Northeast Frontier Railway :- ट्रेन से हाथियों की टक्कर रोकने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की पहल, AI अलर्ट सिस्टम और ‘प्लान बी’ से बचीं 255 हाथियों की जान ???

हाथियों को ट्रेन हादसों से बचाएगा AI अलर्ट सिस्टम, प्लान बी से 255 हाथियों की जान बची...

Fencing Of Railway Tracks Only Solution To Avoid Elephant Collision
NFR installs Intrusion Detection System to prevent elephant deaths by trains – Here’s how it works | India News - The Indian Express
Watch: Indian railway company using bee sounds to ward off elephants - UPI.com

पूर्वोत्तर भारत में रेलवे ट्रैक पर हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (Northeast Frontier Railway) ने तकनीक और वन्यजीव संरक्षण के मेल से एक महत्वपूर्ण पहल की है। रेलवे ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अलर्ट सिस्टम और ‘प्लान बी’ जैसी तकनीकों का उपयोग करके हाथियों और ट्रेनों के बीच होने वाली टक्करों को रोकने के प्रयास तेज किए हैं।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के विभिन्न मंडलों में समय पर चेतावनी और बचाव संबंधी कदम उठाकर 255 हाथियों को संभावित ट्रेन हादसों से बचाया गया। इस पहल का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर हाथियों की जान बचाना है, जहां रेलवे लाइनें जंगलों और हाथियों के प्राकृतिक आवास के बीच से गुजरती हैं।

DD India
+1

AI आधारित अलर्ट सिस्टम कैसे करता है काम?

रेलवे ने हाथियों की आवाजाही का पता लगाने के लिए AI-सक्षम इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (Intrusion Detection System यानी IDS) लगाया है। यह सिस्टम डिस्ट्रिब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग (DAS) तकनीक का इस्तेमाल करता है, जिसमें रेलवे ट्रैक के पास बिछी ऑप्टिकल फाइबर के जरिए होने वाले कंपन और ध्वनि संकेतों का विश्लेषण किया जाता है।

सिस्टम में हाथियों की गतिविधियों से जुड़े विशिष्ट संकेतों की पहचान करने की व्यवस्था होती है। जब हाथियों की मौजूदगी या उनकी आवाजाही का पता चलता है, तो लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और नियंत्रण कक्ष को अलर्ट भेजा जा सकता है। इससे रेलवे कर्मचारियों को समय रहते सावधानी बरतने, ट्रेन की गति नियंत्रित करने और जरूरत पड़ने पर अन्य सुरक्षा उपाय करने का अवसर मिलता है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के संवेदनशील स्थानों पर यह सिस्टम 141 रूट किलोमीटर के हिस्से में काम कर रहा है। देश के अन्य रेल क्षेत्रों में भी इसके विस्तार के लिए कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

Press Information Bureau
+1

क्या है ‘प्लान बी’ तकनीक?

Northeast Frontier Railway installs ‘Plan Bee’ system to save elephants from train collisions - India Today

‘प्लान बी’ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य मधुमक्खियों की आवाज के जरिए हाथियों को रेलवे ट्रैक से दूर रखना है। इस तकनीक में ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जो मधुमक्खियों के झुंड की तेज भनभनाहट जैसी आवाज पैदा करते हैं।

हाथी मधुमक्खियों के झुंड और उनके डंक से बचने की स्वाभाविक प्रवृत्ति रखते हैं। इसी व्यवहार का उपयोग करके उन्हें रेलवे लाइन के आसपास से दूर रखने की कोशिश की जाती है। संवेदनशील स्थानों और रेलवे क्रॉसिंग के पास लगाए गए ये उपकरण हाथियों को ट्रैक की ओर आने से रोकने में सहायक हो सकते हैं।

India Today
+1

यहां यह समझना जरूरी है कि AI आधारित IDS और प्लान बी दो अलग-अलग उपाय हैं। AI सिस्टम हाथियों की मौजूदगी का पता लगाकर चेतावनी देने के लिए बनाया गया है, जबकि प्लान बी मधुमक्खियों जैसी आवाज से हाथियों को दूर रखने का प्रयास करता है। दोनों का उद्देश्य रेल हादसों की आशंका कम करना है।

2026 में 255 हाथियों को बचाने में मिली सफलता

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच चार मंडलों में कुल 255 हाथियों को संभावित ट्रेन टक्करों से बचाने में सफलता मिली। मंडलवार आंकड़े इस प्रकार हैं।

DD India
+1

जनवरी–सितंबर 2026 में बचाए गए हाथी

लुमडिंग मंडल

122

अलीपुरद्वार मंडल

106

तिनसुकिया मंडल

15

रंगिया मंडल

14

कुल हाथी

255

इन आंकड़ों से पता चलता है कि लुमडिंग और अलीपुरद्वार मंडलों में सबसे अधिक हाथियों को संभावित हादसों से बचाया गया। इसके पीछे समय पर अलर्ट, रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता और वन विभाग के साथ समन्वय जैसी व्यवस्थाओं की भूमिका रही।

DD India
+1

हाथियों की सुरक्षा के लिए रेलवे के अन्य उपाय

रेलवे ने हाथियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय कई अन्य उपाय भी अपनाए हैं।

  • गति सीमा: हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार ट्रेनों की गति सीमित की जाती है।

  • निगरानी और गश्त: रेलवे कर्मचारी और वन विभाग के अधिकारी हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

  • अंडरपास और रैंप: हाथियों को सुरक्षित तरीके से रेलवे लाइन पार करने या उसके नीचे से निकलने के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

  • चेतावनी बोर्ड: हाथियों के गलियारों में लोको पायलटों को पहले से सतर्क करने के लिए संकेतक लगाए जाते हैं।

  • वन विभाग से संपर्क: हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों के बीच तत्काल समन्वय किया जाता है।

  • खाने के कचरे पर रोक: यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों से पटरियों के पास खाद्य पदार्थों का कचरा नहीं फेंकने की अपील की जाती है, क्योंकि इससे हाथी आकर्षित हो सकते हैं।

    Press Information Bureau
    +1

वन्यजीव संरक्षण में तकनीक की बढ़ती भूमिका

भारत में रेलवे नेटवर्क कई ऐसे क्षेत्रों से गुजरता है, जहां हाथियों और अन्य जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास मौजूद है। ऐसे में रेल परिवहन की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों की रक्षा करना भी एक बड़ी चुनौती है।

AI आधारित पहचान प्रणाली, रियल-टाइम अलर्ट, थर्मल कैमरे और ध्वनि आधारित उपकरण इस चुनौती से निपटने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन तकनीकों की सफलता के लिए नियमित रखरखाव, सही समय पर चेतावनी और ट्रेन कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की यह पहल दिखाती है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक व्यवहार संबंधी जानकारी का एक साथ उपयोग करके वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रयास मजबूत किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने AI आधारित अलर्ट सिस्टम, ‘प्लान बी’ और वन विभाग के सहयोग से हाथियों को ट्रेन हादसों से बचाने के प्रयास तेज किए हैं। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 255 हाथियों को संभावित टक्करों से बचाने की जानकारी सामने आई है। यह पहल रेलवे सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है।

Back to top button