US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है????
ईरान के साथ जल्द खत्म होगी अमेरिका की जंग? डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- तेहरान से हो रही डायरेक्ट बात...
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है। ट्रंप ने 16 सितंबर को पत्रकारों से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और अमेरिका को तेहरान से सीधे संपर्क की जानकारी मिली है।
हालांकि, अभी तक किसी अंतिम शांति समझौते या नए युद्धविराम की घोषणा नहीं हुई है। ईरान की ओर से भी अमेरिकी दावे की पुष्टि उस स्तर पर नहीं की गई है, जिस तरह ट्रंप ने इसे पेश किया है।
ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका-ईरान युद्ध अब खत्म होने के करीब है। ईरान के साथ संभावित समझौते के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ईरान डील करना चाहता है और यह भी दावा किया कि अमेरिका को ईरान की ओर से सीधे संपर्क मिला है।
ट्रंप ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि सीधे संपर्क किस स्तर पर हुआ, किन अधिकारियों के बीच बातचीत हुई या किसी संभावित समझौते की शर्तें क्या हैं।
इसलिए फिलहाल ट्रंप का बयान कूटनीतिक गतिविधियों का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसे युद्ध समाप्त होने की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।
ईरान का रुख अमेरिका के दावे से अलग
ईरान की ओर से बातचीत को लेकर अब तक अधिक सावधानी दिखाई गई है। 15 सितंबर को ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक बातचीत नहीं होगी। ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी मांगें रखी हैं।
यानी वॉशिंगटन की ओर से बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत और तेहरान की ओर से शर्तों पर जोर—दोनों बातें एक साथ सामने आ रही हैं।
ईरानी विदेश मंत्री ने चीन में की अहम मुलाकात
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चीन में विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। चीन ने अमेरिका और ईरान से संयम बरतने, जून में हुए अंतरिम शांति समझौते की दिशा में लौटने और सार्थक बातचीत शुरू करने की अपील की।
अराघची ने ईरान की संप्रभुता की रक्षा की बात दोहराई और साथ ही ऐसे कूटनीतिक रास्तों के लिए खुले रहने का संकेत दिया, जिनसे ईरानी लोगों के अधिकार और हित सुरक्षित रहें।
क्या सच में खत्म होने वाला है अमेरिका-ईरान युद्ध?
फिलहाल इसका निश्चित जवाब देना जल्दबाजी होगी। ट्रंप ने युद्ध के खत्म होने की उम्मीद जताई है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार तत्काल युद्ध समाप्त होने का कोई औपचारिक समझौता सामने नहीं आया है।
अमेरिका की तरफ से कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ने के संकेत जरूर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। बैठक में युद्ध के बाद की रणनीति और क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।
GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी बड़ा मुद्दा
अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग में व्यवधान से तेल और गैस की सप्लाई तथा वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी ईरान-अमेरिका तनाव कम करने और होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
यही वजह है कि संभावित कूटनीतिक समाधान पर अमेरिका, ईरान के अलावा खाड़ी देशों और चीन जैसे देशों की भी नजर बनी हुई है।
अमेरिका की बातचीत में क्या प्राथमिकताएं हैं?
ट्रंप ने युद्ध के दौरान ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना अमेरिकी उद्देश्यों में से एक बताया है। दूसरी ओर, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बताता रहा है। इस मुद्दे के अलावा प्रतिबंध, सैन्य कार्रवाई, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक नुकसान भी संभावित बातचीत के अहम विषय हो सकते हैं।
इसलिए यदि दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता आगे बढ़ती है तो केवल युद्धविराम ही नहीं, बल्कि कई व्यापक मुद्दों पर सहमति बनाने की जरूरत होगी।
ईरान के सामने भी आर्थिक और रणनीतिक दबाव
लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने ईरान की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिति पर दबाव बढ़ाया है। दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए भी युद्ध की लंबी अवधि, ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
इसी संदर्भ में बातचीत की कोई भी पहल दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष किन शर्तों पर सहमति बनाने के लिए तैयार होते हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ट्रंप के बताए गए ‘डायरेक्ट कॉन्टैक्ट’ को औपचारिक बातचीत में बदला जाता है या नहीं। इसके अलावा यह भी देखना होगा कि ईरान अपनी शर्तों में किस तरह बदलाव करता है और अमेरिका किन मांगों पर बातचीत के लिए तैयार होता है।
फिलहाल स्थिति यह है कि अमेरिका की तरफ से युद्ध खत्म होने की उम्मीद और बातचीत के संकेत मिले हैं, जबकि ईरान ने संप्रभुता, अपने अधिकारों और तय शर्तों की सुरक्षा पर जोर दिया है। इसलिए आने वाले दिनों में कूटनीतिक संपर्क और संभावित वार्ता इस पूरे संघर्ष की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।





