Vande Mataram Row: श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन के दौरान पूरा ‘वंदे मातरम’ बजाया गया???
वंदे मातरम’ पर NC और कांग्रेस में रार! पूरे राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े रहे अब्दुल्ला, कांग्रेस ने दी नसीहत तो मिला जवाब...
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े रहे। इसके बाद कांग्रेस और उसकी सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच सियासी तकरार सामने आ गई।
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन समारोह से सामने आया एक दृश्य अब देश की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण बजाया गया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा उनके पिता एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समेत कई नेता पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े रहे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ‘वंदे मातरम’ के पूरे छह अंतरों को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहले से राजनीतिक बहस चल रही है। अब इस विवाद में कांग्रेस की अपनी सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) भी अलग रुख के साथ सामने आ गई है। कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों से 1937 में अपनाए गए दो अंतरों वाले संस्करण का पालन करने की अपील की, जबकि NC ने साफ कहा कि कांग्रेस सहयोगी दलों पर यह तय नहीं कर सकती कि राष्ट्रगीत कितना गाया जाए।
श्रीनगर फिल्म फेस्टिवल में क्या हुआ?
जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का उद्घाटन श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में हुआ। चार दिवसीय इस फिल्म महोत्सव को जम्मू-कश्मीर में फिल्म संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में जब ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण बजाया गया तो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला और वहां मौजूद अन्य गणमान्य लोग सम्मान में खड़े रहे। रिपोर्टों के मुताबिक पूरा गीत करीब 3 मिनट 10 सेकंड तक चला। इसके बाद राष्ट्रगान भी बजाया गया।
खास बात यह रही कि यह कार्यक्रम मुस्लिम बहुल कश्मीर में आयोजित हुआ और वहां मौजूद नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व ने पूरे राष्ट्रगीत के दौरान खड़े रहकर सम्मान प्रदर्शित किया। इसी वजह से यह तस्वीर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गई।
कांग्रेस ने NC को दी नसीहत
श्रीनगर के कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सहयोगी दलों के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि उसके सहयोगी भी स्वतंत्रता सेनानियों के विचार और उस समय लिए गए निर्णय का सम्मान करें।
वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस द्वारा अपनाया गया संस्करण देश के बहुलतावादी और समावेशी चरित्र को ध्यान में रखकर चुना गया था। उनका तर्क है कि पूरा संस्करण उस समन्वयवादी और बहुलतावादी भावना के साथ सहज नहीं बैठता, जिसे स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने आगे बढ़ाया था।
कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ने 1937 के कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले के आधार पर अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरे गाने का फैसला किया है।
वेणुगोपाल ने अपने बयान में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला दिया।
NC का कांग्रेस को दो टूक जवाब
कांग्रेस की अपील के बाद मामला यहीं नहीं रुका। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के रुख पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गठबंधन में शामिल होना किसी पार्टी को दूसरे सहयोगी पर अपनी पसंद थोपने का अधिकार नहीं देता।
NC नेता बशीर अहमद ने कहा कि कांग्रेस यह तय नहीं कर सकती कि कोई सहयोगी दल ‘वंदे मातरम’ को किस तरह या कितनी अवधि तक गाए। उनके मुताबिक लोगों की पसंद को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और किसी पर कुछ थोपा नहीं जाना चाहिए।
इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि ‘वंदे मातरम’ का मुद्दा अब सिर्फ कांग्रेस और बीजेपी के बीच का राजनीतिक विवाद नहीं रहा, बल्कि INDIA गठबंधन के भीतर भी मतभेद का कारण बन गया है।
कांग्रेस नेता ने ‘नागपुर’ का किया जिक्र
NC के जवाब के बाद कांग्रेस की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई। कांग्रेस नेता कपिल सिंह ने कहा कि उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं और उन्हें कांग्रेस के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने इस विवाद में ‘नागपुर’ का जिक्र करते हुए NC नेतृत्व पर कांग्रेस के बजाय RSS की विचारधारा के अनुरूप चलने का आरोप लगाया। इससे दोनों सहयोगी दलों के बीच बयानबाजी और तीखी हो गई।
हालांकि NC की तरफ से इस तरह की राजनीतिक आलोचना को स्वीकार करने के बजाय यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी अपने फैसलों के लिए स्वतंत्र है।
आखिर कांग्रेस सिर्फ दो अंतरों पर क्यों है कायम?
‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस का मौजूदा रुख अचानक नहीं आया है। पार्टी ने पिछले महीने अपनी कार्यसमिति के फैसले में 1937 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए आधिकारिक पार्टी कार्यक्रमों में गीत के केवल पहले दो अंतरे गाने की बात दोहराई थी।
कांग्रेस का तर्क है कि उस समय देश की सामाजिक और धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए ऐसा निर्णय लिया गया था। पार्टी का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद को धार्मिक आधार पर बढ़ने से रोकने और स्वतंत्रता आंदोलन की समावेशी भावना बनाए रखने के लिए यह रास्ता अपनाया गया था।
दूसरी ओर बीजेपी लगातार कांग्रेस के इस रुख की आलोचना करती रही है और सवाल उठाती रही है कि राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण को लेकर आपत्ति क्यों है।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस और NC के बीच जारी इस विवाद को बीजेपी ने भी हाथोंहाथ लिया है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पूरे ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस की आपत्ति ने उसे राजनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया है।
बीजेपी का कहना है कि जब जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े हो सकते हैं, तो कांग्रेस को इससे परेशानी क्यों हो रही है।
बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के मौजूदा रुख को कथित ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ से जोड़ने की कोशिश की है। हालांकि कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करती रही है और अपने रुख को ऐतिहासिक तथा धर्मनिरपेक्ष मूल्यों से जोड़ती है।
सरकार की गाइडलाइन भी बनी चर्चा का हिस्सा
इस पूरे विवाद में केंद्र की ओर से जारी ‘वंदे मातरम’ संबंधी नई गाइडलाइन भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान बजाए जाने की स्थिति में ‘वंदे मातरम’ को पहले और उसके बाद ‘जन गण मन’ बजाने का प्रोटोकॉल निर्धारित किया गया है।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आधिकारिक रूप से गीत बजने के दौरान लोगों से सम्मान में खड़े रहने की अपेक्षा की गई है। श्रीनगर के कार्यक्रम में अब्दुल्ला परिवार और अन्य लोगों का पूरे गीत के दौरान खड़ा रहना इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
क्या INDIA गठबंधन में बढ़ सकती है दूरी?
‘वंदे मातरम’ पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का अलग-अलग रुख INDIA गठबंधन के लिए भी राजनीतिक चुनौती बन सकता है। दोनों दल राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर की राजनीति में NC की अपनी अलग राजनीतिक पहचान और प्राथमिकताएं हैं।
उमर अब्दुल्ला की सरकार को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर किसी संवेदनशील मुद्दे पर दोनों दलों के बीच सार्वजनिक मतभेद सामने आना गठबंधन की एकजुटता को लेकर सवाल खड़े कर सकता है।
हालांकि फिलहाल यह विवाद केवल ‘वंदे मातरम’ के गायन के तरीके और राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित दिखाई देता है। इसे गठबंधन टूटने या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
श्रीनगर की तस्वीर ने बदल दिया सियासी नैरेटिव
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा उस दृश्य की हो रही है, जिसमें मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूक अब्दुल्ला पूरे ‘वंदे मातरम’ के दौरान खड़े दिखाई दे रहे हैं।
यही तस्वीर कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से असहज सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि एक तरफ उसकी अपनी पार्टी दो अंतरों वाले संस्करण पर कायम है, वहीं उसके गठबंधन सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेता पूरे गीत के दौरान सम्मान में खड़े दिखाई दिए।
इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और उसके पूरे संस्करण के गायन को लेकर राजनीतिक दलों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं। श्रीनगर का कार्यक्रम इसी अंतर का ताजा उदाहरण बन गया है।
निष्कर्ष
‘वंदे मातरम’ को लेकर छिड़ी बहस अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला का पूरे राष्ट्रगीत के दौरान खड़े रहना कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक सवाल बन गया, जबकि कांग्रेस की नसीहत पर NC ने भी साफ कर दिया कि गठबंधन सहयोगी होने का मतलब यह नहीं कि कोई पार्टी दूसरे पर अपनी पसंद थोप सकती है।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस इस मतभेद को किस तरह संभालते हैं। फिलहाल इतना जरूर है कि ‘वंदे मातरम’ पर छिड़ी बहस ने INDIA गठबंधन के भीतर विचारों की अलग-अलग धाराओं को सामने ला दिया है।





