफेद रंग का होता है, जबकि चेहरा पीले रंग का और पंखों के सिरे काले दिखाई देते हैं। यह मुख्य रूप से मृत पशुओं के अवशेष खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसे प्रकृति का “सफाईकर्मी पक्षी” भी कहा जाता है क्योंकि यह सड़ते हुए जैविक पदार्थों को समाप्त कर संक्रमण फैलने से रोकने में मदद करता है।
दक्षिण भारत से क्यों गायब हुए गिद्ध?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार Egyptian Vulture की संख्या में गिरावट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं—
- पशुओं में डाइक्लोफेनाक (Diclofenac) जैसी जहरीली दवाओं का उपयोग।
- प्राकृतिक आवासों का लगातार नष्ट होना।
- बिजली की हाई-टेंशन लाइनों से टकराकर मौत।
- जहरीले चारे के कारण विषाक्तता।
- भोजन के स्रोतों में कमी।
- मानव गतिविधियों और शहरीकरण का बढ़ता प्रभाव।
- जलवायु परिवर्तन का असर।
इन सभी कारणों ने मिलकर इस प्रजाति के अस्तित्व पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
पर्यावरण के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
गिद्ध केवल मृत जानवरों को खाने वाले पक्षी नहीं हैं, बल्कि वे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इनके कम होने से—
- मृत पशुओं का तेजी से निपटान नहीं हो पाता।
- संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं।
- आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने का खतरा रहता है।
- रेबीज जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
- पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है।
IUCN की सूची में पहले से संकटग्रस्त
Egyptian Vulture को IUCN Red List में Endangered (संकटग्रस्त) श्रेणी में रखा गया है। दुनिया के कई देशों में इसकी आबादी लगातार घट रही है। भारत में भी यह प्रजाति कानूनी संरक्षण के दायरे में है, लेकिन इसके बावजूद इसकी संख्या में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।
क्या किए जा रहे हैं संरक्षण प्रयास?
वन्यजीव संस्थान, राज्य वन विभाग और विभिन्न संरक्षण संगठन गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रहे हैं—
- डाइक्लोफेनाक के उपयोग पर नियंत्रण।
- सुरक्षित भोजन स्थलों (Vulture Restaurants) का विकास।
- कृत्रिम प्रजनन (Captive Breeding) कार्यक्रम।
- बिजली लाइनों को सुरक्षित बनाना।
- स्थानीय समुदायों को जागरूक करना।
- नियमित वैज्ञानिक निगरानी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रयासों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए तो भविष्य में गिद्धों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
शोधकर्ताओं का कहना है कि दक्षिण भारत से Egyptian Vulture का स्थानीय विलुप्त होना केवल एक पक्षी प्रजाति का नुकसान नहीं है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चेतावनी है। यदि जैव विविधता संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया तो अन्य संकटग्रस्त प्रजातियां भी इसी तरह गायब हो सकती हैं।
निष्कर्ष
दक्षिण भारत से Egyptian Vulture का स्थानीय रूप से विलुप्त होना वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में गंभीर चिंता का विषय है। यह घटना बताती है कि प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, जहरीली पशु दवाओं पर नियंत्रण और वैज्ञानिक संरक्षण उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। गिद्धों का संरक्षण केवल एक पक्षी को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

