वाराणसी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन, भारत-जापान की दोस्ती और शिंजो आबे की यादों को मिला सम्मान ???
वाराणसी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन, भारत-जापान मित्रता को मिला सम्मान...

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भारत और जापान के बीच मजबूत होते संबंधों की एक महत्वपूर्ण झलक देखने को मिली। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में दिवंगत जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृति में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे मौजूद रहीं। यह कॉरिडोर दोनों देशों के बीच मित्रता, सांस्कृतिक जुड़ाव और कूटनीतिक संबंधों को समर्पित है।
शिंजो आबे की यादों को समर्पित है मेमोरियल कॉरिडोर
मेमोरियल कॉरिडोर का उद्देश्य जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोना और भारत-जापान संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान को याद करना है। शिंजो आबे ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी।
इस कॉरिडोर में तस्वीरों के माध्यम से भारत-जापान संबंधों के महत्वपूर्ण पड़ावों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें दिसंबर 2015 में शिंजो आबे की वाराणसी यात्रा से जुड़ी यादें भी शामिल हैं, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काशी में गंगा आरती में हिस्सा लिया था।
उद्घाटन समारोह में भावुक हुईं अकी आबे
कार्यक्रम के दौरान शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने पति की स्मृति में कॉरिडोर बनाए जाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
अकी आबे ने वाराणसी आने की अपनी इच्छा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके पति ने वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी की यात्रा की थी और यहां की गंगा आरती में शामिल हुए थे। अब स्वयं वाराणसी पहुंचकर उन्होंने उस शहर और उसकी परंपराओं को करीब से देखने का अपना सपना पूरा किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत-जापान मित्रता को बताया प्रतीक
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच विश्वास, मित्रता और साझा विरासत का प्रतीक है। उन्होंने इसे नई पीढ़ी के लिए एक ऐसी जगह बताया, जहां युवा यह समझ सकते हैं कि दूरदर्शी नेतृत्व किस तरह दो देशों के भविष्य को दिशा दे सकता है।
मुख्यमंत्री ने शिंजो आबे के योगदान को याद करते हुए कहा कि भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शिंजो आबे को वर्ष 2021 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भी है भारत-जापान सहयोग का प्रतीक
वाराणसी का रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भारत और जापान के सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। इस केंद्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में किया था। जापान के सहयोग से निर्मित इस परिसर का उद्देश्य वाराणसी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सम्मेलनों और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को बढ़ावा देना है।
केंद्र की बाहरी दीवारों पर 108 प्रतीकात्मक रुद्राक्षों की संरचना भी आकर्षण का केंद्र है। अकी आबे ने कार्यक्रम के दौरान रुद्राक्ष और जापानी परंपराओं के बीच सांस्कृतिक समानताओं का उल्लेख किया। इस प्रकार, मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन पहले से भारत-जापान सहयोग के प्रतीक रहे इस परिसर को एक नया ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व प्रदान करता है।
वर्ष 2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 साल होंगे पूरे
भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी। वर्ष 2027 में दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे करेंगे। ऐसे समय में शिंजो आबे की स्मृति में कॉरिडोर का उद्घाटन दोनों देशों के लंबे संबंधों और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, परिवहन, बुनियादी ढांचे और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने संबोधन में भारत-जापान साझेदारी के बढ़ते दायरे का उल्लेख किया।
काशी और जापान की सांस्कृतिक विरासत का जुड़ाव
वाराणसी भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नगरी है, जबकि जापान का क्योटो शहर अपनी ऐतिहासिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। शिंजो आबे की वाराणसी यात्रा और गंगा आरती में उनकी भागीदारी दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव की यादगार घटनाओं में शामिल है।
आबे मेमोरियल कॉरिडोर इसी ऐतिहासिक जुड़ाव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। यहां प्रदर्शित तस्वीरों और ऐतिहासिक प्रसंगों के जरिए लोग भारत-जापान संबंधों के विकास तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच रहे व्यक्तिगत संबंधों को समझ सकेंगे।
निष्कर्ष: वाराणसी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन भारत और जापान की मित्रता को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है। यह कॉरिडोर शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग की कहानी को भी सामने लाता है।





