UN ने 164 देशों के समर्थन से Equal Earth Map को बढ़ावा दिया, जानिए Mercator Map की खामियां और नए नक्शे की पूरी कहानी???
किसने बनाया था दुनिया का पुराना नक्शा, क्यों पड़ी नए मैप की जरूरत? जानिए पूरा इतिहास....
आखिर कौन-सा था पुराना विश्व नक्शा?
यहां जिस पुराने नक्शे की चर्चा हो रही है, वह Mercator Projection है। इसे फ्लेमिश कार्टोग्राफर Gerardus Mercator ने वर्ष 1569 में प्रकाशित किया था। इसका मूल उद्देश्य दुनिया के देशों का वास्तविक क्षेत्रफल दिखाना नहीं था, बल्कि समुद्री यात्राओं और नेविगेशन को आसान बनाना था।
Mercator Projection की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें दिशा और कोणों को इस तरह संरक्षित किया गया कि समुद्री यात्रियों के लिए निश्चित दिशा में चलने वाली रेखाएं मानचित्र पर सीधी दिखाई दे सकें। उस दौर में समुद्री यात्राओं, व्यापार और खोज अभियानों के लिए यह बेहद उपयोगी तकनीक थी।
समस्या यह थी कि जब गोल पृथ्वी को सपाट कागज पर दिखाया जाता है, तो किसी न किसी चीज में विकृति आनी ही है। Mercator Projection में ध्रुवों के पास के इलाकों का आकार बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसका असर यह हुआ कि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड जैसे उत्तरी क्षेत्रों का आकार वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में बहुत बड़ा नजर आने लगा। वहीं अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण एशिया जैसे भूमध्य रेखा के आसपास के क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे दिखाई देने लगे।
क्या Mercator Map गलत था?
यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि Mercator Map “गलत” था। असल में वह एक खास उद्देश्य के लिए बनाया गया मानचित्र था।
मानचित्र विज्ञान यानी Cartography में पृथ्वी की गोल सतह को सपाट कागज या स्क्रीन पर उतारने के लिए अलग-अलग projections इस्तेमाल किए जाते हैं। कोई projection क्षेत्रफल को बेहतर दिखाता है, कोई आकार को, कोई दिशा या दूरी को।
संयुक्त राष्ट्र की अपनी जानकारी के अनुसार भी दुनिया का कोई एक projection हर उद्देश्य के लिए सर्वश्रेष्ठ नहीं हो सकता। अलग-अलग projections क्षेत्रफल, दिशा, दूरी और आकार के बीच अलग-अलग संतुलन बनाते हैं।
इसलिए Mercator Projection समुद्री नेविगेशन के लिए उपयोगी था, लेकिन दुनिया के महाद्वीपों के वास्तविक आकार की तुलना करने के लिए यह उपयुक्त नहीं है।
सबसे बड़ा भ्रम: ग्रीनलैंड और अफ्रीका
Mercator Map को देखकर अक्सर ऐसा लगता है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका का आकार लगभग बराबर है। लेकिन वास्तविकता बिल्कुल अलग है।
अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना अधिक है। Mercator Projection में उच्च अक्षांशों पर होने वाली विकृति के कारण ग्रीनलैंड बहुत बड़ा दिखाई देता है।
यही वजह है कि जब छात्र बचपन से ऐसे नक्शे देखते हैं, तो उन्हें दुनिया के विभिन्न हिस्सों के वास्तविक आकार को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
उदाहरण के तौर पर
- अफ्रीका वास्तविकता में बहुत विशाल महाद्वीप है।
- दक्षिण अमेरिका भी Mercator Map की तुलना में अधिक बड़ा दिखाई देना चाहिए।
- भारत और दक्षिण एशिया का वास्तविक क्षेत्रफल भी पारंपरिक नक्शे की तुलना में अलग अनुपात में दिखाई देता है।
- दूसरी ओर ग्रीनलैंड, कनाडा और उत्तरी यूरोप जैसे ऊंचे अक्षांशों वाले क्षेत्र नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़े दिखते हैं।
फिर नया Equal Earth Map क्या है?
जिस नए नक्शे की चर्चा इस समय पूरी दुनिया में हो रही है, उसका नाम Equal Earth Projection है।
दिलचस्प बात यह है कि इसे 2026 में नहीं बनाया गया। Equal Earth Projection वर्ष 2018 में Bojan Šavrič, Tom Patterson और Bernhard Jenny ने विकसित किया था। इसका उद्देश्य ऐसा विश्व मानचित्र तैयार करना था, जिसमें महाद्वीपों के आपसी क्षेत्रफल का अनुपात सही बना रहे और साथ ही नक्शा देखने में भी सहज लगे।
यानी 2026 में नया “मैप” अचानक पैदा नहीं हुआ है। नया बदलाव इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल और प्रोत्साहन से जुड़ा है।
Equal Earth Map में क्या बदलेगा?
Equal Earth एक equal-area projection है। इसका मतलब है कि पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों का क्षेत्रफल एक-दूसरे के मुकाबले ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है।
इसमें अफ्रीका पहले से कहीं अधिक बड़ा नजर आता है, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार Mercator Map की तुलना में छोटा दिखाई देता है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अफ्रीका वास्तव में बड़ा हो गया या यूरोप छोटा हो गया। पृथ्वी पर कुछ भी नहीं बदला है, केवल उसे दिखाने का तरीका बदला है।
यही बात संयुक्त राष्ट्र की बहस में भी महत्वपूर्ण रही। UN के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक प्रस्ताव का उद्देश्य महाद्वीपों के सापेक्ष आकार को अधिक सही तरीके से प्रस्तुत करना है, न कि देशों की सीमाओं या संप्रभुता को बदलना।
164 देशों ने क्यों किया समर्थन?
संयुक्त राष्ट्र महासभा में “Correct the Map: Rebalancing Global Cartographic Representation and Promoting Equitable Representation of the World’s Regions, Particularly Africa” नाम से प्रस्ताव लाया गया।
इसका नेतृत्व Togo ने किया और इसे अफ्रीकी देशों तथा African Union का समर्थन मिला।
वोटिंग में:
164 देश — समर्थन में
1 देश — विरोध में, अमेरिका
6 देश — Abstain
प्रस्ताव पारित हो गया।
प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल अफ्रीका की बात नहीं करता, बल्कि दुनिया के उन क्षेत्रों को अधिक सही ढंग से दिखाने की बात करता है जिनका आकार Mercator Projection में कम दिखाई देता है।
अमेरिका ने क्यों किया विरोध?
अमेरिका इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाला एकमात्र देश था।
अमेरिकी पक्ष ने इस पहल को लेकर वैचारिक और राजनीतिक आपत्तियां जताईं तथा इसे ऐसे मुद्दे के रूप में देखा जो संयुक्त राष्ट्र के दूसरे जरूरी कामों से ध्यान भटका सकता है।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नए नक्शे को अपनाने का UN प्रस्ताव कानूनी तौर पर सभी देशों पर बाध्यकारी नहीं है।
अर्थात स्कूल, सरकारें, मीडिया कंपनियां या टेक कंपनियां इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित की जा सकती हैं, लेकिन Mercator Projection को दुनिया भर में इस्तेमाल करने पर कोई वैश्विक प्रतिबंध नहीं लगा है।
भारत का क्या रुख है?
भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, लेकिन भारत ने एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि वह equal-area map projections के व्यापक इस्तेमाल के सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं समझा जाना चाहिए कि भारत ने केवल Equal Earth Projection को ही एकमात्र सही projection मान लिया है।
भारत के मुताबिक अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग-अलग projections की जरूरत हो सकती है। इसलिए मानचित्र बनाने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
इसका मतलब है कि भारत का समर्थन मुख्य रूप से अधिक सटीक क्षेत्रफल-आधारित प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के लिए है।
क्या इससे Google Maps और बाकी डिजिटल मैप बदल जाएंगे?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज अधिकांश लोग कागज के नक्शे से ज्यादा Google Maps और दूसरे डिजिटल मैप्स का इस्तेमाल करते हैं।
UN के प्रस्ताव में सरकारों के साथ-साथ स्कूलों और तकनीकी कंपनियों को भी अधिक सटीक विश्व मानचित्रों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपके फोन में इस्तेमाल होने वाला हर मैप अगले दिन अपने आप Equal Earth में बदल जाएगा।
दरअसल डिजिटल मैपिंग में अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग projections इस्तेमाल किए जाते हैं। सड़क मार्ग, नेविगेशन, ग्लोब व्यू, मौसम, जनसंख्या, क्षेत्रफल और डेटा विजुअलाइजेशन के लिए एक ही projection जरूरी नहीं है।
क्या Equal Earth भी पूरी तरह Perfect है?
नहीं।
यह बात समझना बेहद जरूरी है।
पृथ्वी गोल है और हमारा कागज या कंप्यूटर स्क्रीन सपाट। इसलिए पूरी पृथ्वी को एक सपाट नक्शे पर बिना किसी विकृति के दिखाना गणितीय रूप से संभव नहीं है।
Equal Earth का फायदा यह है कि यह क्षेत्रफल के अनुपात को सुरक्षित रखता है, लेकिन इसके बदले आकार, दूरी या दूसरी विशेषताओं में कुछ विकृति हो सकती है।
यही वजह है कि दुनिया में Robinson, Winkel Tripel, Eckert IV, Gall-Peters और कई अन्य projections भी मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र भी लंबे समय से अलग-अलग उद्देश्यों के अनुसार विभिन्न projections का इस्तेमाल करता रहा है।
क्या यह सिर्फ नक्शा बदलने की कहानी है?
नहीं, इसके पीछे एक बड़ा शैक्षणिक और सामाजिक पहलू भी है।
नक्शा केवल जमीन और समुद्र दिखाने का साधन नहीं है। नक्शा यह भी प्रभावित कर सकता है कि हम दुनिया को किस अनुपात और नजरिए से देखते हैं।
अगर किसी क्षेत्र को लगातार बड़ा और किसी दूसरे क्षेत्र को छोटा दिखाया जाए, तो लोगों के मन में उसके आकार, महत्व और वैश्विक स्थिति को लेकर धारणा प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से अफ्रीकी देशों ने लंबे समय से यह सवाल उठाया है कि दुनिया के स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले नक्शों में अफ्रीका का वास्तविक आकार क्यों नहीं दिखता।
संयुक्त राष्ट्र में Togo के विदेश मंत्री Robert Dussey ने भी इस पहल को शिक्षा और लोगों की वैश्विक समझ से जोड़ते हुए कहा कि नक्शे हमारी कल्पना और दुनिया को समझने के तरीके को प्रभावित करते हैं।
क्या अब Mercator Map इतिहास बन जाएगा?
ऐसा तुरंत नहीं होगा।
Mercator Projection 450 साल से अधिक समय से दुनिया के सबसे प्रभावशाली मानचित्र प्रक्षेपणों में से एक रहा है। इसका इस्तेमाल समुद्री नेविगेशन और बाद में शिक्षा तथा विभिन्न मानचित्रों में व्यापक रूप से हुआ।
अब संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव दुनिया को यह संदेश देता है कि जब उद्देश्य महाद्वीपों के वास्तविक आकार की तुलना करना हो, तो area-preserving projections को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इसलिए भविष्य में स्कूलों की किताबों, मीडिया ग्राफिक्स, विश्व मानचित्रों और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर Equal Earth या दूसरे equal-area maps का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
पुराने और नए नक्शे में आसान अंतर
| विशेषता | Mercator Projection | Equal Earth Projection |
|---|---|---|
| शुरुआत | 1569 | 2018 |
| प्रमुख उद्देश्य | समुद्री नेविगेशन | विश्व का अधिक संतुलित क्षेत्रफल प्रदर्शन |
| क्षेत्रफल | काफी विकृत | सापेक्ष क्षेत्रफल सुरक्षित |
| अफ्रीका | अपेक्षाकृत छोटा दिखता है | वास्तविक अनुपात के करीब |
| ग्रीनलैंड | बहुत बड़ा दिखता है | अधिक वास्तविक अनुपात |
| ध्रुवीय क्षेत्र | काफी फैलते हैं | कम विकृत |
| उपयोग | नेविगेशन व कई डिजिटल मैप | शिक्षा, तुलना और वैश्विक प्रतिनिधित्व |
Equal Earth को Bojan Šavrič, Tom Patterson और Bernhard Jenny ने 2018 में विकसित किया था।
निष्कर्ष
दुनिया का नया नक्शा वास्तव में पृथ्वी का नया नक्शा नहीं, बल्कि पृथ्वी को सपाट सतह पर दिखाने का एक नया और अधिक क्षेत्रफल-सटीक तरीका है। 1569 में Gerardus Mercator ने समुद्री यात्राओं को आसान बनाने के लिए जो projection तैयार किया था, वह अपने उद्देश्य में बेहद सफल था, लेकिन उसमें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के क्षेत्रफल में भारी विकृति आती है।
अब 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 164-1 के अंतर से “Correct the Map” प्रस्ताव को मंजूरी देकर equal-area projections के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। इसका मकसद खास तौर पर अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के क्षेत्रों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अधिक करीब दिखाना है।
यानी धरती नहीं बदली है, उसे देखने का नजरिया बदल रहा है।





