World Development Report 2026: नई दिल्ली में लॉन्च हुई विश्व बैंक की रिपोर्ट, AI से विकासशील देशों को मिल सकते हैं नए अवसर ???
World Development Report 2026: नई दिल्ली में लॉन्च हुई विश्व बैंक की AI रिपोर्ट...
नई दिल्ली। विश्व बैंक समूह की World Development Report 2026: The Promise of Artificial Intelligence को 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में लॉन्च किया गया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस रिपोर्ट का औपचारिक अनावरण किया। भारत में इसका लॉन्च इंडियाAI मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और विश्व बैंक समूह ने संयुक्त रूप से आयोजित किया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकासशील देशों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सरकारी सेवाओं और कारोबार के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी, बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, गुणवत्तापूर्ण डेटा, कौशल और मजबूत संस्थागत व्यवस्था जैसे बुनियादी क्षेत्रों में निवेश करना जरूरी होगा। <Cite refs={[“turn353201search0″,”turn353201search1”]}/>
AI के जरिए विकास की नई संभावनाएं
विश्व बैंक की रिपोर्ट का मुख्य विषय यह है कि AI का इस्तेमाल केवल अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। विकासशील देश उपलब्ध AI टूल का उपयोग करके आम लोगों की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, AI की मदद से डॉक्टरों को मरीजों की जांच में सहयोग मिल सकता है, किसानों को फसलों से जुड़े फैसले लेने में सहायता मिल सकती है और शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञ ज्ञान अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। कारोबार में भी AI सूचना का विश्लेषण करने, काम की उत्पादकता बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।
विकासशील देशों के लिए इसका महत्व इसलिए अधिक है, क्योंकि कई क्षेत्रों में विशेषज्ञों, संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की उपलब्धता सीमित है। AI आधारित समाधान इन कमियों को दूर करने में मदद कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित और लागू किया जाए। <Cite refs={[“turn353201search1″,”turn353201search3”]}/>
रिपोर्ट में दिया गया तीन चरणों वाला रोडमैप
विश्व बैंक की रिपोर्ट देशों को AI के लाभ हासिल करने के लिए तीन चरणों वाला दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देती है।
1. Adoption यानी उपलब्ध AI तकनीक को अपनाना
पहले चरण में देशों और संस्थानों को पहले से उपलब्ध AI टूल का उपयोग करना चाहिए। इसके जरिए स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि और सरकारी कामकाज में मौजूद समस्याओं के समाधान तलाशे जा सकते हैं। हर देश के लिए शुरुआत से बड़े AI मॉडल तैयार करना जरूरी नहीं है।
2. Adaptation यानी स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालना
दूसरे चरण में AI टूल को स्थानीय भाषा, सामाजिक परिस्थितियों, आर्थिक जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अनुकूल बनाना महत्वपूर्ण है। भारत जैसे विविधता वाले देश में अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की जरूरतों को समझना AI के प्रभावी उपयोग के लिए अहम हो सकता है।
3. Advancement यानी उन्नत AI क्षमता की दिशा में आगे बढ़ना
तीसरे चरण में वे देश, जिनके पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा, विशेषज्ञता और संसाधन हों, AI के उन्नत विकास और शोध की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट का जोर इस बात पर है कि देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ें। <Cite refs={[“turn353201search1″,”turn353201search3”]}/>
रोजगार पर AI का क्या असर पड़ सकता है?
AI को लेकर रोजगार और नौकरियों के भविष्य पर लगातार चर्चा हो रही है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, कम और मध्यम आय वाले देशों में मौजूदा नौकरियों के लगभग 4.5 प्रतिशत हिस्से पर जनरेटिव AI के कारण स्वचालन का जोखिम है। वहीं, उच्च आय वाले देशों में यह अनुमान 14.2 प्रतिशत है।
दूसरी ओर, रिपोर्ट यह भी बताती है कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 16.2 प्रतिशत नौकरियों की उत्पादकता AI के इस्तेमाल से बेहतर हो सकती है। उच्च आय वाले देशों में यह अनुमान 18.7 प्रतिशत है। ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि AI का प्रभाव केवल नौकरियां समाप्त होने तक सीमित नहीं है; यह लोगों के काम करने के तरीके और उनकी उत्पादकता को भी बदल सकता है। <Cite refs={[“turn353201search1”]}/>
हालांकि, इन आंकड़ों को इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर प्रभावित नौकरी समाप्त हो जाएगी या हर कर्मचारी की उत्पादकता अपने आप बढ़ जाएगी। वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां और सरकारें AI को किस तरह अपनाती हैं, कर्मचारियों को कितना प्रशिक्षण मिलता है और नई तकनीक के साथ काम करने के कितने अवसर उपलब्ध होते हैं।
स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा में AI की भूमिका
रिपोर्ट में उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है जहां AI सीमित संसाधनों के बावजूद सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार कर सकता है।
स्वास्थ्य: AI आधारित उपकरण शुरुआती जांच, मेडिकल रिकॉर्ड के विश्लेषण और डॉक्टरों को निर्णय लेने में सहायता प्रदान कर सकते हैं। लेकिन मरीजों की सुरक्षा, डेटा की गोपनीयता और चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
कृषि: मौसम, मिट्टी, फसल और सिंचाई से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद कर सकता है। स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध डिजिटल सलाह छोटे किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
शिक्षा: AI आधारित शैक्षणिक टूल विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार सीखने में सहायता दे सकते हैं। शिक्षकों को पाठ्य सामग्री तैयार करने और विद्यार्थियों की सीखने संबंधी कठिनाइयों को समझने में भी मदद मिल सकती है।
सरकारी सेवाएं: AI का उपयोग नागरिक सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, दस्तावेजों के विश्लेषण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है। इसके लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है। <Cite refs={[“turn353201search1″,”turn353201search3”]}/>
AI के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा जरूरी
विश्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि AI के लाभ हासिल करने के लिए केवल सॉफ्टवेयर और तकनीकी उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। विश्वसनीय बिजली, तेज इंटरनेट, कंप्यूटिंग संसाधन, स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण डेटा और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी जरूरी है।
यदि किसी क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा कमजोर है या लोगों के पास डिजिटल उपकरण और आवश्यक कौशल नहीं हैं, तो वहां AI के लाभ सीमित रह सकते हैं। इसी तरह, डेटा की गुणवत्ता खराब होने या AI प्रणालियों में पक्षपात होने पर गलत परिणाम सामने आ सकते हैं।
इसलिए सरकारों को डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश के साथ-साथ शिक्षा, कौशल विकास और जिम्मेदार AI उपयोग के लिए स्पष्ट व्यवस्थाएं तैयार करनी होंगी। रिपोर्ट का संदेश है कि AI को विकास का प्रभावी साधन बनाने के लिए तकनीक और संस्थागत तैयारी साथ-साथ चलनी चाहिए। <Cite refs={[“turn353201search1″,”turn353201search3”]}/>
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
भारत में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, तकनीकी प्रतिभा और बड़े IT क्षेत्र के कारण AI के उपयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। देश में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और सरकारी सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के भारतीय लॉन्च के दौरान नीति-निर्माताओं, विकास विशेषज्ञों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों ने AI को समावेशी विकास के लिए बड़े स्तर पर उपयोग करने के तरीकों पर चर्चा की। कार्यक्रम में स्टेट AI शोकेस भी शामिल था, जिसमें विभिन्न राज्यों और नवाचारकर्ताओं ने AI आधारित समाधान प्रस्तुत किए। <Cite refs={[“turn353201search0”]}/>
भारत के लिए प्रमुख चुनौती यह होगी कि AI का लाभ केवल बड़े शहरों और बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे। छोटे कारोबारों, किसानों, विद्यार्थियों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक भी उपयोगी तकनीक पहुंचनी चाहिए। इसके लिए स्थानीय भाषाओं, किफायती समाधानों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी होगा।
AI के साथ जोखिमों पर भी ध्यान देने की जरूरत
AI से मिलने वाले अवसरों के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। गलत जानकारी, डेटा गोपनीयता का उल्लंघन, एल्गोरिदम में पक्षपात, बाजार में कुछ कंपनियों का बढ़ता प्रभाव और कर्मचारियों के कौशल में बदलाव जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
विश्व बैंक की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि AI के लाभ अपने आप सभी तक नहीं पहुंचेंगे। देशों को ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं तैयार करनी होंगी जो नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा का भी ध्यान रखें।
सरकारों, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज के बीच सहयोग से AI के उपयोग को अधिक जिम्मेदार और समावेशी बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष
विश्व बैंक समूह की World Development Report 2026: The Promise of Artificial Intelligence का नई दिल्ली में लॉन्च AI और विकास के संबंधों पर बढ़ते वैश्विक ध्यान को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, विकासशील देश उपलब्ध तकनीक को अपनाकर, उसे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप ढालकर और अपनी क्षमता के अनुसार उन्नत AI विकास की दिशा में बढ़कर बड़ा लाभ हासिल कर सकते हैं।
हालांकि, इस अवसर का लाभ लेने के लिए बिजली, इंटरनेट, कौशल, गुणवत्तापूर्ण डेटा और मजबूत संस्थानों में निवेश आवश्यक होगा। भारत के लिए चुनौती और अवसर दोनों यही हैं कि AI की मदद से सेवाओं और उत्पादकता में सुधार हो तथा तकनीक का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
स्रोत: विश्व बैंक समूह, भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)।






