Rajya Sabha Election 2026: 19 उम्मीदवार निर्विरोध सांसद, राज्यसभा में NDA की ताकत बढ़ी, लेकिन एक मोर्चे पर अब भी फंसा पेंच
राज्यसभा चुनाव 2026: 19 निर्विरोध सांसद, NDA की बढ़ी ताकत, जानें पूरा गणित
राज्यसभा चुनाव 2026: वोटिंग से पहले ही साफ हुई तस्वीर, 19 उम्मीदवार निर्विरोध बने सांसद
राज्यसभा चुनाव 2026 में मतदान से पहले ही सियासी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। 18 जून को होने वाली वोटिंग से पहले 24 सीटों में से 19 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बड़ा राजनीतिक फायदा मिला है, जबकि कांग्रेस और INDIA गठबंधन को सीमित सफलता मिली है।
राज्यसभा के इस चुनाव को केवल सीटों की संख्या के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे संसद के उच्च सदन में राजनीतिक ताकत के नए समीकरण के रूप में भी देखा जा रहा है।
24 सीटों का क्या है पूरा गणित?
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक जून 2026 में विभिन्न राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 19 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं।
- NDA के खाते में 19 सीटें।
- कांग्रेस के खाते में 5 सीटें।
- कई राज्यों में उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर रहने के कारण मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।
NDA को कैसे मिला फायदा?
इस चुनाव में NDA ने कई राज्यों में अपनी मजबूत संगठनात्मक और विधायी स्थिति का फायदा उठाया। खासकर:
- मध्य प्रदेश
- आंध्र प्रदेश
- अरुणाचल प्रदेश
- मणिपुर
जैसे राज्यों में NDA उम्मीदवार निर्विरोध जीतने में सफल रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नतीजों से राज्यसभा में NDA की स्थिति और मजबूत होगी, जिससे भविष्य में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सरकार को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है।
कांग्रेस को कहां मिली सफलता?
कांग्रेस भी पांच सीटें सुरक्षित करने में कामयाब रही। राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों में पार्टी के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए।
हालांकि, विपक्ष के लिए यह चुनाव मिश्रित परिणाम लेकर आया है क्योंकि कई राज्यों में संख्या बल की कमी साफ दिखाई दी।
कहां फंसा पेंच?
राज्यसभा चुनाव का सबसे बड़ा विवाद मध्य प्रदेश की तीसरी सीट को लेकर सामने आया। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर विवाद खड़ा हुआ और मामला कानूनी बहस तक पहुंच गया।
कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया, जबकि भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया।
इसके अलावा कुछ राज्यों में विपक्षी दलों के बीच रणनीतिक तालमेल भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
राज्यसभा में NDA की ताकत कितनी बढ़ेगी?
राज्यसभा में बहुमत का आंकड़ा 123 सदस्यों का होता है। NDA पहले से ही उच्च सदन में मजबूत स्थिति में है और इन चुनावों के बाद उसकी संख्या में और इजाफा होने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सरकार को आगामी विधेयकों और महत्वपूर्ण सुधारों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
क्यों अहम है यह चुनाव?
राज्यसभा के चुनाव सीधे जनता नहीं बल्कि संबंधित राज्यों के विधायक करते हैं। कई बार विधानसभा में बहुमत रखने वाली पार्टी आसानी से राज्यसभा सीटें जीत लेती है।
इस बार भी कई राज्यों में संख्या बल इतना स्पष्ट था कि मुकाबले की नौबत ही नहीं आई और उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
राजनीतिक संदेश क्या है?
- NDA ने कई राज्यों में अपना राजनीतिक वर्चस्व कायम रखा।
- कांग्रेस ने कुछ राज्यों में अपनी उपस्थिति बनाए रखी।
- विपक्षी एकजुटता की परीक्षा अभी जारी है।
- राज्यसभा में सरकार की स्थिति और मजबूत होने के संकेत मिले हैं।
आने वाले महीनों में संसद के मानसून और शीतकालीन सत्र के दौरान इन नए समीकरणों का असर महत्वपूर्ण विधायी कार्यों पर देखने को मिल सकता है।





