नई दिल्ली में शुरू हुआ सागर मंथन 2026, 75 देशों के प्रतिनिधि समुद्री व्यापार और तकनीक पर करेंगे चर्चा ???

नई दिल्ली में शुरू हुआ सागर मंथन 2026, 75 देशों की भागीदारी...

नई दिल्ली। भारत में वैश्विक समुद्री सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘सागर मंथन 2026: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग’ का तीसरा संस्करण 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ। इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संवाद में करीब 75 देशों के 1,200 से अधिक प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और उद्योग जगत के नेताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है। सम्मेलन का आयोजन 7 से 9 अक्टूबर तक किया गया।

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इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) ने संयुक्त रूप से किया। इसका उद्देश्य समुद्री व्यापार, बंदरगाहों के विकास, वैश्विक संपर्क, नई तकनीक और समुद्री पर्यावरण की स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Blue Geographies, New Aspirations: Trade, Technology, and Trust at Sea” रखी गई है। इसका अर्थ समुद्री क्षेत्रों की नई संभावनाओं के साथ व्यापार, तकनीक और समुद्र में आपसी विश्वास को मजबूत करना है।

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सागर मंथन 2026 का उद्देश्य क्या है?

सागर मंथन को वैश्विक समुद्री क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करने वाले एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से सरकारों, बंदरगाह प्राधिकरणों, शिपिंग कंपनियों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक साथ लाकर समुद्र से जुड़े आर्थिक और पर्यावरणीय अवसरों पर चर्चा की जाती है।

इस सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • समुद्री व्यापार को बढ़ावा देना: वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और समुद्री परिवहन को अधिक मजबूत बनाना।

  • ब्लू इकोनॉमी का विकास: समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग करके रोजगार और आर्थिक विकास के अवसर बढ़ाना।

  • समुद्री सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाना।

  • स्वच्छ शिपिंग: जहाजों और बंदरगाहों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपाय तलाशना।

  • तकनीकी नवाचार: समुद्री परिवहन, बंदरगाह प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स में नई तकनीकों को प्रोत्साहित करना।

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सम्मेलन में किन विषयों पर होगी चर्चा?

सागर मंथन 2026 के एजेंडे में पांच प्रमुख विषय शामिल हैं। इनमें वैश्विक संकट के बीच समुद्री व्यापार की सुरक्षा, पर्यावरण के अनुकूल जहाज और जहाज निर्माण, समुद्री संपर्क एवं व्यापार, तटीय समुदायों की आजीविका तथा बंदरगाहों को देश के आंतरिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ना शामिल है।

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इन विषयों पर चर्चा का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र की चुनौतियों के लिए साझा समाधान खोजना है। जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति शृंखला में आने वाली बाधाओं के बीच समुद्री सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सागर मंथन 2026?

भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री परिवहन और बंदरगाहों पर काफी निर्भर करता है। ऐसे में समुद्री संपर्क बेहतर बनाना, बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को प्रोत्साहित करना देश की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।

यह सम्मेलन भारत को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समुद्री नीतियों, निवेश, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण पर सहयोग बढ़ाने का अवसर देता है। इससे भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार में भूमिका मजबूत करने के प्रयासों को भी गति मिल सकती है।

सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ ने इंडिया–EU ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर कोलिशन के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल जैसे स्वच्छ ईंधनों के माध्यम से कम उत्सर्जन वाले समुद्री व्यापार मार्ग विकसित करने की संभावनाओं पर काम करना है।

निष्कर्ष

नई दिल्ली में आयोजित सागर मंथन 2026 वैश्विक समुद्री व्यापार, तकनीकी विकास, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण आयोजन है। करीब 75 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी इस मंच के वैश्विक महत्व को दर्शाती है। भारत के लिए यह सम्मेलन समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए साझेदारी विकसित करने का अवसर है।

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