TMC को एक और बड़ा झटका, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक का इस्तीफा; जानें अब ममता बनर्जी के पास कितने सांसद-विधायक बचे
TMC को एक और झटका, प्रकाश चिक बड़ाइक का इस्तीफा, ममता की बढ़ी मुश्किलें
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पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह एक सप्ताह के भीतर पार्टी के लिए तीसरा बड़ा संसदीय झटका माना जा रहा है। इससे पहले राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर रॉय भी पार्टी से अलग हो चुके हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC की अंदरूनी स्थिति को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
प्रकाश चिक बड़ाइक ने दिया इस्तीफा
राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। बड़ाइक उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्र से आने वाले प्रमुख आदिवासी नेता माने जाते हैं और 2023 में TMC ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।
TMC के लिए लगातार बढ़ रही मुश्किलें
पिछले कुछ दिनों में TMC को कई राजनीतिक झटके लगे हैं। सबसे पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी छोड़ी। इसके बाद सुष्मिता देव ने राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देते हुए कहा कि वह “दो नावों में सवार नहीं रहना चाहतीं”। अब प्रकाश चिक बड़ाइक के इस्तीफे ने पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि पार्टी के कई सांसद अलग राजनीतिक रणनीति पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
अब TMC के पास कितने सांसद और विधायक?
हालिया इस्तीफों के बाद राज्यसभा में TMC की संख्या घट गई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के पास पहले 13 राज्यसभा सांसद थे और लगातार तीन इस्तीफों के बाद यह संख्या कम हो गई है।
वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC अभी भी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी हुई है। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था और सरकार ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही है।
क्या ममता बनर्जी के लिए बढ़ेगी चुनौती?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे TMC के लिए संगठनात्मक चुनौती बन सकते हैं। खासकर राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की भूमिका और संसद में उसकी ताकत पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि TMC का बंगाल में मजबूत जनाधार अभी भी उसके लिए बड़ी ताकत माना जा रहा है।






