PMOS से परेशान महिलाओं के लिए योग फायदेमंद, AIIMS की स्टडी में मिले अच्छे नतीजे ???

PCOS से परेशान महिलाओं के लिए योग बन सकता है मददगार...

महिलाओं में हार्मोन से जुड़ी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। इन्हीं में से एक है PCOS (Polycystic Ovary Syndrome), जिसे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम कहा जाता है। यह समस्या महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। PCOS की वजह से पीरियड्स अनियमित होना, वजन बढ़ना, चेहरे पर मुंहासे, बालों का झड़ना और गर्भधारण में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

इस बीच AIIMS की एक स्टडी में योग को PCOS से जुड़ी समस्याओं के प्रबंधन में मददगार पाया गया है। इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि नियमित योगाभ्यास महिलाओं के तनाव, हार्मोनल स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हो सकता है। ऐसे में जिन महिलाओं को PCOS की समस्या है, उनके लिए योग एक उपयोगी सहायक गतिविधि बन सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि योग PCOS का पूर्ण इलाज नहीं है। इसे डॉक्टर की सलाह, संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर दवाओं के साथ अपनाया जाना चाहिए।

PMOS क्या है और महिलाओं को क्यों होती है यह समस्या?

PMOS यानी Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome को पहले PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) के नाम से जाना जाता था। यह महिलाओं में होने वाली एक जटिल हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या है। इसमें शरीर के हार्मोन, ओवरी और मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकते हैं।

इस समस्या में शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। इसके कारण महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

PMOS के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:

  • पीरियड्स का अनियमित होना या लंबे समय तक न आना।

  • चेहरे, ठोड़ी और शरीर पर अनचाहे बाल बढ़ना।

  • चेहरे पर बार-बार मुंहासे निकलना।

  • तेजी से वजन बढ़ना और पेट के आसपास चर्बी जमा होना।

  • सिर के बाल पतले होना या झड़ना।

  • गर्भधारण करने में परेशानी होना।

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याएं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या को केवल पीरियड्स से जुड़ी परेशानी समझना सही नहीं है। इसका असर महिलाओं के मेटाबॉलिक और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

AIIMS की स्टडी में क्या सामने आया?

AIIMS नई दिल्ली से जुड़े शोधकर्ताओं ने PMOS और योग के प्रभाव को समझने के लिए अध्ययन किया। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित एक शोध में 60 महिलाओं को शामिल किया गया था। इनमें 30 महिलाएं PMOS से पीड़ित थीं, जबकि बाकी 30 महिलाओं को तुलना के लिए शामिल किया गया था।

PMOS से पीड़ित महिलाओं ने विशेषज्ञ की देखरेख में 12 सप्ताह तक योगाभ्यास किया। इसमें तीन प्रमुख गतिविधियां शामिल थीं:

  1. आसन (Yoga Asanas)

  2. प्राणायाम (Breathing Exercises)

  3. ध्यान (Meditation)

अध्ययन के बाद महिलाओं के हार्मोनल स्तर, वजन से जुड़े मापदंडों और लिपिड प्रोफाइल में सकारात्मक बदलाव देखे गए। शोधकर्ताओं ने खून में मौजूद विभिन्न मेटाबोलाइट्स का भी विश्लेषण किया।

शोध में ग्लूकोज, फ्रुक्टोज और कुछ अन्य मेटाबोलाइट्स के स्तर में कमी जैसे बदलाव सामने आए। इससे संकेत मिलता है कि नियमित योग शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

हालांकि, यह अध्ययन सीमित प्रतिभागियों पर किया गया था। इसलिए इसके परिणामों को सभी महिलाओं पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

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योग करने से महिलाओं को कैसे मिल सकता है फायदा?

1. हार्मोनल संतुलन में मदद

PMOS की समस्या में टेस्टोस्टेरोन जैसे एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। इससे चेहरे पर बाल, मुंहासे और पीरियड्स की अनियमितता जैसी परेशानियां होती हैं। AIIMS के शोध में योग के बाद कई हार्मोनल पैरामीटर में सुधार देखा गया। इसलिए योग हार्मोनल स्वास्थ्य के प्रबंधन में सहायक हो सकता है।

2. वजन नियंत्रित रखने में मदद

PMOS से पीड़ित महिलाओं में वजन बढ़ने और पेट के आसपास चर्बी जमा होने की समस्या देखी जा सकती है। नियमित योग शारीरिक गतिविधि बढ़ाता है और वजन प्रबंधन में मदद कर सकता है। इसके साथ संतुलित खानपान अपनाना भी जरूरी है।

3. इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार

PMOS में कई महिलाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होती है। ऐसी स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। नियमित शारीरिक गतिविधि और योग शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

4. तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

हार्मोनल समस्याओं के कारण महिलाओं को तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। प्राणायाम और ध्यान मन को शांत करने, तनाव कम करने और बेहतर नींद में सहायक हो सकते हैं।

5. कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य

AIIMS की स्टडी में योगाभ्यास के बाद लिपिड प्रोफाइल में भी सकारात्मक बदलाव देखे गए। इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल और फैट मेटाबॉलिज्म से जुड़े स्वास्थ्य संकेतकों को बेहतर बनाने में योग की संभावित भूमिका सामने आई है।

PMOS में कौन-कौन से योगासन हो सकते हैं फायदेमंद?

योग विशेषज्ञों की देखरेख में कुछ आसान योगासन अपनी दिनचर्या में शामिल किए जा सकते हैं। ये शरीर को सक्रिय रखने, तनाव कम करने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

1. बद्ध कोणासन (Butterfly Pose)

इस आसन में पैरों के तलवों को आपस में मिलाकर बैठा जाता है। यह कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को लचीला बनाने में मदद करता है।

2. सेतु बंधासन (Bridge Pose)

इसमें पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ते हुए कूल्हों को ऊपर उठाया जाता है। यह शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद करता है।

3. भुजंगासन (Cobra Pose)

इस आसन में पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाया जाता है। इससे पीठ और पेट के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद मिलती है।

4. नौकासन (Boat Pose)

यह आसन पेट और कोर मसल्स को मजबूत करने के लिए किया जाता है। शुरुआत में इसे विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर है।

5. मलासन (Garland Pose)

इसमें उकड़ूं बैठने की मुद्रा बनाई जाती है। यह कूल्हों और पैरों के लचीलेपन को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

6. सूर्य नमस्कार (Sun Salutation)

सूर्य नमस्कार में कई योग मुद्राएं शामिल होती हैं। यह पूरे शरीर की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और वजन प्रबंधन में सहायक हो सकता है।

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योग करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

PMOS से परेशान महिलाओं को योग शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • शुरुआत आसान योगासन और हल्के व्यायाम से करें।

  • अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही योग करें।

  • किसी भी आसन को जबरदस्ती करने से बचें।

  • प्राणायाम और ध्यान को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

  • संतुलित आहार लें और पर्याप्त नींद पूरी करें।

  • यदि कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लें।

सबसे जरूरी बात यह है कि योग को PMOS का अकेला इलाज न समझें। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं या अन्य उपचार अपनी मर्जी से बंद नहीं करने चाहिए। योग को उपचार के साथ एक सहायक जीवनशैली गतिविधि के रूप में अपनाना चाहिए।

क्या योग से PMOS पूरी तरह ठीक हो सकता है?

यह सवाल कई महिलाओं के मन में रहता है। फिलहाल उपलब्ध शोध यह संकेत देते हैं कि योग से PMOS से जुड़े कुछ हार्मोनल, मेटाबॉलिक और मानसिक स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हो सकता है। लेकिन अभी इतने मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं कि योग से यह समस्या पूरी तरह ठीक हो जाती है।

इसलिए महिलाओं को नियमित योग, सही खानपान, वजन प्रबंधन और डॉक्टर की सलाह के साथ अपना उपचार जारी रखना चाहिए।

निष्कर्ष: AIIMS की स्टडी ने PMOS से परेशान महिलाओं के लिए योग की संभावित उपयोगिता को सामने रखा है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान शरीर को स्वस्थ रखने तथा हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के प्रबंधन में मददगार हो सकते हैं। सही दिनचर्या और समय पर चिकित्सकीय सलाह से इस समस्या को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

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