Bengaluru Startup GalaxEye: सैटेलाइट इमेजिंग टेक्नोलॉजी के लिए मिला US Patent, भारत की स्पेस-टेक दुनिया में बड़ी उपलब्धि???
GalaxEye US Patent: बेंगलुरु की स्पेस-टेक स्टार्टअप GalaxEye ने सैटेलाइट इमेजिंग के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है...
कंपनी को अपनी खास OptoSAR इमेजिंग तकनीक के लिए अमेरिका का पेटेंट मिला है। इस तकनीक में ऑप्टिकल और रडार सेंसर को एक साथ सिंक्रोनाइज करके पृथ्वी की तस्वीरें लेने की क्षमता है। खास बात यह है कि यह तकनीक बादल, खराब मौसम और अंधेरे जैसी परिस्थितियों में भी अर्थ ऑब्जर्वेशन डेटा उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।
बेंगलुरु की GalaxEye को मिला अमेरिकी पेटेंट
भारत की स्पेस-टेक इंडस्ट्री के लिए यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बेंगलुरु स्थित GalaxEye ने अपने सैटेलाइट इमेजिंग सिस्टम के लिए US patent हासिल किया है। कंपनी के मुताबिक पेटेंट उसके OptoSAR सिस्टम की मूल तकनीक से संबंधित है।
रिपोर्टों के अनुसार, GalaxEye का दावा है कि वह सैटेलाइट इमेजिंग तकनीक के इस क्षेत्र में अमेरिकी पेटेंट हासिल करने वाली पहली भारतीय स्टार्टअप है।
क्या है GalaxEye की OptoSAR Technology?
OptoSAR नाम दो अलग-अलग इमेजिंग तकनीकों के संयोजन से जुड़ा है।
एक तरफ Optical Imaging तकनीक कैमरे की मदद से पृथ्वी की तस्वीरें लेती है। दूसरी तरफ Synthetic Aperture Radar यानी SAR रडार सिग्नल का इस्तेमाल करके पृथ्वी की सतह की जानकारी हासिल करता है।
GalaxEye की तकनीक इन दोनों प्रणालियों को एक ही सैटेलाइट प्लेटफॉर्म पर साथ काम करने और उनके डेटा को आपस में सिंक्रोनाइज करने के लिए डिजाइन की गई है। इससे एक ही स्थान की ऑप्टिकल और रडार तस्वीरें लगभग एक ही समय में हासिल की जा सकती हैं।
खराब मौसम और रात में भी मिलेगी जानकारी
सैटेलाइट से पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मौसम और रोशनी है। सामान्य optical satellite imaging के लिए बादल और अंधेरा बड़ी बाधा बन सकते हैं।
SAR तकनीक इस मामले में ज्यादा उपयोगी होती है क्योंकि रडार आधारित इमेजिंग दिन और रात दोनों समय काम कर सकती है और बादलों के पार भी पृथ्वी की सतह की जानकारी हासिल कर सकती है।
GalaxEye का दावा है कि OptoSAR के जरिए दोनों तकनीकों की क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे मौसम की स्थिति बदलने के बावजूद ज्यादा भरोसेमंद Earth Observation data हासिल करने में मदद मिल सकती है।
एक ही सैटेलाइट में दो तरह की इमेजिंग
इस तकनीक की सबसे खास बात इसका dual-sensor approach है।
आम तौर पर optical और radar imaging के लिए अलग-अलग प्रणालियों या अलग-अलग सैटेलाइट डेटा की जरूरत पड़ सकती है। GalaxEye का सिस्टम इन दोनों क्षमताओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश करता है।
इससे किसी क्षेत्र की तस्वीर के साथ-साथ उसी स्थान से संबंधित radar information भी हासिल की जा सकती है। दोनों डेटा सेट को एक-दूसरे के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से पृथ्वी की सतह को ज्यादा व्यापक तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।
सुरक्षा से लेकर खेती तक में हो सकता है इस्तेमाल
सैटेलाइट इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल केवल अंतरिक्ष अनुसंधान तक सीमित नहीं है। पृथ्वी की निगरानी से मिलने वाला डेटा कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
इसमें प्रमुख रूप से:
- राष्ट्रीय सुरक्षा और निगरानी
- कृषि और फसल निगरानी
- आपदा प्रबंधन
- बाढ़ और भूस्खलन की निगरानी
- इंश्योरेंस
- इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग
- पर्यावरण निगरानी
- भौगोलिक और मैपिंग सेवाएं
शामिल हो सकते हैं। Reuters के मुताबिक, सैटेलाइट आधारित intelligence की मांग सुरक्षा, कृषि, बीमा और disaster response जैसे क्षेत्रों में बढ़ रही है।
GalaxEye ने लॉन्च किया था Drishti Satellite
GalaxEye की इस तकनीक को लेकर चर्चा पहले भी हो चुकी है। मई 2026 में कंपनी ने Drishti नाम का अपना पहला commercial satellite लॉन्च किया था।
कंपनी ने Drishti को दुनिया का पहला OptoSAR satellite बताया था, जिसमें optical imaging और Synthetic Aperture Radar दोनों क्षमताओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है।
Drishti मिशन को भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया क्योंकि इससे private companies द्वारा advanced Earth Observation technology विकसित करने की क्षमता सामने आई।
SpaceX के Falcon 9 से लॉन्च हुआ था Drishti
GalaxEye का Drishti satellite मई 2026 में SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के जरिए कक्षा में पहुंचाया गया था। कंपनी ने इसे अपनी OptoSAR तकनीक के प्रदर्शन और आगे के commercial satellite systems के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया था।
इस मिशन के बाद अमेरिकी पेटेंट मिलना कंपनी के intellectual property portfolio को और मजबूत करता है।
GalaxEye की स्थापना किसने की?
GalaxEye की स्थापना IIT Madras से जुड़े इंजीनियरों ने की है। कंपनी Earth Observation और space-based imaging technology पर काम करती है।
Reuters के अनुसार, कंपनी अब तक लगभग 21 मिलियन डॉलर की funding जुटा चुकी है और आने वाले वर्षों में करीब 30 satellites की constellation विकसित करने की योजना रखती है।
इससे संकेत मिलता है कि कंपनी सिर्फ एक satellite mission तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि बड़े स्तर पर satellite-based Earth Observation business तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
भारत के Space-Tech Startup Ecosystem के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
भारत में पिछले कुछ वर्षों में private space sector तेजी से विकसित हुआ है। पहले जहां अंतरिक्ष क्षेत्र मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों पर निर्भर था, वहीं अब भारतीय startups satellite manufacturing, Earth Observation, launch vehicles, space analytics और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
GalaxEye का अमेरिकी पेटेंट इस बात का उदाहरण है कि भारतीय startups अब केवल घरेलू बाजार के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक space-tech market के लिए भी technology विकसित कर रहे हैं।
आगे क्या है GalaxEye का प्लान?
कंपनी आने वाले वर्षों में अपने satellite network को बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक GalaxEye अगले पांच वर्षों में करीब 30 satellites की constellation बनाने की योजना रखती है।
अगर यह योजना सफल होती है तो कंपनी अलग-अलग क्षेत्रों के लिए लगातार और ज्यादा व्यापक Earth Observation data उपलब्ध करा सकती है।
Bengaluru बन रहा है Space-Tech Innovation का बड़ा केंद्र
GalaxEye की सफलता एक और वजह से महत्वपूर्ण है। बेंगलुरु लंबे समय से भारत के aerospace और technology ecosystem का बड़ा केंद्र रहा है। अब private space startups के बढ़ने से शहर की भूमिका और मजबूत हो रही है।
GalaxEye ने अगस्त 2026 में बेंगलुरु स्थित spacecraft engineering company StarOps का अधिग्रहण भी किया था, जिससे satellite manufacturing और spacecraft system capabilities को मजबूत करने की दिशा में कंपनी आगे बढ़ रही है।
निष्कर्ष
बेंगलुरु की GalaxEye को अपनी OptoSAR satellite imaging technology के लिए अमेरिकी पेटेंट मिलना भारत के private space sector के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। Optical imaging और SAR technology को एक ही satellite platform पर सिंक्रोनाइज करने वाला यह सिस्टम मौसम और रोशनी की सीमाओं को कम करने में मदद कर सकता है।
सुरक्षा, खेती, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में ऐसी technology की मांग बढ़ रही है। अब GalaxEye की नजर बड़े satellite constellation और global Earth Observation market पर है।
अगर कंपनी अपनी योजना के मुताबिक 30-satellite constellation तैयार करने में सफल रहती है, तो यह भारतीय private space industry के लिए एक और बड़ा कदम साबित हो सकता है।





