इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड में भारत का शानदार प्रदर्शन, 4 स्वर्ण समेत जीते 5 पदक ???
इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड में भारत ने जीते 4 स्वर्ण समेत 5 पदक...
नई दिल्ली। भारत ने 19वें इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑन एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IOAA) 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 5 पदक अपने नाम किए हैं। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में चार स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। खास बात यह रही कि भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी पांच छात्रों ने पदक हासिल किया।
हनोई में हुआ अंतरराष्ट्रीय मुकाबला
19वां IOAA 2026 25 सितंबर से 5 अक्टूबर तक वियतनाम की राजधानी हनोई में आयोजित किया गया। इस प्रतियोगिता में दुनिया के अलग-अलग देशों के प्रतिभाशाली छात्रों ने खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी से जुड़े सवालों और व्यावहारिक परीक्षणों में हिस्सा लिया।
इस बार प्रतियोगिता में 64 देशों के 307 छात्रों ने भाग लिया। प्रतिभागियों की संख्या और देशों की भागीदारी के लिहाज से यह IOAA का अब तक का सबसे बड़ा संस्करण रहा।
इन भारतीय छात्रों ने जीते पदक
भारतीय टीम के चार छात्रों ने स्वर्ण पदक, जबकि एक छात्र ने रजत पदक हासिल किया।
- प्रांजल दीक्षित — हैदराबाद, तेलंगाना — स्वर्ण पदक
- सुमंत गुप्ता — दिल्ली — स्वर्ण पदक
- अक्षत श्रीवास्तव — गुरुग्राम, हरियाणा — स्वर्ण पदक
- अर्णव सहरावत — फरीदाबाद, हरियाणा — स्वर्ण पदक
- हर्षिल अमितकुमार पटेल — वडोदरा, गुजरात — रजत पदक
इस तरह भारतीय दल के सभी पांच सदस्यों का प्रदर्शन पदक जीतने वाला रहा।
पदक तालिका में भारत संयुक्त तीसरे स्थान पर
चार स्वर्ण पदकों के साथ भारत वियतनाम के साथ संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहा। भारत से आगे ईरान और दक्षिण कोरिया रहे, जिन्होंने पांच-पांच स्वर्ण पदक जीते।
IOAA 2026 में कुल 51 स्वर्ण, 48 रजत और 60 कांस्य पदक प्रदान किए गए।
थ्योरी के साथ ऑब्जर्वेशन और डेटा एनालिसिस की परीक्षा
IOAA केवल किताबी ज्ञान पर आधारित प्रतियोगिता नहीं है। इसमें छात्रों की खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी की समझ के साथ-साथ वैज्ञानिक विश्लेषण और अवलोकन क्षमता की भी परीक्षा होती है।
प्रतियोगिता में थ्योरी का योगदान 50 प्रतिशत, जबकि ऑब्जर्वेशन और डेटा एनालिसिस का योगदान 25-25 प्रतिशत रहा। इससे छात्रों की वैज्ञानिक समस्या-समाधान क्षमता का भी आकलन किया गया।
भारत के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
IOAA 2026 का परिणाम भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस साल भारत के सभी वरिष्ठ स्तर के अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में हिस्सा लेने वाले छात्रों ने कम से कम स्वर्ण या रजत पदक हासिल किया।
गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और खगोल विज्ञान के पांचों अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में इस साल कुल 24 भारतीय छात्रों ने हिस्सा लिया। इनमें 16 ने स्वर्ण और 8 ने रजत पदक जीते। यह भारत के अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
खगोल विज्ञान में भारत का मजबूत प्रदर्शन
भारत ने वर्ष 1999 से Astronomy Olympiad में भाग लेना शुरू किया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान ओलंपियाड में भाग लेने वाले भारतीय प्रतिभागियों में करीब 49 प्रतिशत ने स्वर्ण, 35 प्रतिशत ने रजत और 13 प्रतिशत ने कांस्य पदक हासिल किया है।
पिछले पांच वर्षों में भी भारतीय प्रतिभागियों का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है और सभी भारतीय प्रतिभागियों ने स्वर्ण या रजत पदक जीता है।
क्या है IOAA?
International Olympiad on Astronomy and Astrophysics (IOAA) स्कूली स्तर के छात्रों के लिए आयोजित होने वाली एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक प्रतियोगिता है। इसका उद्देश्य छात्रों में खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी और STEM विषयों के प्रति रुचि बढ़ाना तथा वैज्ञानिक सोच और समस्या-समाधान क्षमता को प्रोत्साहित करना है।
भारत में इस प्रतियोगिता के लिए छात्रों के चयन और प्रशिक्षण में होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन (HBCSE-TIFR) की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस वर्ष भारतीय टीम के साथ TIFR की प्रोफेसर भास्वती मुखर्जी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के प्रोफेसर संवेड़ कोलेकर टीम लीडर के रूप में शामिल थे।
भारत के पांचों छात्रों द्वारा पदक जीतना देश में विज्ञान और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उभरती प्रतिभाओं के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस परिणाम ने 2026 के अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारत के शानदार प्रदर्शन को और मजबूत किया है।






