लाल सागर शासन और जल अधिकारों पर मिस्र, सूडान, इरिट्रिया व सोमालिया की संयुक्त घोषणा, संप्रभुता पर दिया जोर ???
लाल सागर शासन पर मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया की संयुक्त घोषणा...
नई दिल्ली। मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया ने लाल सागर क्षेत्र में संप्रभुता, क्षेत्रीय स्थिरता और जल अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर साझा रुख सामने रखा है। चारों देशों के नेताओं ने 4 अक्टूबर 2026 को मिस्र के न्यू अल-अलामीन शहर में आयोजित चतुष्कोणीय परामर्श शिखर सम्मेलन के बाद ‘एल-अलामीन संयुक्त घोषणा’ जारी की।
घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून को क्षेत्रीय शांति और सहयोग का आधार बताते हुए राज्यों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया गया। नेताओं ने क्षेत्रीय देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का विरोध किया और विवादों के राजनीतिक एवं शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता बताई।
लाल सागर पर तटीय देशों का अधिकार
संयुक्त घोषणा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लाल सागर के शासन और समुद्री आवाजाही से संबंधित है। चारों देशों ने नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांत की पुष्टि करते हुए कहा कि लाल सागर का शासन वहां के तटीय देशों की विशेष जिम्मेदारी है। इसके साथ ही लाल सागर, अदन की खाड़ी और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सुरक्षा एवं अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब लाल सागर और हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय प्रभाव और समुद्र तक पहुंच को लेकर रणनीतिक महत्व बढ़ा हुआ है। इथियोपिया के समुद्र तक पहुंच की मांग के बीच तटीय देशों ने लाल सागर के शासन को तटीय राज्यों की जिम्मेदारी बताया है।
नील नदी के जल अधिकारों पर भी साझा रुख
चारों देशों ने सीमा पार बहने वाली नदियों, विशेष रूप से नील नदी, से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की बात कही। घोषणा में ‘किसी को नुकसान न पहुंचाने’ के सिद्धांत तथा किसी भी बड़े फैसले से पहले संबंधित देशों को पूर्व सूचना, परामर्श और सहमति की प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
नेताओं ने ऐसे एकतरफा कदमों का विरोध किया जो नील नदी के निचले प्रवाह वाले देशों मिस्र और सूडान के मौजूदा जल उपयोग को प्रभावित कर सकते हैं। यह मुद्दा मिस्र और सूडान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि नील नदी दोनों देशों के लिए जल संसाधन का प्रमुख स्रोत है।
सूडान की एकता और संप्रभुता का समर्थन
घोषणा में चारों देशों ने सूडान की एकता, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संस्थाओं के समर्थन की पुष्टि की। नेताओं ने किसी भी समानांतर सत्ता या समानांतर संस्थाओं की स्थापना को स्वीकार नहीं करने की बात कही।
साथ ही, सूडान में सूडानी नेतृत्व और स्वामित्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का समर्थन किया गया। घोषणा में भाड़े के लड़ाकों को किसी भी तरह का समर्थन देने का भी स्पष्ट विरोध किया गया।
सोमालिया और सोमालीलैंड पर भी रुख स्पष्ट
चारों देशों ने सोमालिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया। घोषणा में सोमालिया के आंतरिक मामलों में किसी भी हस्तक्षेप या ऐसे कदमों का विरोध किया गया, जो उसकी क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा, चारों नेताओं ने सोमालीलैंड को मान्यता देने या उसका समर्थन करने का विरोध किया और इसे सोमालिया की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बताया।
आतंकवाद के खिलाफ सोमालिया के प्रयासों का समर्थन
बैठक में सोमालिया के आतंकवाद विरोधी प्रयासों और देशभर में सरकारी संस्थाओं की क्षमता मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने अफ्रीकी संघ समर्थन एवं स्थिरीकरण मिशन (AUSSOM) के लिए पर्याप्त, टिकाऊ और पूर्वानुमान योग्य अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय वित्तीय सहायता की अपील की।
इसका उद्देश्य सोमालिया में सुरक्षा जिम्मेदारियों के क्रमिक हस्तांतरण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सहायता करना है।
चार देशों के बीच बढ़ेगा समन्वय
शिखर सम्मेलन में मिस्र, सूडान, इरिट्रिया और सोमालिया ने राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। नेताओं ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
चारों देशों ने घोषणा के फैसलों पर नजर रखने के लिए एक फॉलो-अप तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई है। यह तंत्र समय-समय पर और जरूरत पड़ने पर बैठक करेगा, ताकि चारों देशों के बीच परामर्श और समन्वय को आगे बढ़ाया जा सके।
इथियोपिया के लिए क्या मायने?
घोषणा में इथियोपिया का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन लाल सागर के शासन और नील नदी के जल उपयोग से जुड़े प्रावधान क्षेत्रीय संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। इथियोपिया लंबे समय से समुद्र तक पहुंच की आवश्यकता पर जोर देता रहा है, जबकि लाल सागर के तटीय देश समुद्र के शासन में तटीय राज्यों की भूमिका पर बल दे रहे हैं।
इस तरह एल-अलामीन संयुक्त घोषणा ने लाल सागर की समुद्री सुरक्षा, तटीय देशों की भूमिका, राज्यों की संप्रभुता और नील नदी के जल संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर चार देशों के साझा रुख को औपचारिक रूप से सामने रखा है।






