गुजरात में तैनात होगा स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS अजीत, समुद्री सुरक्षा और तटीय निगरानी को मिलेगी मजबूती ???
ICGS अजीत: गुजरात के ओखा में तैनात होगा स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल...
नई दिल्ली/गुजरात। भारतीय तटरक्षक बल यानी इंडियन कोस्ट गार्ड ने देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। स्वदेशी तकनीक से निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS अजीत को 9 अक्टूबर 2026 को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल किया गया। यह पोत गुजरात के ओखा में तैनात होगा और पश्चिमी समुद्री तट पर निगरानी तथा सुरक्षा संबंधी अभियानों में भूमिका निभाएगा। <Cite refs={[“turn377119news4″,”turn377119news8”]}/>
इस पोत के शामिल होने से तटरक्षक बल को समुद्री क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, आपात स्थिति में सहायता पहुंचाने और तस्करी जैसी गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में अतिरिक्त क्षमता मिलेगी। इसका निर्माण भारत में किया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयासों से भी जुड़ा है।
गोवा शिपयार्ड में शामिल हुआ ICGS अजीत
ICGS अजीत को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) ने तैयार किया है। इसे 9 अक्टूबर को औपचारिक रूप से भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल किया गया। कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के प्रधान एकीकृत वित्तीय सलाहकार डॉ. सिरिश चौधरी ने की। <Cite refs={[“turn377119news4″,”turn377119news5”]}/>
किसी पोत की कमीशनिंग का अर्थ है उसे आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल करना। इसके बाद पोत को निर्धारित परिचालन जिम्मेदारियों के अनुसार तैनात किया जा सकता है। ICGS अजीत को ओखा में तैनात करने की योजना गुजरात के समुद्री क्षेत्र की निगरानी और पश्चिमी तट पर तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता से जुड़ी है।
क्या है फास्ट पेट्रोल वेसल?
फास्ट पेट्रोल वेसल यानी FPV ऐसा गश्ती पोत होता है, जिसे समुद्री क्षेत्रों में निगरानी, गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया जैसे कार्यों के लिए तैयार किया जाता है। भारतीय तटरक्षक बल ऐसे पोतों का इस्तेमाल तटीय सुरक्षा, मछुआरों की सहायता और समुद्र में होने वाली आपात स्थितियों से निपटने के लिए करता है।
ICGS अजीत की प्रमुख जिम्मेदारियों में समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, तस्करी विरोधी कार्रवाई और समुद्री प्रदूषण की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देना शामिल है। इसकी तैनाती से गुजरात के तट और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में तटरक्षक बल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। <Cite refs={[“turn377119news1″,”turn377119news4”]}/>
ICGS अजीत की प्रमुख विशेषताएं
ICGS अजीत आठ पोतों वाली अदम्य श्रेणी (Adamya-class) के कार्यक्रम का सातवां फास्ट पेट्रोल वेसल है। इन पोतों का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा भारतीय तटरक्षक बल की आवश्यकताओं के अनुसार किया जा रहा है।
उपलब्ध प्रकाशित विवरण के अनुसार, ICGS अजीत की लंबाई लगभग 51 से 52 मीटर है और इसका विस्थापन लगभग 320 से 330 टन बताया गया है। विभिन्न रिपोर्टों में तकनीकी आंकड़ों में थोड़ा अंतर मिलता है, इसलिए इन आंकड़ों को अनुमानित समझना चाहिए। पोत में आधुनिक नेविगेशन और नियंत्रण प्रणालियां लगी हैं। <Cite refs={[“turn377119news0″,”turn377119news1”]}/>
इसका स्वदेशी निर्माण भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाने के प्रयासों से जुड़ा है। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की जरूरतों के लिए विभिन्न प्रकार के पोत तैयार करता है।
गुजरात के तट पर क्यों महत्वपूर्ण है तैनाती?
गुजरात का समुद्री तट अरब सागर से लगा हुआ है। इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही, मत्स्य गतिविधियां और समुद्री व्यापार महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में तटीय निगरानी और समुद्र में आपात परिस्थितियों के दौरान त्वरित सहायता उपलब्ध कराना तटरक्षक बल की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
ओखा में तैनात ICGS अजीत अपने निर्धारित परिचालन क्षेत्र में गश्त और निगरानी के कार्यों में सहयोग करेगा। इसकी मदद से समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, संकट में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करने की क्षमता बढ़ सकती है।
हालांकि किसी पोत का वास्तविक परिचालन प्रभाव उसकी तैनाती, उपलब्ध संसाधनों और मिशन संबंधी जिम्मेदारियों पर निर्भर करता है।
समुद्री सुरक्षा में निभाएगा कई भूमिकाएं
ICGS अजीत को विभिन्न प्रकार के समुद्री अभियानों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
1. तटीय निगरानी: समुद्री क्षेत्र में गश्त करके संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सहायता करना।
2. खोज एवं बचाव: समुद्र में संकट में फंसे नाविकों, मछुआरों या अन्य लोगों को सहायता पहुंचाने वाले अभियानों में हिस्सा लेना।
3. तस्करी रोकना: संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करके समुद्र के रास्ते होने वाली अवैध गतिविधियों की रोकथाम में सहयोग करना।
4. समुद्री प्रदूषण पर प्रतिक्रिया: तेल रिसाव या अन्य समुद्री प्रदूषण की घटनाओं के दौरान निगरानी और संबंधित कार्रवाई में सहायता देना।
5. मछुआरों की सुरक्षा: समुद्र में मछली पकड़ने वाले लोगों की सुरक्षा और आपात स्थिति में मदद पहुंचाने से जुड़े कार्यों में सहयोग करना। <Cite refs={[“turn377119news1″,”turn377119search13”]}/>
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा समर्थन
ICGS अजीत का निर्माण भारत में किया जाना रक्षा उत्पादन में स्वदेशी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। देश में जहाज निर्माण परियोजनाएं स्थानीय उद्योग, तकनीकी विशेषज्ञता और आपूर्ति श्रृंखला को भी बढ़ावा देती हैं।
अदम्य श्रेणी के आठ फास्ट पेट्रोल वेसल बनाने की परियोजना इसी प्रयास का हिस्सा है। इन पोतों के जरिए तटरक्षक बल की परिचालन जरूरतों को पूरा करने के साथ घरेलू जहाज निर्माण उद्योग की क्षमता का भी उपयोग किया जा रहा है। <Cite refs={[“turn377119search13″,”turn377119news0”]}/>
निष्कर्ष: स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS अजीत को 9 अक्टूबर 2026 को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया है और इसे गुजरात के ओखा में तैनात किया जाएगा। समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, तस्करी विरोधी कार्रवाई और प्रदूषण संबंधी घटनाओं पर प्रतिक्रिया जैसे कार्यों में इसकी भूमिका होगी। यह पोत भारत की तटीय सुरक्षा और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।
स्रोत: भारतीय तटरक्षक बल, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड और प्रकाशित रक्षा समाचार रिपोर्टें।






