West Bengal GI Tag News: 23 नए GI टैग उत्पादों के साथ पश्चिम बंगाल बना भारत का तीसरा सबसे अधिक GI टैग वाला राज्य

23 नए GI टैग से पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक उपलब्धि, अब भारत का तीसरा सबसे अधिक GI टैग वाला राज्य

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23 नए GI टैग से पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक उपलब्धि, अब भारत का तीसरा सबसे अधिक GI टैग वाला राज्य

कोलकाता से आई बड़ी खुशखबरी

पश्चिम बंगाल ने भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 23 नए पारंपरिक उत्पादों के लिए GI टैग प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के साथ राज्य अब कुल 59 GI टैग प्राप्त उत्पादों के साथ भारत का तीसरा सबसे अधिक GI टैग वाला राज्य बन गया है।

यह उपलब्धि केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों किसानों, बुनकरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिलेगी।


क्या होता है GI टैग?

GI (Geographical Indication) टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है जिसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषता किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है।

GI टैग मिलने के बाद—

  • नकली उत्पादों पर रोक लगती है।
  • असली उत्पाद की पहचान सुरक्षित रहती है।
  • निर्यात की संभावनाएं बढ़ती हैं।
  • स्थानीय कारीगरों और किसानों की आय में वृद्धि होती है।
  • पारंपरिक कला एवं संस्कृति को संरक्षण मिलता है।

23 नए GI टैग मिलने से क्या बदला?

हाल ही में पश्चिम बंगाल के 23 पारंपरिक उत्पादों को GI टैग प्रदान किया गया। इनमें राज्य की प्रसिद्ध मिठाइयाँ, हस्तशिल्प, वस्त्र और पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • नोलन गुर (Nolen Gur) से जुड़े उत्पाद
  • शीतलपाटी (Sitalpati)
  • विभिन्न पारंपरिक हस्तशिल्प
  • क्षेत्रीय खाद्य उत्पाद
  • लोक कला आधारित उत्पाद

को विशेष पहचान मिली है। इसके अलावा राज्य के सात अन्य उत्पादों के आवेदन भी विचाराधीन बताए गए हैं।


भारत में पश्चिम बंगाल की नई रैंकिंग

23 नए GI टैग मिलने के बाद पश्चिम बंगाल—

  • भारत का तीसरा सबसे अधिक GI टैग वाला राज्य बन गया है।
  • खाद्य उत्पादों के GI टैग के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल है।
  • राज्य के कुल GI टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या 59 तक पहुंच गई है।

पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध GI टैग उत्पाद

राज्य के कुछ प्रसिद्ध GI उत्पाद हैं—

  • दार्जिलिंग चाय (Darjeeling Tea)
  • बालूचरी साड़ी
  • जयनगर मोआ
  • गोबिंदभोग चावल
  • तुलाईपंजी चावल
  • सुंदरबन शहद
  • तंगाइल साड़ी
  • नक्शी कांथा
  • गरद साड़ी
  • कोरियल साड़ी
  • नोलन गुर आधारित उत्पाद

इन उत्पादों की पहचान अब विश्व स्तर पर और मजबूत होगी।


कारीगरों और किसानों को होगा बड़ा लाभ

GI टैग मिलने से—

  • स्थानीय उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी।
  • नकली उत्पादों की बिक्री कम होगी।
  • निर्यात बढ़ेगा।
  • ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
  • पर्यटन को नई गति मिलेगी।
  • महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी लाभ मिलेगा।

GI टैग क्यों है महत्वपूर्ण?

विशेषज्ञों के अनुसार GI टैग केवल कानूनी सुरक्षा नहीं बल्कि आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

इसके माध्यम से—

  • स्थानीय पहचान सुरक्षित रहती है।
  • विदेशी बाजारों में भरोसा बढ़ता है।
  • उत्पाद का मूल्य बढ़ जाता है।
  • पारंपरिक शिल्प संरक्षित रहते हैं।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

निष्कर्ष

23 नए GI टैग प्राप्त कर पश्चिम बंगाल ने एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक, कृषि और हस्तशिल्प विरासत का प्रमाण दिया है। भारत का तीसरा सबसे अधिक GI टैग वाला राज्य बनना न केवल बंगाल के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह देश के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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