चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी! रूस के इस ‘सीक्रेट खजाने’ पर टिकी भारत की नजर, ड्रैगन की बादशाहत को मिल सकती है चुनौती

चीन पर अपनी रणनीतिक निर्भरता कम करने के लिए भारत अब एक बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। भारत की नजर रूस के साइबेरिया में मौजूद दुनिया के सबसे बड़े रेयर अर्थ (Rare Earth) खनिज भंडारों में से एक टॉमटोर (Tomtor) डिपॉजिट पर है। माना जा रहा है कि अगर भारत इस परियोजना में सफल साझेदारी कर लेता है तो इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और हाई-टेक उद्योगों के लिए चीन पर उसकी निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।
हाल ही में आई रिपोर्टों के मुताबिक भारत की सरकारी कंपनी IREL (India) Limited रूस की तेल कंपनी Rosneft के साथ बातचीत कर रही है। भारत सबसे पहले इस खदान से रेयर अर्थ खनिजों के नमूने हासिल करना चाहता है ताकि उनकी गुणवत्ता और व्यावसायिक उपयोगिता का परीक्षण किया जा सके।
आखिर क्या हैं रेयर अर्थ मिनरल्स?
रेयर अर्थ तत्व 17 खास धातुओं का समूह हैं, जिनका इस्तेमाल आधुनिक तकनीक की रीढ़ माना जाता है। इनका उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होता है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के मोटर
- मोबाइल और लैपटॉप
- मिसाइल और लड़ाकू विमान
- रडार सिस्टम
- विंड टर्बाइन
- सेमीकंडक्टर चिप
- मेडिकल उपकरण
- रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
वैश्विक स्तर पर इन खनिजों की प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार रेयर अर्थ रिफाइनिंग और मैग्नेट निर्माण में चीन की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से ज्यादा है।
क्यों बढ़ी भारत की चिंता?
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनाव बढ़े हैं। वहीं चीन ने कई बार महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण की नीति अपनाई है। इससे भारत सहित कई देशों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा उत्पादन और सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में रेयर अर्थ खनिजों की स्थिर आपूर्ति राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए जरूरी हो गई है।
रूस का ‘सीक्रेट खजाना’ क्यों खास?
साइबेरिया स्थित टॉमटोर डिपॉजिट को दुनिया के सबसे बड़े अविकसित रेयर अर्थ भंडारों में गिना जाता है। इसमें कई ऐसे महत्वपूर्ण तत्व मौजूद हैं जिनकी वैश्विक बाजार में भारी मांग है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना का सफल विकास होता है तो वैश्विक रेयर अर्थ बाजार में चीन की एकाधिकार स्थिति को चुनौती मिल सकती है। भारत के लिए यह एक दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश साबित हो सकता है।
सिर्फ रूस नहीं, पूरी दुनिया में तलाश
दिलचस्प बात यह है कि भारत का मिशन सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है। सरकार ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, अर्जेंटीना, मलावी और अन्य देशों के साथ भी महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर काम कर रही है।
हाल ही में ब्राजील भी भारत के लिए रेयर अर्थ का बड़ा संभावित साझेदार बनकर उभरा है। वहीं घरेलू स्तर पर आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और केरल में रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं।
भारत के पास भी है बड़ा भंडार
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास रेयर अर्थ संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन चुनौती उनकी प्रोसेसिंग और उच्च गुणवत्ता वाली रिफाइनिंग तकनीक की है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।
क्या चीन को लगेगा बड़ा झटका?
अगर भारत रूस समेत अन्य देशों के साथ मजबूत सप्लाई चेन विकसित कर लेता है और घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ा देता है, तो आने वाले वर्षों में चीन पर उसकी निर्भरता काफी कम हो सकती है। इससे न केवल भारत की औद्योगिक और रक्षा क्षमता मजबूत होगी बल्कि वैश्विक रेयर अर्थ बाजार में भी शक्ति संतुलन बदल सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि खनन से लेकर रिफाइनिंग और मैग्नेट निर्माण तक एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने में कई साल लग सकते हैं। लेकिन भारत की मौजूदा रणनीति को चीन की वैश्विक पकड़ को चुनौती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





