जानलेवा होता जा रहा है टायफाइड! एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर
देश में टायफाइड अब और घातक होता जा रहा है। इसका कारण इसके लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक दवाओं सेफालोस्पोरिन और एजिथ्रोमाइसिन प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाना है। एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर रहीं हैं और बड़ी संख्या में मरीजो को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा है। द लैंसेट की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2023 में देश भर में टायफाइड से 7.3 लाख अस्पताल में भर्ती मामलों में से छह लाख मामले फ्लोरोक्विनोलोन-प्रतिरोध के कारण थे। यह बैक्टीरिया की वह क्षमता है जिससे वे एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव को बेअसर कर देते हैं।
मौतों का बड़ा कारण फ्लोरोक्विनोलोन – प्रतिरोध
रिपोर्ट के अनुसार फ्लोरोक्विनोलोन – प्रतिरोध टायफाइड से संबंधित अस्पताल में भर्ती होने और मौतों का एक बड़ा कारण है, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में और देश के सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में फ्लोरोक्विनोलोन के प्रति प्रतिरोधकता लगातार उच्च स्तर ( 60 प्रतिशत से अधिक) पर बनी रही। यह 1989 से 2024 तक लगातार बढ़ती रही और 2017 में 94 प्रतिशत तक पहुंच गई।
दिल्ली, महाराष्ट्र में अधिक मामले
लंदन स्कूल आफ हाइजीन एंड ट्रापिकल मेडिसिन और भारत के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कालेज के शोधकर्ताओं ने पाया कि दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक में फ्लोरोक्विनोलोन-प्रतिरोधी मामले और मौतों की दर सबसे अधिक थी। इसी वजह से दिल्ली, महाराष्ट्र और कर्नाटक को टायफाइड कंजुगेट वैक्सीन शुरू करने के लिए प्राथमिक राज्यों के रूप में चुना गया है। यह एक खुराक वाली वैक्सीन है जो लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है।
दवाओं की निगरानी जरूरी
टीम ने कहा कि केवल नियमित टीकाकरण कार्यक्रम पर निर्भर रहकर भारत में टायफाइड को तुरंत नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके तहत नौ महीने की उम्र के बच्चों को टायफाइड कंजुगेट वैक्सीन दिया जाता है। इससे बुजुर्गों तक पहुंचने में दशकों लग सकते हैं, जो इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इससे निपटने के लिए रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) को नियंत्रित करने के उपाय आवश्यक हैं। रोगाणुरोधी प्रबंधन कार्यक्रम, संक्रमण की रोकथाम व नियंत्रण रणनीतियां व एएमआर तथा रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग दोनों की बेहतर निगरानी करनी होगी।
टायफाइड बुखार के लक्षण
टायफाइड बुखार एक जीवाणु संक्रमण है जो दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। संक्रमण के एक से तीन सप्ताह बाद लक्षण दिखने लगते हैं, जिनमें तेज बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द और थकान शामिल हैं। एंटीबायोटिक्स और देखभाल से इसका उपचार किया जाता है।

