जयपुर में WWF ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन, भूपेंद्र यादव ने दिया संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग का संदेश ???

जयपुर में WWF ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन, भूपेंद्र यादव ने दिया बड़ा संदेश...

जयपुर, 21 सितंबर 2026: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के जयपुर में World Wide Fund for Nature (WWF) की ग्लोबल कंजर्वेशन कॉन्फ्रेंस 2026 का उद्घाटन किया। सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और संरक्षण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।

स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर जोर

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संरक्षण की नीतियों और कार्यक्रमों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने संरक्षण के क्षेत्र में सफल पहलों से सीख लेने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की जरूरत बताई। उन्होंने वन्यजीवों के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास, घासभूमि और आर्द्रभूमि के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया।

भारत में बढ़े संरक्षित क्षेत्र

भूपेंद्र यादव ने सम्मेलन में भारत में पिछले एक दशक के दौरान संरक्षण के क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या करीब 750 से बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है। इसी अवधि में टाइगर रिजर्व की संख्या 47 से बढ़कर 58, जबकि हाथी रिजर्व की संख्या 30 से बढ़कर 33 हुई है।

भारत में रामसर साइट्स की संख्या भी 24 से बढ़कर 101 हो गई है। ये स्थल अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली आर्द्रभूमियां हैं। मंत्री ने भारत के चीता पुनर्वास कार्यक्रम को भी संरक्षण प्रयासों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

बाघ, हाथी और अन्य प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा

सम्मेलन में भारत में बाघ, हाथी, डॉल्फिन, शेर और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों की वैज्ञानिक निगरानी और जनसंख्या आकलन का भी उल्लेख किया गया। इन अध्ययनों से आवास सुधारने, वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित करने और बड़े भू-दृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाएं तैयार करने में मदद मिलती है।

यादव ने राजस्थान में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम तथा स्थानीय समुदायों द्वारा पवित्र उपवनों ‘ओरण’ के संरक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घासभूमियों का संरक्षण भी वनों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण जितना ही जरूरी है।

एक सीधा वैश्विक संदेश

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने दुनिया भर के संरक्षण विशेषज्ञों से सफल संरक्षण मॉडलों को साझा करने और उन्हें ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संरक्षण केवल चर्चा तक सीमित न रहे, बल्कि सामूहिक प्रयासों के जरिए जमीन पर प्रभावी कार्रवाई में बदले।

जयपुर में आयोजित यह सम्मेलन वैश्विक वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता, प्राकृतिक आवास और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मंच के रूप में सामने आया।

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