एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना पकाना इन 5 वजहों से है खतरनाक
हमारे किचन में रोज इस्तेमाल होने वाले बर्तनों में एल्युमिनियम के बर्तन कॉमन हैं। यह हल्के, सस्ते और आसानी से साफ होने वाले होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन बर्तनों में खाना बनाने से आपकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है?
जी हां, लंबे समय तक एल्युमिनियम में बने खाने को खाना आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है और कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं एल्युमिनियम के बर्तनों के खतरे और उनसे बचाव के बारे में।
एल्युमिनियम क्या है?
एल्युमिनियम एक हल्का धातु है, जिसका इस्तेमाल बर्तनों, फॉइल और पैकेजिंग में होता है। जब इसमें खाना पकता है, तो गर्मी और एसिडिक फूड्स जैसे टमाटर, नींबू, दही वगैरह एल्युमिनियम के कणों को खाने में मिला देते हैं।
शरीर को होने वाले नुकसान
दिमाग पर असर- शरीर में एल्युमिनियम की ज्यादा मात्रा अल्जाइमर जैसी मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का कारण बन सकती है।
किडनी को नुकसान- किडनी एल्युमिनियम को फिल्टर करने में कठिनाई महसूस करती है, जिससे धीरे-धीरे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ता है।
हड्डियों की कमजोरी- एल्युमिनियम कैल्शियम एब्जॉर्पशन को रोकता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
पाचन संबंधी समस्या- एल्युमिनियम के बर्तन में बना खाना खाने से गैस, एसिडिटी और पेट दर्द की समस्या हो सकती है।
कैंसर का जोखिम- लंबे समय तक एल्युमिनियम के बर्तन में बनने वाला खाना खाने सेशरीर में टॉक्सिन्स बढ़ सकते हैं, जो कैंसर का कारण भी बन सकते हैं।
किन बर्तनों में बनाना है सुरक्षित?
स्टेनलेस स्टील- ये मजबूत धातु है, इसलिए सेहत के लिए सुरक्षित भी।
कास्ट आयरन (लोहे के बर्तन)- खाना पौष्टिक और आयरन से भरपूर बनाता है।
कांच और मिट्टी के बर्तन- टॉक्सिन-फ्री और नेचुरल होते हैं।
कॉपर (तांबे के बर्तन)- सही तरीके से इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
बचाव के उपाय
एल्युमिनियम के बर्तनों में एसिडिक या खट्टा खाना न पकाएं।
लंबे समय तक एल्युमिनियम फॉइल में खाना स्टोर न करें।
धीरे-धीरे स्टेनलेस स्टील और कास्ट आयरन बर्तनों का इस्तेमाल बढ़ाएं।
एल्युमिनियम कुकर या पैन को खुरच-खुरचकर साफ न करें, क्योंकि इससे धातु जल्दी घुलकर खाने में जा सकती है।
सुविधा और सस्तेपन के कारण एल्युमिनियम के बर्तन हर घर में आम हैं, लेकिन इनके पीछे छिपे स्वास्थ्य खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।