क्या है ताजमहल का ईरान कनेक्शन? अमेरिकी विदेश मंत्री की तारीफ पर तेहरान ने क्यों कसा तंज
ताजमहल का ईरान कनेक्शन क्या है? मार्को रुबियो की तारीफ पर तेहरान का तंज
Taj Mahal Iran connection

ताजमहल को लेकर शुरू हुई नई बहस
दुनिया के सात अजूबों में शामिल Taj Mahal एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। इस बार वजह इसकी खूबसूरती नहीं, बल्कि इसका कथित “ईरान कनेक्शन” है। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने ताजमहल की तारीफ की, जिसके बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। तेहरान ने तंज कसते हुए कहा कि अगर अमेरिकी नेताओं को इतिहास की बेहतर समझ होती, तो वे उस फारसी और ईरानी विरासत की भी सराहना करते, जिसे अमेरिका लंबे समय से निशाना बनाता रहा है।
ईरान की इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठने लगा कि आखिर ताजमहल का ईरान से क्या संबंध है।
ताजमहल और फारसी वास्तुकला का गहरा रिश्ता
इतिहासकारों के अनुसार ताजमहल की वास्तुकला पर फारसी शैली का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। मुगल काल में भारत की कला, संस्कृति और स्थापत्य पर फारसी प्रभाव काफी मजबूत था। ताजमहल का डिजाइन, उसके गुंबद, मेहराबें, बागों की बनावट और नक्काशी में फारसी वास्तुकला की झलक साफ नजर आती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ताजमहल के निर्माण में शामिल कई कलाकार, कारीगर और डिजाइनर फारस यानी आधुनिक ईरान से जुड़े थे। यही वजह है कि इसे मुगल और फारसी स्थापत्य कला का अद्भुत संगम माना जाता है।
मुमताज महल का भी था फारसी संबंध

ताजमहल का ईरान कनेक्शन सिर्फ इसकी वास्तुकला तक सीमित नहीं है। इतिहास के अनुसार Mumtaz Mahal का परिवार भी फारसी मूल से जुड़ा था। मुमताज महल का असली नाम अर्जुमंद बानो बेगम था और उनके पूर्वज फारस से भारत आए थे।
मुगल दरबार में फारसी भाषा और संस्कृति का विशेष प्रभाव था। उस दौर में फारसी भाषा प्रशासन और साहित्य की प्रमुख भाषा मानी जाती थी। यही कारण है कि ताजमहल में फारसी शिलालेख और डिजाइन भी देखने को मिलते हैं।
मार्को रुबियो की तारीफ पर क्यों भड़का ईरान?
भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने ताजमहल की सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व की प्रशंसा की थी। इसके बाद ईरान के कुछ अधिकारियों और मीडिया संस्थानों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ताजमहल की खूबसूरती में फारसी और ईरानी संस्कृति का बड़ा योगदान है।
तेहरान की ओर से तंज कसते हुए कहा गया कि अमेरिका एक तरफ ईरानी विरासत और संस्कृति को निशाना बनाता है, जबकि दूसरी तरफ उसी विरासत से जुड़े स्मारकों की तारीफ करता है। यह बयान अमेरिका और ईरान के लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
ताजमहल: भारतीय विरासत के साथ वैश्विक सांस्कृतिक प्रतीक
हालांकि इतिहासकार यह भी स्पष्ट करते हैं कि ताजमहल भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। इसकी वास्तुकला में फारसी, भारतीय और इस्लामी कला का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। यही वजह है कि ताजमहल सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रेम और स्थापत्य कला के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।

आज भी हर साल लाखों पर्यटक Taj Mahal को देखने के लिए भारत आते हैं। इसकी खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व इसे विश्व स्तर पर खास पहचान दिलाते हैं।





