धारा 163 BNSS क्या है? CJP के संसद मार्च के बीच नई दिल्ली में लागू, जानिए धारा 144 से कितना अलग है नया कानून
नई दिल्ली में धारा 163 BNSS लागू। जानिए यह क्या है, धारा 144 CrPC से अंतर, लागू होने के कारण और उल्लंघन पर क्या कार्रवाई होगी।
नई दिल्ली में प्रस्तावित CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के ‘संसद मार्च’ से पहले दिल्ली पुलिस ने पूरे नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है और बिना अनुमति किसी भी प्रदर्शन या जुलूस में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही संसद के मानसून सत्र को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।
क्या है धारा 163 BNSS?
धारा 163, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita – BNSS) का प्रावधान है, जिसने 1 जुलाई 2024 से लागू होकर पुराने CrPC की धारा 144 का स्थान ले लिया है। इसका उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों में सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जहां हिंसा, दंगा, अशांति या जन-सुरक्षा को खतरा होने की आशंका हो।
इस धारा के तहत जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट तत्काल आदेश जारी कर सकते हैं ताकि संभावित खतरे को रोका जा सके।
नई दिल्ली में धारा 163 क्यों लागू की गई?
दिल्ली पुलिस के अनुसार CJP द्वारा संसद की ओर प्रस्तावित मार्च के लिए न तो अनुमति मांगी गई और न ही प्रशासन ने कोई अनुमति दी है। ऐसे में संसद सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू की गई है। लोगों को बिना अनुमति किसी भी जुलूस या प्रदर्शन में शामिल न होने की सलाह भी दी गई है।
धारा 163 BNSS के तहत क्या-क्या प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं?
प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार निम्न आदेश जारी कर सकता है—
- किसी क्षेत्र में लोगों की भीड़ या सभा पर रोक।
- जुलूस, प्रदर्शन या रैली पर प्रतिबंध।
- हथियार लेकर चलने पर रोक।
- संवेदनशील क्षेत्रों में आवाजाही सीमित करना।
- सार्वजनिक शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर रोक।
यदि प्रशासन को लगे कि तत्काल कार्रवाई आवश्यक है तो आदेश बिना पूर्व सूचना के भी जारी किया जा सकता है।
धारा 144 CrPC और धारा 163 BNSS में क्या अंतर है?
| धारा 144 CrPC | धारा 163 BNSS |
|---|---|
| आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) का हिस्सा थी। | भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) का हिस्सा है। |
| 1 जुलाई 2024 तक प्रभावी रही। | 1 जुलाई 2024 से लागू है। |
| सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए लागू होती थी। | वही उद्देश्य, लेकिन BNSS के नए ढांचे के अंतर्गत लागू। |
| ब्रिटिश कालीन CrPC का प्रावधान। | नए भारतीय आपराधिक कानून का हिस्सा। |
| मजिस्ट्रेट को प्रतिबंध लगाने की शक्ति। | मजिस्ट्रेट को समान प्रकार की निवारक शक्तियां प्राप्त। |
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, व्यवहारिक रूप से धारा 163 की भूमिका काफी हद तक पूर्व की धारा 144 जैसी ही है, हालांकि अब यह नए आपराधिक कानून BNSS का हिस्सा है।
धारा 163 का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
यदि कोई व्यक्ति धारा 163 के तहत जारी वैध आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें गिरफ्तारी, मुकदमा और परिस्थितियों के अनुसार जुर्माना या कारावास जैसी कानूनी कार्रवाई संभव है। वास्तविक कार्रवाई मामले की प्रकृति और लागू प्रावधानों पर निर्भर करती है।
क्या धारा 163 मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है?
भारत का संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है। सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए सरकार कानून के अनुसार उचित और सीमित प्रतिबंध लगा सकती है। इसी उद्देश्य से धारा 163 का उपयोग किया जाता है।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में लागू की गई धारा 163 BNSS कोई नया प्रतिबंधात्मक विचार नहीं, बल्कि पुराने CrPC की धारा 144 का नया कानूनी स्वरूप है। संसद सत्र और प्रस्तावित CJP संसद मार्च के मद्देनज़र दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया है। आम नागरिकों को प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए और बिना अनुमति किसी भी प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन या जुलूस का हिस्सा बनने से बचना चाहिए।





