Ustrasana Benefits: पीठ, गर्दन और पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है कैमल पोज, जानें सही तरीका ???

आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे, जानिए कैसे करते हैं यह योग....

Yoga Tips:आयुष मंत्रालय की सलाह- योग से अधिकतम लाभ पाने के लिए जानिए क्या करें-क्या नहीं? - Ayush Ministry Tips For Yoga In Hindi, Do's And Don't For Yoga - Amar Ujala

उष्ट्रासन करने पर क्या होता है?

योग शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है। रोजाना योगासन करने से शरीर की मजबूती, लचीलापन और संतुलन बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। इन्हीं योगासनों में उष्ट्रासन भी शामिल है, जिसे अंग्रेजी में Camel Pose कहा जाता है।

आयुष मंत्रालय से जुड़े योग संसाधनों में उष्ट्रासन के कई संभावित लाभ बताए गए हैं। इस आसन में शरीर ऊंट के समान आकृति बनाता है, इसलिए इसे उष्ट्रासन कहा जाता है। आयुष से जुड़े मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार, यह आसन पाचन संबंधी समस्याओं और कब्ज में मददगार हो सकता है, गर्दन के अगले हिस्से में खिंचाव देता है तथा पीठ और झुके हुए कंधों की समस्या में भी उपयोगी माना जाता है।

उष्ट्रासन क्या है?

संस्कृत में ‘उष्ट्र’ का अर्थ ऊंट होता है। इस आसन की अंतिम स्थिति में शरीर पीछे की ओर झुकता है और उसका आकार ऊंट जैसा दिखाई देता है। यह एक बैक-बेंडिंग योगासन है, जिसमें छाती, पेट, गर्दन और पीठ के हिस्से में खिंचाव महसूस होता है।

उष्ट्रासन करते समय शरीर को पीछे की ओर ले जाना होता है, इसलिए इसे सही तकनीक और शरीर की क्षमता के अनुसार करना जरूरी है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत करने वाले लोग पहले हल्के बैक-बेंड से अभ्यास शुरू कर सकते हैं।

उष्ट्रासन करने के फायदे

1. पाचन को बेहतर रखने में मदद

आयुष से जुड़े योग दस्तावेजों के अनुसार, उष्ट्रासन कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं में मददगार हो सकता है। आसन के दौरान पेट के हिस्से में खिंचाव होने से पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

2. पीठ की मांसपेशियों को मजबूती

उष्ट्रासन पीठ की मांसपेशियों पर काम करता है। आयुष के योग संसाधनों में इसे पीठ दर्द और पीठ की मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी बताया गया है। हालांकि, गंभीर दर्द वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।

3. गर्दन और छाती में खिंचाव

इस आसन में सिर और गर्दन को पीछे की ओर ले जाया जाता है, जिससे गर्दन के अगले हिस्से और छाती की मांसपेशियों में स्ट्रेच मिलता है। बच्चों के लिए तैयार आयुष से जुड़े योग दस्तावेज में उष्ट्रासन को गर्दन, छाती और पेट के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव देने वाला बताया गया है।

4. रीढ़ की लचक बढ़ाने में सहायक

उष्ट्रासन रीढ़ को पीछे की ओर मोड़ने वाला आसन है। आयुष से जुड़े एक योग दस्तावेज के अनुसार, यह रीढ़ की लचक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

5. झुके हुए कंधों में उपयोगी

जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनमें कंधे आगे की ओर झुकने की समस्या हो सकती है। उष्ट्रासन छाती को खोलने और कंधों को पीछे की ओर ले जाने वाला आसन है। आयुष के योग दस्तावेज में इसे झुके हुए कंधों और गर्दन की मुद्रा से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी बताया गया है।

उष्ट्रासन कैसे करें?

उष्ट्रासन करने के लिए इन आसान चरणों का पालन किया जा सकता है—

  1. सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं।
  2. अब धीरे-धीरे घुटनों के बल खड़े हो जाएं।
  3. दोनों घुटनों और पैरों के बीच हल्का अंतर रखें।
  4. जांघों को जमीन के लगभग सीधा रखें।
  5. सांस लेते हुए शरीर को धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकाएं।
  6. दाएं हाथ से दाईं एड़ी और बाएं हाथ से बाईं एड़ी पकड़ने की कोशिश करें।
  7. गर्दन को झटका देकर पीछे न ले जाएं।
  8. शरीर का वजन हाथों और पैरों पर संतुलित रखें।
  9. सामान्य सांस लेते हुए कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहें।
  10. सांस लेते हुए धीरे-धीरे वापस आएं और फिर वज्रासन में बैठकर आराम करें।

आयुष से जुड़े योग दस्तावेजों में इस आसन की स्थिति को सामान्य श्वास के साथ लगभग 10 से 30 सेकंड तक बनाए रखने का उल्लेख किया गया है।

उष्ट्रासन करते समय इन बातों का रखें ध्यान

उष्ट्रासन एक गहरा बैक-बेंडिंग आसन है, इसलिए इसे जबरदस्ती नहीं करना चाहिए। यदि एड़ियों तक हाथ नहीं पहुंच रहा है तो शुरुआत में हाथों को कमर पर रखकर हल्का बैक-बेंड किया जा सकता है।

आयुष से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, हर्निया, चक्कर या वर्टिगो और गंभीर कमर दर्द की स्थिति में इस आसन से बचना चाहिए या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

किस समय करें उष्ट्रासन?

योगासन आमतौर पर खाली पेट या भोजन के पर्याप्त समय बाद करना बेहतर माना जाता है। सुबह का समय योगाभ्यास के लिए सुविधाजनक हो सकता है। अगर आप पहली बार उष्ट्रासन कर रहे हैं, तो किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना अधिक सुरक्षित रहेगा।

निष्कर्ष

उष्ट्रासन या कैमल पोज शरीर की लचक बढ़ाने, पीठ और गर्दन की मांसपेशियों को सक्रिय करने तथा पाचन से जुड़ी कुछ समस्याओं में सहायक योगासन माना जाता है। हालांकि, किसी भी योगासन को अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार और सही तकनीक से करना जरूरी है। अगर आपको पहले से कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो योगाभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से सलाह लें।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी के इलाज के विकल्प के रूप में इसे न लें।

 

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