कोयंबटूर में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की 29वीं बैठक संपन्न, बाघ संरक्षण को लेकर बने अहम रणनीतिक फैसले
कोयंबटूर में NTCA की 29वीं बैठक, बाघ संरक्षण पर अहम मंथन
तमिलनाडु के कोयंबटूर में NTCA की 29वीं बैठक में बाघ संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और आधुनिक निगरानी तकनीकों पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
देश में बाघ संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) की 29वीं बैठक तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर के बाघ अभयारण्यों के निदेशकों, वन अधिकारियों, वन्यजीव वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। बैठक में बाघों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने इस बैठक को भारत के बाघ संरक्षण कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया, क्योंकि देश में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनके आवासों की सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
NTCA की 29वीं बैठक में कई प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया—
- देश के सभी टाइगर रिजर्व की वर्तमान स्थिति की समीक्षा।
- बाघों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग।
- मानव-बाघ संघर्ष को कम करने की रणनीति।
- वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) का संरक्षण।
- शिकार (Poaching) रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करना।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना।
- जलवायु परिवर्तन का बाघों के आवास पर प्रभाव।
Project Tiger को मिलेगा नया बल
बैठक में Project Tiger के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और जुड़े हुए प्राकृतिक आवास सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बाघ संरक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन निगरानी, कैमरा ट्रैप और GIS आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के उपयोग को और बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मानव-बाघ संघर्ष पर विशेष फोकस
बैठक में उन क्षेत्रों की समीक्षा की गई जहां मानव और बाघों के बीच संघर्ष की घटनाएं अधिक सामने आती हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रभावित क्षेत्रों में—
- शीघ्र मुआवजा वितरण,
- स्थानीय समुदायों की जागरूकता,
- सुरक्षित बाड़,
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली,
- और वन्यजीव गलियारों के संरक्षण जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जाए।
भारत विश्व में बाघ संरक्षण का अग्रणी देश
भारत दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत जंगली बाघ आबादी का घर है। पिछले कुछ वर्षों में Project Tiger और NTCA के प्रयासों से देश में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यही कारण है कि भारत को वैश्विक स्तर पर बाघ संरक्षण का सफल मॉडल माना जाता है।
तकनीक और अनुसंधान पर जोर
बैठक में वैज्ञानिक अनुसंधान, आनुवंशिक अध्ययन (Genetic Monitoring), कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण और डिजिटल डेटा प्रबंधन को मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी। इससे बाघों की गतिविधियों, स्वास्थ्य और आवास संबंधी जानकारी अधिक सटीक रूप से उपलब्ध हो सकेगी।
स्थानीय समुदायों की भूमिका अहम
विशेषज्ञों ने कहा कि बाघ संरक्षण तभी सफल होगा जब वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को संरक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदार बनाया जाए। इको-टूरिज्म, वैकल्पिक आजीविका और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय समुदायों को जोड़ने पर भी बल दिया गया।
निष्कर्ष
तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की 29वीं बैठक भारत के बाघ संरक्षण कार्यक्रम को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और प्रभावी संरक्षण रणनीतियों के माध्यम से भारत आने वाले वर्षों में भी विश्व में बाघ संरक्षण का अग्रणी देश बना रह सकता है।


