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 कैबिनेट की बैठक आज, आठ लाख शिक्षकों को मिल सकता है कैशलैस चिकित्सा का तोहफा

यूपी: राज्य कर्मचारियों की तरह प्रदेश सरकार शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा का तोहफा देने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी। प्रदेश के करीब 8 लाख से अधिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों को इस योजना का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा लखीमपुर खीरी में नाव पलटने से हुए हादसे से पीड़ित ग्रामीणों को घर देने, आवास विभाग के वाह्य विकास शुल्क प्रणाली में सुधार के लिए ‘उप्र नगर योजना और विकास (विकास शुल्क) उद्ग्रहण, संग्रहण नियमावली,2026’ और उप्र शहरी पुर्नविकास नीति, 2026 को भी मंजूरी दी जा सकती है।

बता दें कि कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते साल के पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के लिए कैशलेश चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। विभाग की ओर से इस योजना को आयुष्मान योजना की तरह लागू करने की तैयारी है। यह सुविधा पूरी तरह कैशलेश है।

स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के भवन निर्माण के लिए 9.92 करोड़ जारी
सरकार ने स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य को गति देने के लिए बड़ी वित्तीय स्वीकृति दी है। बुधवार को जारी दो अलग-अलग शासनादेशों के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में निर्माणाधीन उप निबंधक कार्यालयों एवं रिकॉर्ड रूम के लिए 9.92 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की गई है। शासनादेश के तहत उन्नाव के पुरवा स्थित उप निबंधक कार्यालय तथा चंदौली सदर स्थित उप निबंधक एवं सहायक महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय भवन के लिए 2.89 करोड़ की दूसरी किस्त स्वीकृत की गई है।

इन दोनों परियोजनाओं की कुल पुनरीक्षित लागत 5.81 करोड़ है। दूसरे शासनादेश में उन्नाव (सफीपुर, बांगरमऊ), बाराबंकी (रामसनेही घाट), सुलतानपुर (लंभुआ, जयसिंहपुर), प्रतापगढ़ (कुंडा) तथा बुलंदशहर (खुर्जा) में रिकॉर्ड रूम निर्माण के लिए 7.03 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की गई है। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि जारी धनराशि का उपयोग केवल स्वीकृत कार्यों पर किया जाएगा तथा निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और समय से पूर्ण कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन नए भवनों के निर्माण से स्टाम्प एवं पंजीकरण सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यक्षमता सुधरेगी और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

फरवरी में 10 फीसदी ईंधन अधिभार वसूलने का आदेश, विरोध में याचिका दाखिल
पॉवर कॉर्पोरेशन की ओर से फरवरी में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने के आदेश जारी किया है। यह आदेश जारी होते ही विरोध शुरू हो गया। उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में विरोध प्रस्ताव दाखिल कर उपभोक्ताओं पर भार लादने का आरोप लगाया। परिषद ने पूरे मामले पर विद्युत नियामक आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की। पॉवर कॉर्पोरेशन का दावा है कि नवंबर 2025 में बिजली खरीद की वास्तविक दर 5.79 रुपये प्रति यूनिट रही, जबकि विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत टैरिफ में यह दर 4.94 रुपये प्रति यूनिट है।

इसी अंतर के आधार पर ईंधन अधिभार शुल्क लगाकर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली का आदेश जारी किया गया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बुधवार को नियामक आयोग में विरोध प्रस्ताव दाखिल किया। इसमें उन्होंने मांग की है कि नवंबर जैसे सामान्य मांग वाले महीने में इतनी महंगी बिजली खरीद पूरी तरह से संदेहास्पद है। मई 2025, जब प्रदेश में भीषण गर्मी, बिजली संकट और रिकॉर्ड मांग थी, उस समय भी पॉवर कॉर्पोरेशन ने बिजली 4.76 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी थी। उन्होंने नवंबर 2025 में की गई बिजली खरीद की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने और ईंधन अधिभार शुल्क के नाम पर की जा रही 10% वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

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