NCERT Class 9 Social Science:- NCERT की कक्षा 9 की Social Science किताब में सेंगोल शामिल, न्यायपूर्ण शासन के प्रतीक के रूप में किया गया उल्लेख ???
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT की नई कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में सेंगोल को शामिल किया गया है...
पुस्तक में सेंगोल को शासन और सुशासन से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया गया है और इसके ऐतिहासिक संदर्भ को चोल काल से जोड़ा गया है।
नई कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भारतीय शासन व्यवस्था और सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों को विस्तार से शामिल किया गया है। इसी क्रम में पुस्तक के ‘Governance and Public Policy’ अध्याय में सेंगोल का भी संदर्भ दिया गया है।
सेंगोल को शासन, न्याय और सुशासन से जुड़े प्रतीक के रूप में समझाने की कोशिश की गई है। इसके ऐतिहासिक संदर्भ में दक्षिण भारत की परंपराओं और चोल काल का उल्लेख किया गया है।
क्या है सेंगोल?
‘सेंगोल’ तमिल परंपरा से जुड़ा एक राजदंड है। इसे शासन की जिम्मेदारी, न्याय और नैतिक प्रशासन के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है।
भारत सरकार ने 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के समय इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सामने रखा था। गृह मंत्रालय के अनुसार, सेंगोल का संबंध तमिल शब्द ‘सेम्मई’ से बताया गया है, जिसका अर्थ नीतिपरायणता या धर्मनिष्ठा से जुड़ा है।
सरकार के आधिकारिक विवरण में सेंगोल को न्यायपूर्ण और निष्पक्ष शासन की जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। इसके शीर्ष पर नंदी की आकृति भी बनी हुई है, जिसे न्याय के प्रतीक के रूप में बताया गया है।
चोल काल से जुड़ा सेंगोल का संदर्भ
NCERT की नई पुस्तक में सेंगोल के ऐतिहासिक संदर्भ को चोल काल से जोड़ा गया है। दक्षिण भारत के इतिहास में चोल शासन को प्रशासन, स्थानीय संस्थाओं और शासन व्यवस्था के अध्ययन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुस्तक में सेंगोल का उल्लेख विद्यार्थियों को शासन की ऐतिहासिक अवधारणाओं और भारतीय परंपराओं में सत्ता तथा जिम्मेदारी के संबंध को समझाने के संदर्भ में किया गया है।
इस तरह सेंगोल को केवल एक ऐतिहासिक वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि शासन और सार्वजनिक जीवन में नैतिक जिम्मेदारी से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
‘Governance and Public Policy’ अध्याय में क्या है?
कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में ‘Governance and Public Policy’ नाम से एक पूरा अध्याय शामिल किया गया है। इसमें भारत में शासन की अवधारणा, सार्वजनिक नीति और प्रशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है।
अध्याय में ऐतिहासिक शासन अवधारणाओं के साथ आधुनिक प्रशासन और सार्वजनिक नीतियों के संदर्भ भी दिए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार इसमें ‘राम राज्य’ को भी शासन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवधारणा के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।
इसी अध्याय में सेंगोल का उल्लेख विद्यार्थियों को शासन के आदर्शों और जिम्मेदार प्रशासन से जोड़ने के लिए किया गया है।
सेंगोल को न्यायपूर्ण शासन से क्यों जोड़ा जाता है?
सेंगोल से जुड़ी परंपरा में राजदंड को शासक की जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि सत्ता के साथ न्यायपूर्ण और जिम्मेदार शासन का दायित्व भी जुड़ा हुआ है।
2023 में संसद भवन में सेंगोल की स्थापना के समय केंद्र सरकार ने भी इसे न्यायपूर्ण और निष्पक्ष शासन के प्रतीक के रूप में बताया था।
NCERT की किताब में इसका संदर्भ इसी व्यापक शासन अवधारणा के तहत दिया गया है।
1947 से भी जुड़ा है सेंगोल
सेंगोल का आधुनिक भारतीय राजनीतिक इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदर्भ 15 अगस्त 1947 से संबंधित है।
सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार, 1947 में सत्ता हस्तांतरण के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सेंगोल सौंपा गया था। 2023 में नए संसद भवन में इसकी स्थापना के दौरान इस इतिहास को फिर से सार्वजनिक चर्चा में लाया गया।
इस ऐतिहासिक संदर्भ के कारण सेंगोल पिछले कुछ वर्षों में भारतीय इतिहास, संस्कृति और शासन से जुड़ी चर्चाओं में प्रमुख प्रतीक बन गया है।
छात्रों के लिए क्या है इसका महत्व?
कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए सामाजिक विज्ञान का विषय केवल इतिहास की घटनाओं को याद करने तक सीमित नहीं है। इसमें शासन, समाज, अर्थव्यवस्था, राजनीति और सार्वजनिक नीति को समझने पर भी जोर दिया जाता है।
सेंगोल के उदाहरण के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि अलग-अलग ऐतिहासिक काल में शासन और शासक की जिम्मेदारी को किस तरह देखा गया।
इसमें न्याय, नैतिकता, जिम्मेदारी और जनसेवा जैसे विचारों को शासन की व्यापक अवधारणा से जोड़कर देखा जा सकता है।
नई NCERT किताबों में बदलाव
कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नए पाठ्यचर्या ढांचे के अनुरूप तैयार की जा रही नई NCERT पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा है।
सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के आधार पर नई पाठ्यपुस्तकों में भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय संदर्भ, समकालीन विषयों और विद्यार्थियों में समझ आधारित सीखने पर ध्यान दिया जा रहा है।
नई किताब में शासन और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों को ऐतिहासिक संदर्भों के साथ जोड़ने की कोशिश भी इसी बदलाव का हिस्सा है।
सेंगोल पर पहले भी रही है चर्चा
सेंगोल को लेकर पिछले कुछ वर्षों में देश में काफी चर्चा हुई है। विशेष रूप से 2023 में नए संसद भवन में इसकी स्थापना के बाद इसके इतिहास, तमिल परंपरा और राजनीतिक-सांस्कृतिक महत्व पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं सामने आईं।
अब कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में इसके संदर्भ को शामिल किए जाने से यह विषय विद्यार्थियों के अध्ययन का भी हिस्सा बन गया है।
हालांकि सेंगोल के ऐतिहासिक विवरण और 1947 के सत्ता हस्तांतरण से जुड़े कुछ पहलुओं को लेकर सार्वजनिक विमर्श में अलग-अलग ऐतिहासिक व्याख्याएं भी सामने आई हैं। इसलिए विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तक के विवरण के साथ इतिहास के अन्य प्राथमिक और विश्वसनीय स्रोतों को भी समझना उपयोगी होगा।
निष्कर्ष
NCERT की नई कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान की किताब में सेंगोल को शासन और सुशासन से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में शामिल किया गया है। इसके संदर्भ को चोल काल की परंपराओं से जोड़ा गया है और इसे न्यायपूर्ण शासन, नैतिकता तथा शासकीय जिम्मेदारी की अवधारणा से समझाया गया है।
सेंगोल का आधुनिक संदर्भ 1947 और नए संसद भवन में 2023 में इसकी स्थापना से भी जुड़ा है। नई NCERT पुस्तक में इसके शामिल होने से भारतीय शासन और ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़े इस प्रतीक को अब स्कूली सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में भी स्थान मिला है।






