भारत-ब्रिटेन के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास KONKAN-2026 शुरू, समुद्री सुरक्षा और युद्ध कौशल पर रहेगा जोर ???
भारत-ब्रिटेन संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कोंकण 2026 शुरू, समुद्री सुरक्षा पर जोर...

भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास कोंकण-2026 (Exercise KONKAN-26) ब्रिटेन के प्लायमाउथ तट के पास शुरू हुआ। भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट INS त्रिशूल इस अभ्यास में भाग लेने के लिए 11 अक्टूबर 2026 को ब्रिटेन के प्लायमाउथ पहुंचा। भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास 8 से 15 अक्टूबर 2026 तक दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है।
इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना और ब्रिटेन की रॉयल नेवी के बीच तालमेल, समुद्री संचालन क्षमता और आपसी समझ को मजबूत करना है। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभियानों की तैयारी और आधुनिक नौसैनिक तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों का सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है संयुक्त अभ्यास कोंकण-2026?
कोंकण भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं के बीच आयोजित होने वाला द्विपक्षीय समुद्री सैन्य अभ्यास है। इसका उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं को संयुक्त अभियानों के लिए तैयार करना और समुद्र में एक-दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता विकसित करना है।
पिछले दो दशकों में यह अभ्यास आकार और जटिलता के लिहाज से विकसित हुआ है। इसके माध्यम से दोनों नौसेनाओं को अपनी कार्यप्रणाली, संचालन संबंधी अनुभव और समुद्री सुरक्षा से जुड़े बेहतर तरीकों को साझा करने का अवसर मिलता है।
दो चरणों में आयोजित हो रहा है अभ्यास
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कोंकण-2026 को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है।
1. हार्बर फेज (बंदरगाह चरण)
इस चरण में दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों और जवानों के बीच पेशेवर बातचीत, एक-दूसरे के जहाजों का दौरा, खेल गतिविधियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। इसका उद्देश्य आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देना है।
2. सी फेज (समुद्री चरण)
इस चरण में समुद्र में वास्तविक परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास होंगे। इनमें वायु रक्षा, फायरिंग अभ्यास, पनडुब्बी रोधी अभियान, उड़ान संचालन और जटिल नौसैनिक गतिविधियां शामिल हैं।
इन गतिविधियों से दोनों देशों की नौसेनाओं को संयुक्त समुद्री अभियानों में तालमेल और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।
समुद्री सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
आज अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से संचालित होता है। ऐसे में समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना, रणनीतिक क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखना और संभावित खतरों से निपटने की तैयारी करना कई देशों की प्राथमिकता है।
कोंकण-2026 के दौरान वायु, सतह और पानी के नीचे संचालित होने वाले अभियानों से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। पनडुब्बी रोधी अभ्यास, वायु रक्षा और जहाजों के बीच उड़ान संचालन इस प्रशिक्षण के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
इन अभ्यासों का मकसद दोनों नौसेनाओं की संयुक्त परिचालन क्षमता को मजबूत करना और जटिल समुद्री परिस्थितियों में समन्वित कार्रवाई की तैयारी करना है।
भारत-ब्रिटेन रक्षा संबंधों को मिलेगा बढ़ावा
भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, रक्षा तकनीक और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कोंकण-2026 दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत नौसैनिक सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
दोनों देशों ने भारत-ब्रिटेन विजन 2035 के तहत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया है। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित, खुले और स्वतंत्र समुद्रों के साझा लक्ष्य से भी जुड़ा है।
निष्कर्ष
भारत और ब्रिटेन के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कोंकण-2026 दोनों देशों की समुद्री साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 8 से 15 अक्टूबर तक ब्रिटेन के प्लायमाउथ के पास आयोजित इस अभ्यास में INS त्रिशूल की भागीदारी भारत की नौसैनिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग को प्रदर्शित करती है।
इस अभ्यास से दोनों नौसेनाओं को अपनी तकनीक, संचालन संबंधी अनुभव और संयुक्त कार्रवाई की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत तथा ब्रिटेन की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।





