सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर अदालत के आदेश के बाद बुलडोजर चला। सपा सांसद इकरा हसन को भी सहारनपुर जाने से रोका गया????
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद पर चला बुलडोजर, सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट; जानिए क्या है पूरा विवाद...
Saharanpur Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने शनिवार, 5 सितंबर 2026 को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। इसी बीच सहारनपुर जाने की तैयारी कर रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर दिया। मामले को लेकर इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
तड़के शुरू हुई कार्रवाई, भारी पुलिस बल रहा तैनात
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन ने शनिवार तड़के करीब 4 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई की तैयारी शुरू की और सुबह करीब 6 बजे चार बुलडोजरों के जरिए ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। कलेक्ट्रेट के प्रमुख प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया और बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई। मौके पर पुलिस और आरएएफ समेत बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात रहे।
प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित जमीन को सरकारी भूमि माना गया और मस्जिद के निर्माण को अवैध कब्जा/निर्माण माना गया था।
क्या है पूरा मामला?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस मस्जिद को लेकर लंबे समय से जमीन और निर्माण की वैधता को लेकर विवाद चल रहा था। जुलाई 2026 में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने संबंधित निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा माना था और परिसर खाली करने का आदेश दिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित जमीन खसरा संख्या 539 में करीब 315 वर्ग मीटर बताई गई थी। सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में ढांचे को हटाने के साथ-साथ 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति का भी आदेश दिया गया था।
मस्जिद पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन 4 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। जिला अदालत ने भूमि को सरकारी भूमि माना। इसके अगले ही दिन प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
इकरा हसन को क्यों किया गया हाउस अरेस्ट?
मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी के बाद कैराना से सपा सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस उनके आवास पर पहुंची और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया। इसके बाद सांसद ने आरोप लगाया कि उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है।
इकरा हसन का कहना है कि वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और स्थानीय लोगों की बात प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं। उन्होंने अपने रोके जाने पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर मुद्दा उठाया।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हाउस अरेस्ट को लेकर सांसद की ओर से लगाए गए आरोप और पुलिस/प्रशासन की कार्रवाई की परिस्थितियों को अलग-अलग समझना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में इतना स्पष्ट है कि पुलिस ने उन्हें सहारनपुर जाने से रोका और उनके आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
प्रशासन ने क्या कहा?
प्रशासन का पक्ष है कि मस्जिद से जुड़ा मामला न्यायिक प्रक्रिया से गुजर चुका है। सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद अपील की गई और जिला अदालत ने भी संबंधित जमीन को सरकारी भूमि मानते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने अदालत के आदेश का पालन करते हुए ढांचा हटाया।
सहारनपुर के डीआईजी की ओर से भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सोशल मीडिया पर अफवाहों से बचने की अपील की गई। प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की।
इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई थानों की फोर्स और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की खबर है।
प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई की आलोचना की और इसे सहारनपुर के लिए ‘ब्लैक डे’ बताया। वहीं इकरा हसन ने भी कार्रवाई और उन्हें सहारनपुर जाने से रोके जाने पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी नेताओं की ओर से कार्रवाई की आलोचना के बीच प्रशासन का कहना है कि ध्वस्तीकरण अदालती आदेश के अनुपालन में किया गया है। इसलिए मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ अदालत के आदेश और जमीन के कानूनी दर्जे को समझना भी महत्वपूर्ण है।
करीब डेढ़ साल से चल रहा था विवाद
यह विवाद अचानक शुरू नहीं हुआ था। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मामले की शुरुआत 2025 में हुई थी, जब कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद की जमीन को लेकर शिकायत की गई थी। इसके बाद प्रशासनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। मामला सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचा और जुलाई 2026 में ढांचे को हटाने का आदेश दिया गया।
इसके बाद मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में चुनौती दी। 4 सितंबर को जिला अदालत से भी राहत नहीं मिली और अगले दिन प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी।
Saharanpur Mosque Demolition: एक नजर में
| मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर |
| कार्रवाई | मस्जिद/ढांचे का ध्वस्तीकरण |
| तारीख | 5 सितंबर 2026 |
| आधार | अदालत के आदेश का अनुपालन |
| जमीन को लेकर फैसला | सरकारी भूमि मानी गई |
| पहले आदेश | सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत |
| अपील | जिला अदालत ने 4 सितंबर को खारिज की |
| सपा सांसद | इकरा हसन |
| सांसद की स्थिति | सहारनपुर जाने से रोका गया/हाउस अरेस्ट का दावा |
| सुरक्षा | भारी पुलिस बल और आरएएफ की तैनाती |
निष्कर्ष
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद को लेकर चल रहा लंबे समय का विवाद अब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक पहुंच गया है। 5 सितंबर को प्रशासन ने अदालत के आदेश के बाद ढांचे को हटा दिया, जबकि सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं सपा सांसद इकरा हसन को पुलिस ने उनके आवास पर रोक दिया।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं की ओर से कार्रवाई और सांसद को रोके जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में इस पूरे मामले में आगे की कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और प्रशासन/अदालती कार्रवाई से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मामले से जुड़े दावे और राजनीतिक आरोप संबंधित पक्षों के बयान के रूप में समझे जाने चाहिए।





