रामचंद्र गुहा ने बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर में लॉन्च की ‘Arguments with Gandhi’, गांधी के विचारों और असहमतियों पर केंद्रित है किताब ???

रामचंद्र गुहा ने लॉन्च की ‘Arguments with Gandhi’, गांधी जयंती पर बेंगलुरु में हुआ पुस्तक विमोचन...

बेंगलुरु: प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर बेंगलुरु के Bangalore International Centre (BIC) में अपनी नई पुस्तक ‘Arguments with Gandhi’ लॉन्च की। इस अवसर पर उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों, उनके समकालीनों के साथ हुए वैचारिक मतभेदों और गांधी की विरासत को लेकर बाद की पीढ़ियों में जारी बहस पर चर्चा की। BIC के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, इसी मौके पर ‘Gandhi’s Long Shadow: Debates about Nonviolence, Justice, Faith, and Progress’ विषय पर गुहा का विशेष सत्र भी आयोजित किया गया।

गांधी के साथ ‘Arguments’ को केंद्र में रखती है किताब

रामचंद्र गुहा की यह पुस्तक महात्मा गांधी को केवल एक निर्विवाद ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में देखने के बजाय उनके विचारों के साथ हुए सहमति और असहमति के संवाद को सामने लाती है। किताब में गांधी के अहिंसा, सामाजिक न्याय, धार्मिक सद्भाव और आर्थिक नीतियों से जुड़े विचारों पर हुई विभिन्न बहसों का अध्ययन किया गया है।

गुहा ने गांधी के विचारों को अलग-अलग वैचारिक धाराओं के संदर्भ में देखने की कोशिश की है। इसमें मार्क्सवादी विचारकों, धार्मिक राष्ट्रवादियों, आंबेडकरवादी चिंतकों और आर्थिक आधुनिकतावादियों की गांधी के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रियाओं और आलोचनाओं पर चर्चा की गई है।

अंबेडकर से लेकर आइंस्टीन और मंडेला तक का संदर्भ

‘Arguments with Gandhi’ में गांधी के विचारों से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कई प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को शामिल किया गया है। इनमें डॉ. बी.आर. आंबेडकर, अल्बर्ट आइंस्टीन, मार्टिन लूथर किंग जूनियर, व्लादिमीर लेनिन, नेल्सन मंडेला, कमलादेवी चट्टोपाध्याय और वी.डी. सावरकर जैसे नाम शामिल हैं।

इन व्यक्तित्वों के जरिए पुस्तक यह समझने की कोशिश करती है कि गांधी के विचारों ने अपने समय की राजनीति और समाज को किस तरह प्रभावित किया और अलग-अलग विचारधाराओं के लोगों ने उनका मूल्यांकन किस प्रकार किया।

1996 में शुरू हुआ था किताब का विचार

रामचंद्र गुहा ने बेंगलुरु में पुस्तक पर चर्चा के दौरान बताया कि इस किताब की जड़ें करीब तीन दशक पुरानी हैं। वर्ष 1996 में जब उन्हें University of California, Berkeley में पढ़ाने का अवसर मिला, तब उन्होंने गांधी को अधिक गहराई से पढ़ने के साथ-साथ बी.आर. आंबेडकर और डी.आर. नागराज के लेखन का भी अध्ययन किया।

इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय में ‘Arguments with Gandhi’ नाम से एक पाठ्यक्रम प्रस्तावित किया था। इसी शुरुआती अकादमिक विचार ने आगे चलकर पुस्तक का रूप लिया।

गांधी की विरासत पर आज भी जारी है बहस

पुस्तक में गांधी के विचारों को आज के समय की कई महत्वपूर्ण चुनौतियों से जोड़कर देखा गया है। इनमें राजनीतिक दमन का विरोध, जाति, लैंगिकता और नस्ल के आधार पर भेदभाव, गरीबी और असमानता तथा पर्यावरणीय संकट जैसे मुद्दे शामिल हैं।

गुहा के अनुसार, गांधी के साथ हुई बहसें केवल उनके समय तक सीमित नहीं हैं। उनकी विचारधारा को लेकर सवाल और असहमतियां आज भी सार्वजनिक जीवन और अकादमिक विमर्श का हिस्सा हैं।

432 पन्नों की है पुस्तक

‘Arguments with Gandhi’ को Fourth Estate India ने प्रकाशित किया है। पुस्तक का पहला प्रकाशन 2 अक्टूबर 2026 को हुआ। यह किताब 432 पन्नों की है और इसकी सूचीबद्ध कीमत 999 रुपये है।

यह पुस्तक गुहा के गांधी पर पहले किए गए व्यापक शोध और लेखन को एक नए दृष्टिकोण से आगे बढ़ाती है। उनके चर्चित कार्यों में ‘India After Gandhi’ और महात्मा गांधी की दो-खंडों वाली जीवनी भी शामिल हैं।

गांधी जयंती पर हुआ विशेष कार्यक्रम

बेंगलुरु इंटरनेशनल सेंटर में पुस्तक लॉन्च के साथ आयोजित चर्चा का शीर्षक ‘Gandhi’s Long Shadow’ रखा गया था। कार्यक्रम में अहिंसा, न्याय, आस्था और प्रगति जैसे विषयों के संदर्भ में गांधी के विचारों पर चर्चा हुई।

BIC के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य गांधी के विचारों को केवल उनके ऐतिहासिक संदर्भ में देखने के बजाय यह समझना भी था कि उनके साथ हुई बहसें आज के समाज के लिए किस तरह प्रासंगिक हो सकती हैं।

पुस्तक क्यों है महत्वपूर्ण?

‘Arguments with Gandhi’ गांधी के व्यक्तित्व और विचारों को एक अलग दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करती है। पुस्तक में गांधी के समर्थकों के साथ-साथ उनके आलोचकों के तर्कों को भी जगह दी गई है। इससे पाठकों को गांधी की विचारधारा को एक व्यापक ऐतिहासिक और वैचारिक संदर्भ में देखने का अवसर मिलता है।

रामचंद्र गुहा का यह नया काम इतिहास, राजनीति, समाज और गांधी के विचारों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुस्तक यह सवाल भी उठाती है कि गांधी के समय की बहसों से आज की दुनिया की चुनौतियों को समझने के लिए क्या सीखा जा सकता है।

Back to top button