Low Budget Superhit Movies-‘हनुमान अंश’ से पहले कम बजट की इन 5 फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर काटा गदर, हर कोई बन गया था फैन????

कम बजट में बनी इन फिल्मों ने शानदार कहानी और दर्शकों के प्यार के दम पर बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की...

कम बजट में बनी फिल्मों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है बड़े स्टार्स और भारी-भरकम प्रमोशन वाली फिल्मों से मुकाबला करना। लेकिन भारतीय सिनेमा में कई ऐसी फिल्में रही हैं, जिन्होंने साबित किया कि अच्छी कहानी, दमदार कंटेंट और दर्शकों से जुड़ाव हो तो करोड़ों रुपये का बजट जरूरी नहीं है।

हालिया उदाहरण ‘हनुमान अंश’ है। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म ने बेहद कम बजट में रिलीज होकर दर्शकों का ध्यान खींचा है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में फिल्म का बजट करीब 2 करोड़ रुपये और बॉक्स ऑफिस कमाई अलग-अलग चरणों में 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है; 2 सितंबर की एक रिपोर्ट में फिल्म के 54 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है। इसलिए 60 करोड़ का आंकड़ा फिलहाल स्रोतों के हिसाब से अलग-अलग रिपोर्ट हो रहा है।

अब नजर डालते हैं उन 5 फिल्मों पर, जिन्होंने कम बजट के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की।

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1. कांटारा

ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा’ कम बजट में बनी फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है। 2022 में रिलीज हुई इस कन्नड़ फिल्म ने अपनी लोककथा, संस्कृति, एक्शन और शानदार क्लाइमेक्स के दम पर देशभर में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की।

फिल्म का बजट करीब 16 करोड़ रुपये बताया जाता है, जबकि विभिन्न ट्रेड आंकड़ों के अनुसार इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 400 करोड़ रुपये के आसपास रहा।

फिल्म की खास बात यह थी कि शुरुआत में इसे मुख्य रूप से कन्नड़ दर्शकों के लिए बनी फिल्म माना जा रहा था, लेकिन जब इसका हिंदी वर्जन रिलीज हुआ तो इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। हिंदी वर्जन ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और कई बड़ी फिल्मों को चुनौती दी।

क्यों चली?

  • दमदार लोककथा
  • ऋषभ शेट्टी का अभिनय और निर्देशन
  • शानदार क्लाइमेक्स
  • भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी कहानी
  • दर्शकों का मजबूत वर्ड ऑफ माउथ

2. द कश्मीर फाइल्स

‘द कश्मीर फाइल्स’ ने 2022 में बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की थी। विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनके दर्द के इर्द-गिर्द घूमती है।

फिल्म करीब 17 करोड़ रुपये के बजट में बनी बताई गई थी, जबकि बॉक्स ऑफिस पर इसने 340 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की।

शुरुआत में फिल्म का स्क्रीन काउंट और बजट दोनों बड़े स्टार्स वाली फिल्मों की तुलना में काफी छोटा था। लेकिन सोशल मीडिया और दर्शकों की प्रतिक्रिया के कारण फिल्म को लगातार नए दर्शक मिलते गए।

फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसका विषय और दर्शकों के बीच पैदा हुई चर्चा रही।

क्यों चली?

  • संवेदनशील और चर्चित विषय
  • मजबूत कहानी
  • दर्शकों का वर्ड ऑफ माउथ
  • सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा
  • कम बजट में बड़ी कमाई

3. 777 चार्ली

अगर कम बजट की ऐसी फिल्म की बात करें जिसने भावनाओं के दम पर दर्शकों का दिल जीत लिया, तो ‘777 चार्ली’ का नाम जरूर आएगा।

रक्षित शेट्टी स्टारर यह कन्नड़ फिल्म एक इंसान और कुत्ते के बीच विकसित होने वाले बेहद भावुक रिश्ते की कहानी है। फिल्म ने भाषा की सीमाओं को पार करते हुए देशभर के दर्शकों को भावुक किया।

अलग-अलग ट्रेड रिपोर्टों में फिल्म का बजट लगभग 15-20 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि इसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को कई रिपोर्टों में 80 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया।

फिल्म का सबसे बड़ा हथियार इसका इमोशनल कंटेंट था। यही वजह रही कि दर्शकों ने इसे सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव के रूप में देखा।

क्यों चली?

  • इंसान और पालतू जानवर के रिश्ते की कहानी
  • शानदार इमोशनल कनेक्शन
  • बेहतरीन अभिनय
  • मजबूत वर्ड ऑफ माउथ
  • मल्टी-लैंग्वेज दर्शकों तक पहुंच

4. कार्तिकेय 2

साउथ की फिल्मों के हिंदी बेल्ट में बढ़ते प्रभाव का शानदार उदाहरण ‘कार्तिकेय 2’ है।

निखिल सिद्धार्थ स्टारर इस फिल्म में पौराणिक रहस्य, एडवेंचर और रोमांच को मिलाकर कहानी पेश की गई। शुरुआत में फिल्म की चर्चा सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की संख्या बढ़ती गई और हिंदी बेल्ट में भी फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया।

2022 की ट्रेड रिपोर्टों में फिल्म का बजट करीब 30 करोड़ रुपये और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 80 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया था।

फिल्म की कहानी भगवान कृष्ण से जुड़े रहस्य और एक प्राचीन खोज पर आधारित होने के कारण दर्शकों के बीच खास आकर्षण पैदा करने में सफल रही।

क्यों चली?

  • पौराणिकता और एडवेंचर का मिश्रण
  • रहस्य और रोमांच
  • मजबूत कहानी
  • हिंदी दर्शकों में बढ़ती लोकप्रियता
  • दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया

5. तुम्बाड

‘तुम्बाड’ रिलीज के समय भले ही बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी ब्लॉकबस्टर नहीं बनी थी, लेकिन समय के साथ यह भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।

सोहम शाह स्टारर यह हॉरर-फोक फिल्म अपनी कहानी, सिनेमैटोग्राफी, माहौल और विजुअल ट्रीटमेंट के लिए जानी गई। फिल्म करीब 15 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी। शुरुआती रिलीज में इसकी कमाई लगभग 15 करोड़ रुपये रही, लेकिन दोबारा रिलीज के बाद फिल्म ने अपनी कमाई में बड़ा इजाफा किया।

‘तुम्बाड’ की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि फिल्म ने पारंपरिक हॉरर फिल्मों से अलग भारतीय लोककथा और लालच की कहानी को बेहद अनोखे अंदाज में पेश किया।

क्यों बनी कल्ट फिल्म?

  • अनोखी कहानी
  • शानदार सिनेमैटोग्राफी
  • डर और रहस्य का बेहतरीन इस्तेमाल
  • भारतीय लोककथा का प्रभाव
  • दोबारा रिलीज के बाद दर्शकों का जबरदस्त प्यार

‘हनुमान अंश’ ने फिर दिलाई कम बजट फिल्मों की याद

‘हनुमान अंश’ की सफलता ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ बड़े सितारे और सैकड़ों करोड़ रुपये का बजट ही सफलता की गारंटी नहीं है।

फिल्म को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह करीब 2 करोड़ रुपये में तैयार हुई और बिना किसी बड़े स्टार के दर्शकों तक पहुंची। फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित है और अभिनेता शोबिनव सत्य ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है।

दिलचस्प बात यह भी है कि शोबिनव सत्य फिल्म में मुख्य अभिनेता बनने से पहले इसके सेकेंड असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। मुख्य भूमिका के लिए चुने गए अभिनेता के बीमार पड़ने के बाद निर्देशक ने उनका ऑडिशन लिया और उन्हें यह भूमिका मिली।

फिल्म का प्रमोशन भी बड़े बजट की फिल्मों की तरह नहीं हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार निर्माताओं ने बड़े प्रचार अभियान के बजाय कई भंडारों के जरिए फिल्म को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की।

कम बजट, बड़ा कंटेंट और दर्शकों का भरोसा—यही है सफलता का फॉर्मूला?

‘कांतारा’, ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘777 चार्ली’, ‘कार्तिकेय 2’ और ‘तुम्बाड’ जैसी फिल्मों ने अलग-अलग समय पर यह दिखाया है कि दर्शकों को अगर कहानी पसंद आ जाए तो फिल्म का बजट उसकी सफलता की सबसे बड़ी शर्त नहीं रहता।

‘हनुमान अंश’ की मौजूदा सफलता भी इसी ट्रेंड की अगली कड़ी नजर आ रही है। खासकर तब जब फिल्म के सामने बड़े बजट और बड़े सितारों वाली फिल्में मौजूद हों और इसके बावजूद दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंचते रहें।

हालांकि बॉक्स ऑफिस के आंकड़े अलग-अलग ट्रेड स्रोतों में बदल सकते हैं, इसलिए किसी फिल्म के बजट और मुनाफे की तुलना करते समय आधिकारिक निर्माताओं के आंकड़ों को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

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