सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की अध्यक्षता में किया न्यायिक कल्याण स्थायी समिति का गठन, जजों के मानसिक स्वास्थ्य पर रहेगा जोर ???

Supreme Court: जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की अध्यक्षता में न्यायिक कल्याण समिति गठित...

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक कल्याण स्थायी समिति (Standing Committee on Judicial Well-being) का गठन किया। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस के.वी. विश्वनाथन करेंगे। इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों के कामकाज से जुड़े तनाव, कार्यभार, मानसिक थकान और कार्य-जीवन संतुलन जैसी चुनौतियों पर संस्थागत स्तर पर काम करना है। <Cite refs={[“turn308017search0”]}/>

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर हुई पहल

न्यायिक व्यवस्था में न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्हें बड़ी संख्या में लंबित मामलों, लंबे कार्य घंटों, जटिल कानूनी सवालों और संवेदनशील मामलों से जुड़े दबावों के बीच निर्णय लेने होते हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक जिम्मेदारियां और उपलब्ध संसाधनों की सीमाएं भी उनके काम को प्रभावित कर सकती हैं।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी समिति गठित की है। इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों के कल्याण से जुड़े मुद्दों की पहचान करना और उनके समाधान के लिए व्यवस्थित कदम सुझाना है। इस पहल में मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत समस्या के बजाय न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता और स्थिरता से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में देखा गया है। <Cite refs={[“turn308017search0”]}/>

जस्टिस के.वी. विश्वनाथन करेंगे समिति की अध्यक्षता

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस के.वी. विश्वनाथन को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, समिति में चार अन्य सदस्य भी शामिल हैं। इनमें शामिल हैं:

  • डॉ. सविता मल्होत्रा — पूर्व डीन, PGIMER चंडीगढ़ तथा मनोचिकित्सा विभाग की प्रोफेसर एवं प्रमुख।
  • रजत मित्रा — मनोवैज्ञानिक तथा स्वंचेतन सोसाइटी फॉर मेंटल हेल्थ के निदेशक एवं सह-संस्थापक।
  • मृणाल कंवर — सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड।
  • आरती सिंह — सुप्रीम कोर्ट के सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग में रजिस्ट्रार (न्यायिक)। <Cite refs={[“turn308017search0”]}/>

समिति में न्यायिक क्षेत्र के साथ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। इससे न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं को समझने और उनके लिए व्यावहारिक उपाय विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

किन मुद्दों पर काम करेगी समिति?

स्थायी समिति न्यायिक अधिकारियों के पेशेवर और व्यक्तिगत कल्याण से जुड़े मौजूदा तथा उभरते मुद्दों की समीक्षा करेगी। इसके प्रमुख कार्यों में संस्थागत स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान, कल्याण संबंधी उपायों के लिए समन्वय, उचित दिशा-निर्देश विकसित करना और लागू पहलों की समय-समय पर समीक्षा करना शामिल है। <Cite refs={[“turn308017search0”]}/>

इन प्रयासों के तहत कार्यभार, काम के लंबे घंटे, मानसिक दबाव, शारीरिक थकान, कर्मचारियों की कमी, बुनियादी सुविधाओं की सीमाएं, स्थानांतरण, प्रशासनिक जिम्मेदारियां और काम तथा निजी जीवन के बीच संतुलन जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा।

शोध के आधार पर तैयार होगी कार्ययोजना

सुप्रीम कोर्ट की यह पहल उसके सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग द्वारा जिला न्यायपालिका में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों के कल्याण से जुड़े विषयों पर किए गए शोध के बाद सामने आई है। इस शोध में न्यायिक सेवा के दौरान सामने आने वाली व्यावसायिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का अध्ययन किया गया।

समिति इन निष्कर्षों के आधार पर न्यायिक अधिकारियों के लिए संस्थागत सहायता और कल्याणकारी उपायों की जरूरतों पर विचार कर सकेगी। इसका उद्देश्य केवल समस्याओं की पहचान करना नहीं, बल्कि ऐसे कदमों को प्रोत्साहित करना भी है जो न्यायिक अधिकारियों को लंबे समय तक स्वस्थ और प्रभावी ढंग से काम करने में सहायता दें। <Cite refs={[“turn308017search0”]}/>

न्याय व्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

न्यायिक अधिकारियों का काम केवल मामलों की सुनवाई और फैसले सुनाने तक सीमित नहीं होता। उन्हें कानून की व्याख्या, साक्ष्यों का मूल्यांकन और कई बार बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में निर्णय लेने होते हैं। लगातार दबाव और अत्यधिक कार्यभार का असर उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ कामकाज पर भी पड़ सकता है।

ऐसे में न्यायिक कल्याण के लिए एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था बनाने से इन समस्याओं पर नियमित रूप से ध्यान देने का अवसर मिलेगा। समिति के माध्यम से विशेषज्ञों और न्यायिक संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा जरूरी सहायता संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करने पर काम किया जा सकता है।

निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट द्वारा जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की अध्यक्षता में न्यायिक कल्याण स्थायी समिति का गठन न्यायिक अधिकारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को संस्थागत प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम कदम है। समिति का काम तनाव, कार्यभार और कार्य-जीवन संतुलन जैसी चुनौतियों की समीक्षा करना तथा न्यायिक अधिकारियों के कल्याण के लिए उपयुक्त उपाय विकसित करने में सहयोग देना होगा।

स्रोत: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 10 अक्टूबर 2026।

Back to top button