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कफ सीरप मामले की जांच करेगी एसआईटी

कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध आपूर्ति का नेटवर्क अन्य राज्यों के साथ ही प्रदेश के 28 से अधिक जिलों में फैला है। कफ सीरप की अवैध आपूर्ति बांग्लादेश व नेपाल तक किए जाने के तथ्य भी सामने आए हैं। इस गंभीर मामले की जांच अब एसआइटी (विशेष जांच दल) करेगी।

प्रमुख सचिव, गृह संजय प्रसाद के अनुसार चूंकि यह मामला कई जिलों व अन्य राज्यों से जुड़ा है, इसलिए जांच के लिए एसआइटी गठित किए जाने का निर्णय किया गया है। आइजी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में एसआइटी जांच करेगी, जिसमें खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।

मामले का मुख्य आरोपित वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल दुबई भाग निकला था। डीजीपी का कहना है कि उसका प्रत्यर्पण कराया जाएगा। उसके दुबई भागने के साक्ष्य मिले हैं। ड्रग्स के मामले में हमारी अंतरराष्ट्रीय संधियां बहुत सख्त हैं।

लोक भवन में प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी राजीव कृष्ण व आयुक्त एफएसडीए रोशन जैकब ने संयुक्त प्रेसवार्ता में यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में इंटरनेट मीडिया पर कई भ्रामक तथ्य भी प्रसारित हो रहे हैं। प्रमुख सचिव गृह ने यह भी साफ किया कि कोल्ड्रिफ सीरप से प्रदेश में एक भी मौत नहीं हुई है।

दरअसल, मध्य प्रदेश में हुई बच्चों की मौतों के मामले को प्रदेश में अवैध कफ सीरप की सप्लाई के मामले से जोड़कर भी कुछ संदेश इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अवैध मादक पदार्थों व ड्रग माफिया के विरुद्ध जीरो टालरेंस की स्पष्ट नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है।

डीजीपी ने बताया कि कफ सीरप मामले में अब तक 28 जिलों में 128 मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। इनमें सर्वाधिक 38 मुकदमे वाराणसी में दर्ज हैं। अब तक तीन सुपरस्टाकिस्ट भोला प्रसाद जायसवाल, विभोर राणा व सौरभ त्यागी समेत 35 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इनसे कफ सीरप की साढ़े तीन लाख बोतलें बरामद हुई हैं।

मुख्य आरोपित शुभम जायसवाल समेत कई अन्य की तलाश की जा रही है। कहा कि बीते दो माह के दौरान एफएसडीए, जिला पुलिस व एसटीएफ ने अभियान के तहत कोडीनयुक्त कफ सीरप व एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण व अवैध डायवर्जन की जांच कर कार्रवाई की जा रही है।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन), मध्य प्रदेश की सूचना पर एफएसडीए मुख्यालय की विशेष टीम ने हिमाचल प्रदेश में दो व उत्तराखंड में कोडीनयुक्त सीरप की निर्माता तीन फर्मों, हरियाणा स्थित निर्माता फर्म के डिपो, रांची (झारखंड) स्थित एक बहुराष्ट्रीय निर्माता फर्म के सुपर स्टाकिस्ट शैली ट्रेडर्स की गहन जांच की।

प्रदेश के 40 जिलों में 300 से अधिक थोक विक्रेताओं की भी जांच की गई। इसमें सामने आया कि कोडीनयुक्त कफ सीरप की आपूर्ति प्रदेश की कुछ फर्मां को लगातार बड़ी मात्रा में की जा रही थी। इनमें कई फर्में एक ही व्यक्ति और उनके करीबियों के नाम दर्ज हैं।

इस सिंडिकेट में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के जरिये लाइसेंस हासिल करने वाले भी शामिल हैं। कई ऐसी फर्जी फर्में भी पाई गईं, जिनका सत्यापन नहीं हो सका। जिन फर्मों के लाइसेंस निरस्त हो चुके थे, उन्हें भी कोडीनयुक्त सीरप की एक से तीन लाख तक बोतलें बेची गईं। कफ सीरप का अवैध डायवर्जन नशे के लिए किए जा रहा था।

लखनऊ, लखीमपुर खीरी, बहराइच व आसपास के जिलों से कफ सीरप की अवैध आपूर्ति नेपाल में तथा वाराणसी, गाजियाबाद व अन्य जिलों से बांग्लादेश में किए जाने की आशंका है। एफएसडीए आयुक्त ने बताया कि 280 दवा कारोबारियों का लाइसेंस निरस्त कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है। कारोबारियों को नोटिस जारी हो चुके हैं।

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