Global Liveability Index 2026: कोपेनहेगन फिर बना दुनिया का सबसे रहने योग्य शहर, वियना दूसरे स्थान पर
Global Liveability Index 2026: कोपेनहेगन बना दुनिया का सबसे रहने योग्य शहर, जानें टॉप-10 शहरों की सूची
कोपेनहेगन ने लगातार दूसरी बार हासिल किया पहला स्थान
दुनिया के सबसे रहने योग्य शहरों की प्रतिष्ठित Global Liveability Index 2026 में डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन (Copenhagen) ने एक बार फिर पहला स्थान हासिल किया है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब कोपेनहेगन ने यह उपलब्धि अपने नाम की है। यह वार्षिक रैंकिंग Economist Intelligence Unit (EIU) द्वारा जारी की जाती है, जिसमें दुनिया के 173 शहरों का जीवन स्तर, सार्वजनिक सुविधाएं और नागरिकों के लिए उपलब्ध बुनियादी सेवाओं का मूल्यांकन किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार कोपेनहेगन ने कुल 98 अंक प्राप्त किए। शहर को स्थिरता (Stability), शिक्षा (Education) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में 100 में 100 अंक मिले, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं और संस्कृति एवं पर्यावरण के क्षेत्र में भी इसे 95 से अधिक अंक प्राप्त हुए। यही कारण है कि यह शहर दुनिया में रहने के लिए सबसे बेहतर माना गया है।
शीर्ष 10 सबसे रहने योग्य शहर (Global Liveability Index 2026)
- Copenhagen (डेनमार्क)
- Vienna (ऑस्ट्रिया)
- Melbourne (ऑस्ट्रेलिया)
- Sydney (ऑस्ट्रेलिया)
- Zurich (स्विट्जरलैंड)
- Geneva (स्विट्जरलैंड)
- Osaka (जापान)
- Adelaide (ऑस्ट्रेलिया)
- Auckland (न्यूजीलैंड)
- Vancouver (कनाडा)
किन आधारों पर होती है रैंकिंग?
EIU का Global Liveability Index पांच प्रमुख मानकों पर शहरों का मूल्यांकन करता है—
- स्थिरता (Stability)
- स्वास्थ्य सेवाएं (Healthcare)
- संस्कृति एवं पर्यावरण (Culture & Environment)
- शिक्षा (Education)
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure)
इन सभी मानकों के आधार पर प्रत्येक शहर को 100 अंकों के पैमाने पर स्कोर दिया जाता है।
कोपेनहेगन की सफलता का राज
कोपेनहेगन को दुनिया के सबसे साइकिल-फ्रेंडली शहरों में गिना जाता है। यहां आधुनिक सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ वातावरण, हरित ऊर्जा, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतरीन शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध है। शहर में अपराध दर भी बेहद कम है, जिससे नागरिकों का जीवन सुरक्षित और संतुलित माना जाता है।
भारतीय शहरों की स्थिति
Global Liveability Index 2026 में भारतीय शहर अभी भी शीर्ष सूची से काफी दूर हैं। रिपोर्ट के अनुसार नई दिल्ली 120वें, मुंबई 121वें, चेन्नई 123वें और बेंगलुरु 127वें स्थान पर रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण, ट्रैफिक, शहरी भीड़, बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव और सार्वजनिक सेवाओं की चुनौतियां भारतीय शहरों की रैंकिंग को प्रभावित करती हैं।
वैश्विक रुझान
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिमी यूरोप के शहर अब भी जीवन गुणवत्ता के मामले में सबसे आगे हैं, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई शहरों ने भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। बेहतर सार्वजनिक परिवहन, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल सेवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं में निवेश ने कई शहरों की रैंकिंग को मजबूत किया है।





